NCERT Book Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब “Exploring Society: India and Beyond” (Part 2) में न्यायपालिका से जुड़े कथित आपत्तिजनक अंश को लेकर सख्त रुख अपनाया है. किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ और “न्याय में देरी मतलब न्याय से वंचित” जैसे कथनों को लेकर अदालत ने गंभीर आपत्ति जताई. अदालत ने इसे संभावित आपराधिक अवमानना का मामला मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और NCERT के निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने आदेश दिया कि किताब की सभी भौतिक प्रतियां तत्काल प्रभाव से जब्त की जाएं और उसका डिजिटल संस्करण भी सार्वजनिक प्लेटफॉर्म से हटाया जाए. कोर्ट ने साफ कहा कि इस पुस्तक की पहुंच पर “पूर्ण और पूर्णतः प्रतिबंध” लगाया जाता है, जब तक मामले की विस्तृत जांच और उचित संशोधन न हो जाए.
संविधान और संस्थाओं की गरिमा पर जोर
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संविधान निर्माताओं ने देश में मजबूत और स्वायत्त लोकतांत्रिक संस्थाओं की परिकल्पना की थी. तीनों स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच स्पष्ट संवैधानिक विभाजन और शक्तियों का संतुलन तय किया गया है. ऐसे में स्कूली स्तर पर पढ़ाए जाने वाले कंटेंट में संस्थाओं की गरिमा और संवैधानिक मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए.
सॉलिसिटर जनरल की बिना शर्त माफी
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि अब तक वितरित 32 प्रतियां वापस मंगाई जा चुकी हैं और संबंधित अध्याय को दोबारा लिखा जाएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि आपत्तिजनक सामग्री को पूरी तरह हटाकर संशोधित संस्करण ही प्रकाशित किया जाएगा.
शिक्षा सामग्री पर जवाबदेही का संदेश
कोर्ट ने यह भी पूछा कि आखिर क्यों न संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कानून या अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की जाए. साथ ही, पीडीएफ और अन्य डिजिटल कॉपी हटाने के निर्देशों के पालन की मांग की गई. यह मामला केवल एक किताब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा सामग्री में जिम्मेदारी, संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान और लोकतांत्रिक संतुलन के प्रति संवेदनशीलता का बड़ा संदेश देता है.