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Medical Education: मेडिकल कॉलेज को लेकर नियम में हुआ बड़ा बदलाव, पढ़िए ये अहम बातें

Medical Education: मेडिकल शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए NMC ने मेडिकल कॉलेज खोलने के नियम आसान कर दिए हैं. अब ये कंपनियां भी कॉलेज चला सकेंगी.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: January 9, 2026 17:55:07 IST

Medical Education: मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम बदलाव करते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने मेडिकल कॉलेज खोलने से जुड़ा एक बड़ा नियम हटा दिया है. अब तक केवल नॉन-प्रॉफिट (सेक्शन 8) कंपनियों को मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति थी, लेकिन अब फ़ॉर-प्रॉफिट कंपनियां भी इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगी. इस फैसले का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा में निवेश बढ़ाना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है.

NMC चेयरमैन का ऐलान

विजयवाड़ा स्थित डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में NMC के चेयरमैन अभिजात चंद्रकांत शेठ ने इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बोर्ड की हालिया बैठक में यह तय किया गया कि मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए सिर्फ नॉन-प्रॉफिट कंपनियों की बाध्यता अब जरूरी नहीं होगी. इससे नॉन-प्रॉफिट और फ़ॉर-प्रॉफिट दोनों तरह की कंपनियों को समान अवसर मिलेगा.

PPP मॉडल से खुलेगा मेडिकल शिक्षा का रास्ता

शेठ ने कहा कि यह बदलाव पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को बढ़ावा देगा, जिससे सरकारी और निजी संस्थाएं मिलकर मेडिकल शिक्षा को आगे बढ़ा सकेंगी. उनका मानना है कि इस साझेदारी से उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी और संतुलित उपयोग हो पाएगा, जिससे मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की संख्या बढ़ेगी.

मरीजों को मिलेगा सस्ता और बेहतर इलाज

NMC चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि PPP मॉडल के तहत संचालित अस्पताल राज्य सरकारों के दायरे में रहेंगे. इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा, क्योंकि मरीजों को मुफ्त या सब्सिडी वाली दरों पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गुजरात में यह मॉडल पहले से ही सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है.

गुणवत्ता पर रहेगा NMC का सख्त नियंत्रण

शेठ ने भरोसा दिलाया कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इसके लिए NMC ने मान्यता प्रक्रिया और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) तय किए हैं. हर मेडिकल कॉलेज को इन्हीं मानकों के आधार पर आंका जाएगा, चाहे वह नॉन-प्रॉफिट हो या फ़ॉर-प्रॉफिट.

रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर बढ़ता फोकस

मेडिकल शिक्षा को भविष्य के अनुरूप बनाने के लिए क्लिनिकल रिसर्च को अनिवार्य कर दिया गया है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल हेल्थकेयर और उभरती टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है. शेठ ने कहा कि NMC का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शिक्षा देना है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर मेडिकल हब बन सके. यह बदलाव न सिर्फ मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक कदम है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश भी है.

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Medical Education: मेडिकल कॉलेज को लेकर नियम में हुआ बड़ा बदलाव, पढ़िए ये अहम बातें

Medical Education: मेडिकल शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए NMC ने मेडिकल कॉलेज खोलने के नियम आसान कर दिए हैं. अब ये कंपनियां भी कॉलेज चला सकेंगी.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: January 9, 2026 17:55:07 IST

Medical Education: मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम बदलाव करते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने मेडिकल कॉलेज खोलने से जुड़ा एक बड़ा नियम हटा दिया है. अब तक केवल नॉन-प्रॉफिट (सेक्शन 8) कंपनियों को मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति थी, लेकिन अब फ़ॉर-प्रॉफिट कंपनियां भी इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगी. इस फैसले का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा में निवेश बढ़ाना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है.

NMC चेयरमैन का ऐलान

विजयवाड़ा स्थित डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में NMC के चेयरमैन अभिजात चंद्रकांत शेठ ने इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बोर्ड की हालिया बैठक में यह तय किया गया कि मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए सिर्फ नॉन-प्रॉफिट कंपनियों की बाध्यता अब जरूरी नहीं होगी. इससे नॉन-प्रॉफिट और फ़ॉर-प्रॉफिट दोनों तरह की कंपनियों को समान अवसर मिलेगा.

PPP मॉडल से खुलेगा मेडिकल शिक्षा का रास्ता

शेठ ने कहा कि यह बदलाव पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को बढ़ावा देगा, जिससे सरकारी और निजी संस्थाएं मिलकर मेडिकल शिक्षा को आगे बढ़ा सकेंगी. उनका मानना है कि इस साझेदारी से उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी और संतुलित उपयोग हो पाएगा, जिससे मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की संख्या बढ़ेगी.

मरीजों को मिलेगा सस्ता और बेहतर इलाज

NMC चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि PPP मॉडल के तहत संचालित अस्पताल राज्य सरकारों के दायरे में रहेंगे. इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा, क्योंकि मरीजों को मुफ्त या सब्सिडी वाली दरों पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गुजरात में यह मॉडल पहले से ही सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है.

गुणवत्ता पर रहेगा NMC का सख्त नियंत्रण

शेठ ने भरोसा दिलाया कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इसके लिए NMC ने मान्यता प्रक्रिया और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) तय किए हैं. हर मेडिकल कॉलेज को इन्हीं मानकों के आधार पर आंका जाएगा, चाहे वह नॉन-प्रॉफिट हो या फ़ॉर-प्रॉफिट.

रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर बढ़ता फोकस

मेडिकल शिक्षा को भविष्य के अनुरूप बनाने के लिए क्लिनिकल रिसर्च को अनिवार्य कर दिया गया है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल हेल्थकेयर और उभरती टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है. शेठ ने कहा कि NMC का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शिक्षा देना है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर मेडिकल हब बन सके. यह बदलाव न सिर्फ मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक कदम है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश भी है.

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