बीते कुछ दिनों से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम को लेकर देशभर में काफी बवाल मच रहा है. देश दो भागों में बंटता नजर आ रहा है. लोगों के मन में सवाल है कि क्या ये समानता का सही तरीका है? विरोध-प्रदर्शनों के बीच यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसकी सुनवाई आज 29 जनवरी को हुई. पक्ष-विपक्ष की तरफ से तमाम दलीलें पेश किए गए. इस मामले की सुनिवाई सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने की और कड़ा रुख अपनाते हुए इन नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी गई. चलिए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या टिप्पणी की.
किसने दायर की थी याचिका?
सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ वकील विष्णु शंकर जैन ने याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष UGC के नए नियमों को चुनौती देने वाली कुल तीन याचिकाएं दाखिल की गई. इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच ने की.
कोर्ट ने क्या पूछा सवाल?
CJI: क्या रैगिंग की शिकायत इस नियम के तहत सुनी जाएगी?
वकील: नियमों में रैगिंग की परिभाषा ही नहीं, फ्रेशर पहले महीने में ही जेल जा सकता है.
वकील: यह नियम सिर्फ जाति के मुद्दों तक सीमित, रिग्रेसिव और सीनियर-जूनियर का बंटवारा करता है.
CJI: उत्तर या पूर्वोत्तर से आए छात्र के खिलाफ क्षेत्रीय/सांस्कृतिक तंज पर क्या यह नियम लागू होगा?
CJI: अगर SC समुदाय के भीतर ही एक समूह दूसरे का अपमान करे तो क्या कोई उपाय है?
CJI: casteless समाज की दिशा में जो हासिल किया, क्या हम पीछे जा रहे हैं?
CJI: रैगिंग सबसे बड़ी बुराई.
CJI: अलग-अलग हॉस्टल बनाने जैसे सुझाव न दें.
वकील: पूरी UGC रेगुलेशन रद्द होनी चाहिए, बेहतर ड्राफ्ट का सुझाव दे सकते हैं.
2012 के नियम समावेशी थे
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने अनुच्छेद 15(4) का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि यह अनुच्छेद SC-ST के लिए विशेष कानून की अनुमति देता है, लेकिन 2012 के नियम अधिक व्यापक और समावेशी थे. सुरक्षात्मक ढांचे में पीछे जाना गैर-प्रतिगमन के सिद्धांत के विपरीत है. इसके अलावा न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में भारत की एकता झलकनी चाहिए, न कि विभाजन. अंत में सीजेआई ने बोला इस तरह की स्थिति का कुछ तत्वों द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता है. इन्हीं तर्कों के बाद कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर अस्थाई तौर पर रोक लगा दी है और कहा कि 2012 के नियम ही अभी लागू रहेंगे.