क्लास में कुछ छात्रों को नींद आना तो कॉमन है, लेकिन अगर एक साथ कई छात्रों को क्लास में नींद आने लगे तो? आईआईटी कानपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है.
आईआईटी कानपुर में छात्रों को सुबह की पहली क्लास में ही नींद आना एक आम समस्या बन गई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनुभा गोयल ने जब इसको नोटिस किया तो उन्होंने हॉस्टल में छात्रों की सोने की सुविधाओं पर शोध करने का निर्णय लिया.
कैसे हुई शोध की शुरुआत
प्रोफेसर अनुभा गोयल जब क्लास ले रही थीं, तो उन्हें बार-बार कई छात्रों को झपकी लेते देखा. पहले तो उन्होंने इसे सामान्य समझा, लेकिन जब यह रोज़ की बात बन गई, तो उन्होंने इस पर गहराई से सोचा. उन्होंने छात्रों के इस बिहेवियर पर एक पायलट स्टडी शुरू की, जिसमें पाया गया कि छात्र क्लास शुरू होने से पहले ही थकान महसूस करते हैं. जिसके बाद इस सवाल ने जन्म लिया कि क्या हॉस्टल का माहौल रात की नींद खराब कर रहा है? उन्होंने इस पर शोध करने का निर्णय लिया कि क्या हॉस्टल का आवासीय परिसर छात्रों के लिए पर्याप्त सुविधाजनक नहीं है. यह शोध भारत के संदर्भ में अनोखा है, जहां हॉस्टल डिज़ाइन पर कम ध्यान दिया जाता है. हालांकि, विदेशों में इस तरह के शोध कई युनिवर्सिटी में किये जा चुके हैं.
मुख्य निष्कर्ष और कारण
प्रोफेसर गोयल के मुताबिक, गर्म मौसम, अधिक नमी, अपर्याप्त वेंटिलेशन और बंद खिड़कियों से कमरों में घुटन प्रमुख कारण हैं. वाइब्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार ये कारक न सिर्फ नींद बिगाड़ते हैं, बल्कि अकादमिक परफॉर्मेंस को भी प्रभावित करते हैं. शोध पत्रिका ‘बिल्डिंग एंड एनवायरनमेंट’ नवंबर 2025 में भी इस पर एक लेख प्रकाशित हुआ था, जिसकी मुख्य लेखिका सीनियर पीएचडी स्कॉलर अस्मिता आद्या हैं.
प्रोफेसर अनुभा गोयल ने कहा कि यह शोध हॉस्टल और भवनों के डिज़ाइन को बेहतर बनाने में मदद करेगा. अच्छी नींद पढ़ाई और स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है, इसलिए हॉस्टल में वेंटिलेशन सुधारना, तापमान नियंत्रण और नमी कम करना आवश्यक है.