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NEET Success Story: नीट में 720 में से 710 अंक, स्मार्ट स्टडी बनी गेम-चेंजर, RML में मिल गई MBBS सीट

NEET Success Story: नीट यूजी में ऑल इंडिया रैंक 39 हासिल कर झारखंड की एक लड़की ने दिखा दिया कि NEET में सफलता सिर्फ़ मेहनत नहीं, बल्कि सही रणनीति, रेगुलर प्रैक्टिस और संतुलित सोच का नतीजा होती है.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: January 11, 2026 14:34:50 IST

NEET Success Story: नीट यूजी में 720 में से 710 अंक हासिल करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन जब इसके साथ ऑल इंडिया रैंक 39 जुड़ जाए, तो यह सफलता लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन जाती है. झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली सुमेघा सिन्हा (Sumegha Sinha) ने यह साबित कर दिया कि NEET सिर्फ़ कड़ी मेहनत नहीं, बल्कि सही रणनीति, निरंतरता और संतुलन का खेल है.

शुरुआती पढ़ाई और मजबूत अकादमिक बैकग्राउंड

सुमेघा ने क्लास 10 में 93 प्रतिशत और क्लास 12 में 94.6 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. पढ़ाई में शुरू से ही उनकी पकड़ मज़बूत रही. NEET UG 2023 में शानदार प्रदर्शन के बाद वह अब ABVIMS और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली से MBBS कर रही हैं. उनकी यह यात्रा बताती है कि स्कूल लेवल पर बनाई गई मजबूत नींव आगे चलकर बड़े एग्जाम में काम आती है.

कॉन्सेप्ट क्लैरिटी: सुमेघा की तैयारी की नींव

सुमेघा मानती हैं कि NEET की असली तैयारी कॉन्सेप्ट को समझने से शुरू होती है, खासकर बायोलॉजी में. उन्होंने रटने के बजाय हर टॉपिक को गहराई से समझा. NCERT किताबें उनकी तैयारी का सबसे अहम हिस्सा रहीं. बायोलॉजी के लिए उन्होंने NCERT को कई बार पढ़ा और हर लाइन, डायग्राम और फैक्ट पर खास ध्यान दिया. फिजिक्स और केमिस्ट्री में भी उन्होंने यही तरीका अपनाया. इसके साथ ही कम सवाल, लेकिन सही और सोचने वाले सवाल पर फोकस किया.

लंबे घंटों की जगह स्मार्ट स्टडी

जहां कई छात्र 12–14 घंटे पढ़ाई का दबाव लेते हैं, वहीं सुमेघा ने 7–8 घंटे की फोकस्ड स्टडी को चुना. उनका मानना था कि क्वालिटी पढ़ाई, क्वांटिटी से ज़्यादा असरदार होती है. समय पर ब्रेक, पूरी नींद और माइंड को फ्रेश रखने की आदत ने उन्हें थकान और स्ट्रेस से दूर रखा.

मॉक टेस्ट और ईमानदार एनालिसिस

सुमेघा की सफलता में रेगुलर मॉक टेस्ट का बड़ा रोल रहा. वह हर टेस्ट को असली परीक्षा की तरह देती थीं. लेकिन असली फर्क तब पड़ा जब उन्होंने हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का एनालिसिस किया. उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि गलती क्यों हुई, कॉन्सेप्ट की कमी, कैलकुलेशन एरर या टाइम मैनेजमेंट और फिर उसी पर काम किया.

रिवीजन और सही माइंडसेट

NEET से पहले के महीनों में सुमेघा ने नए टॉपिक्स से दूरी बनाई और रिवीजन पर पूरा फोकस किया. NCERT, शॉर्ट नोट्स और एरर नोटबुक उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी. इसके साथ ही, परिवार का सपोर्ट और पॉजिटिव माइंडसेट उन्हें मानसिक रूप से मज़बूत बनाए रखता था.

NEET एस्पिरेंट्स के लिए सीख

सुमेघा सिन्हा की कहानी बताती है कि NEET डरने का नहीं, समझदारी से लड़ने का एग्जाम है. सही प्लान, लगातार मेहनत और खुद पर भरोसा ही वो मंत्र है, जो किसी भी छात्र को टॉप रैंक तक पहुंचा सकता है.

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NEET Success Story: नीट में 720 में से 710 अंक, स्मार्ट स्टडी बनी गेम-चेंजर, RML में मिल गई MBBS सीट

NEET Success Story: नीट यूजी में ऑल इंडिया रैंक 39 हासिल कर झारखंड की एक लड़की ने दिखा दिया कि NEET में सफलता सिर्फ़ मेहनत नहीं, बल्कि सही रणनीति, रेगुलर प्रैक्टिस और संतुलित सोच का नतीजा होती है.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: January 11, 2026 14:34:50 IST

NEET Success Story: नीट यूजी में 720 में से 710 अंक हासिल करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन जब इसके साथ ऑल इंडिया रैंक 39 जुड़ जाए, तो यह सफलता लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन जाती है. झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली सुमेघा सिन्हा (Sumegha Sinha) ने यह साबित कर दिया कि NEET सिर्फ़ कड़ी मेहनत नहीं, बल्कि सही रणनीति, निरंतरता और संतुलन का खेल है.

शुरुआती पढ़ाई और मजबूत अकादमिक बैकग्राउंड

सुमेघा ने क्लास 10 में 93 प्रतिशत और क्लास 12 में 94.6 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. पढ़ाई में शुरू से ही उनकी पकड़ मज़बूत रही. NEET UG 2023 में शानदार प्रदर्शन के बाद वह अब ABVIMS और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली से MBBS कर रही हैं. उनकी यह यात्रा बताती है कि स्कूल लेवल पर बनाई गई मजबूत नींव आगे चलकर बड़े एग्जाम में काम आती है.

कॉन्सेप्ट क्लैरिटी: सुमेघा की तैयारी की नींव

सुमेघा मानती हैं कि NEET की असली तैयारी कॉन्सेप्ट को समझने से शुरू होती है, खासकर बायोलॉजी में. उन्होंने रटने के बजाय हर टॉपिक को गहराई से समझा. NCERT किताबें उनकी तैयारी का सबसे अहम हिस्सा रहीं. बायोलॉजी के लिए उन्होंने NCERT को कई बार पढ़ा और हर लाइन, डायग्राम और फैक्ट पर खास ध्यान दिया. फिजिक्स और केमिस्ट्री में भी उन्होंने यही तरीका अपनाया. इसके साथ ही कम सवाल, लेकिन सही और सोचने वाले सवाल पर फोकस किया.

लंबे घंटों की जगह स्मार्ट स्टडी

जहां कई छात्र 12–14 घंटे पढ़ाई का दबाव लेते हैं, वहीं सुमेघा ने 7–8 घंटे की फोकस्ड स्टडी को चुना. उनका मानना था कि क्वालिटी पढ़ाई, क्वांटिटी से ज़्यादा असरदार होती है. समय पर ब्रेक, पूरी नींद और माइंड को फ्रेश रखने की आदत ने उन्हें थकान और स्ट्रेस से दूर रखा.

मॉक टेस्ट और ईमानदार एनालिसिस

सुमेघा की सफलता में रेगुलर मॉक टेस्ट का बड़ा रोल रहा. वह हर टेस्ट को असली परीक्षा की तरह देती थीं. लेकिन असली फर्क तब पड़ा जब उन्होंने हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का एनालिसिस किया. उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि गलती क्यों हुई, कॉन्सेप्ट की कमी, कैलकुलेशन एरर या टाइम मैनेजमेंट और फिर उसी पर काम किया.

रिवीजन और सही माइंडसेट

NEET से पहले के महीनों में सुमेघा ने नए टॉपिक्स से दूरी बनाई और रिवीजन पर पूरा फोकस किया. NCERT, शॉर्ट नोट्स और एरर नोटबुक उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी. इसके साथ ही, परिवार का सपोर्ट और पॉजिटिव माइंडसेट उन्हें मानसिक रूप से मज़बूत बनाए रखता था.

NEET एस्पिरेंट्स के लिए सीख

सुमेघा सिन्हा की कहानी बताती है कि NEET डरने का नहीं, समझदारी से लड़ने का एग्जाम है. सही प्लान, लगातार मेहनत और खुद पर भरोसा ही वो मंत्र है, जो किसी भी छात्र को टॉप रैंक तक पहुंचा सकता है.

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