NCERT Deemed University: भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करते हुए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को “अलग श्रेणी के तहत डीम्ड यूनिवर्सिटी” का दर्जा दे दिया गया है. शिक्षा मंत्रालय द्वारा 30 मार्च को जारी इस अधिसूचना के बाद अब NCERT डिप्लोमा से लेकर पीएचडी स्तर तक के कोर्स स्वतंत्र रूप से संचालित कर सकेगी.
अब तक NCERT मुख्य रूप से स्कूल पाठ्यक्रम और शैक्षणिक सामग्री तैयार करने तक सीमित थी. लेकिन इस नए दर्जे के साथ इसका दायरा काफी बढ़ गया है. अब यह संस्था ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, डॉक्टोरल और अन्य विशेष शैक्षणिक प्रोग्राम शुरू कर सकेगी. यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
घटक संस्थानों को भी मिलेगा लाभ
इस निर्णय का असर NCERT के छह प्रमुख संस्थानों पर भी पड़ेगा, जिनमें अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलांग स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIEs) शामिल हैं. पहले ये संस्थान अलग-अलग विश्वविद्यालयों से संबद्ध थे और नए कोर्स शुरू करने के लिए उन्हें अनुमोदन लेना पड़ता था. अब वे अधिक स्वायत्त होकर अपने शैक्षणिक कार्यक्रम तैयार कर सकेंगे.
UGC के नियमों के तहत काम करेगी NCERT
हालांकि NCERT को स्वायत्तता मिली है, लेकिन यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियामक ढांचे के भीतर ही काम करेगी. सभी कोर्स UGC के मानकों के अनुसार होंगे और कोई भी नया कैंपस या प्रोग्राम तय दिशानिर्देशों के तहत ही शुरू किया जा सकेगा. साथ ही, संस्था को गैर-व्यावसायिक बनाए रखने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश भी लागू किए गए हैं.
डिजिटल और गुणवत्ता मानकों पर फोकस
NCERT को अब NIRF रैंकिंग में भाग लेना होगा और NAAC व NBA से मान्यता प्राप्त करनी होगी. इसके अलावा, Academic Bank of Credits (ABC) जैसे डिजिटल सिस्टम लागू किए जाएंगे, जिससे छात्रों के अकादमिक रिकॉर्ड को सुरक्षित और सुगम बनाया जा सके.
तीन साल की लंबी प्रक्रिया के बाद फैसला
यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया, बल्कि करीब तीन साल की प्रक्रिया के बाद सामने आया है. वर्ष 2022 में शुरू हुई पहल, 2023 में लेटर ऑफ इंटेंट और 2025 में कंप्लायंस रिपोर्ट के बाद आखिरकार 2026 में इसे मंजूरी मिली.
आगे की राह और चुनौतियां
जहां एक ओर यह कदम NCERT को एक वैश्विक स्तर के रिसर्च संस्थान के रूप में स्थापित कर सकता है, वहीं कुछ विशेषज्ञों ने इसकी स्वायत्तता पर संभावित असर को लेकर चिंता भी जताई है.