NEET Success Story: नीट यूजी पास करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन जब एक मां और बेटी साथ मिलकर यह मुकाम हासिल करें, तो कहानी और भी खास बन जाती है. तमिलनाडु की 49 वर्षीय अमुथवल्ली मणिवन्नन और उनकी बेटी संयुक्ता ने NEET 2024 क्वालिफाई कर यह साबित कर दिया कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती.
अमुथवल्ली पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट हैं. युवावस्था में उन्होंने MBBS करने का सपना देखा था, लेकिन परिस्थितियों के कारण वह आगे नहीं बढ़ सकीं. तीन दशक बाद जब उनकी बेटी संयुक्ता NEET की तैयारी में जुटीं, तो मां का दबा हुआ सपना फिर से जीवित हो उठा. अमुथवल्ली बताती हैं कि बेटी को पढ़ाई करते देख उन्हें भी हिम्मत मिली. घर का माहौल पढ़ाई का बन गया. संयुक्ता की किताबें ही मां की भी किताबें बन गईं. यह सफर सिर्फ परीक्षा की तैयारी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय की यात्रा था.
अलग पीढ़ी, एक ही लक्ष्य
CBSE की छात्रा संयुक्ता ने कोचिंग लेकर व्यवस्थित तैयारी की और NEET 2024 में 450 अंक हासिल किए. दूसरी ओर अमुथवल्ली ने 147 अंक प्राप्त किए. उन्हें विरुधुनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में PwBD श्रेणी के तहत सीट मिली है. 30 जुलाई को उन्होंने विशेष श्रेणी काउंसलिंग में भाग लिया, जिसमें PwD, पूर्व सैनिकों और सरकारी स्कूल छात्रों के बच्चों के लिए आरक्षित सीटें शामिल थीं. अमुथवल्ली मानती थी कि सिलेबस उनके समय से काफी बदल चुका था, लेकिन बेटी की मदद और परिवार के सहयोग से उन्होंने चुनौती को अवसर में बदल दिया.
परिवार का साथ बना सबसे बड़ी ताकत
इस सफलता के पीछे परिवार का मजबूत समर्थन भी रहा. अमुथवल्ली ने बताया कि उनके पति ने दोनों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर साथ दिया. संयुक्ता अपनी पहचान खुद बनाना चाहती हैं और अपनी मां के साथ कॉलेज साझा करने का इरादा नहीं रखतीं. फिर भी, वह इस बात पर गर्व महसूस करती हैं कि उनकी मेहनत ने मां के अधूरे सपने को नई उड़ान दी.
सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं
यह मां-बेटी की NEET सफलता कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि हौसले, समर्पण और पारिवारिक सहयोग की मिसाल है. यह प्रेरणा देती है कि चाहे उम्र 19 साल हो या 49 अगर इरादा मजबूत हो, तो सपने फिर से जिए जा सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई कर रही हैं.