साल 2001 में ‘मिसेज वर्ल्ड’ बनकर इतिहास रचने वाली अदिति गोवित्रीकर की मुस्कान के पीछे कई अनकहे जख्म छिपे हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने उनके साथ हुए यौन उत्पीड़न के बारे में खुलकर बात की है और खुद की सुरक्षा के लिए उन्होंने जो संघर्ष किये हैं वो खुलासे ने लोगों को हैरान कर दिया है. उन्होंने बताया कि कैसे बाप जैसे पिता के दोस्त ने उनके साथ दुर्व्यवहार, उनके साथ यौन शोषण किया, अदिति का वो दर्द जिसने उन्हें आज भी ‘PTSD’ का शिकार बना रखा है? आइये विस्तार से जानते हैं.
अदिति गोवित्रीकर ने 2002 में फिल्म ‘सोच’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. बाद में वह ’16 दिसंबर’, ‘पहेली’ और ‘दे दना दन’ जैसी फिल्मों में नज़र आईं. अदिति, जो टेलीविज़न पर ‘बिग बॉस 3’ और ‘खतरों के खिलाड़ी’ का भी हिस्सा रह चुकी हैं, उन्होंने 2001 में ‘मिसेज वर्ल्ड’ का खिताब जीता था. वह यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं. पनवेल में जन्मी 49 साल की अदिति ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें बॉलीवुड इंडस्ट्री से काफी दुख पहुंचा है क्योंकि प्रियंका चोपड़ा और लारा दत्ता जो मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स बनी थीं, उन्हें कहीं ज़्यादा शोहरत और मौके मिल. लेकिन अदिति के साथ ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे उनके पिता के दोस्त ने उनके साथ गलत व्यवहार किया था.
पिता के दोस्त ने किया गलत व्यवहार
अदिति गोवित्रीकर का जन्म 21 मई, 1976 को पनवेल, महाराष्ट्र में हुआ था. जब अदिति के साथ वो घटना घटी उस समय अदिति सिर्फ छह या सात साल की थीं. अदिति ‘हॉटरफ्लाई’ को दिए गए एक इंटरव्यू में बताती हैं जब वह मुश्किल से छह या सात साल की थीं, तब उनके पिता के दोस्त ने भी उनके साथ गलत व्यवहार किया था. बाद में, जब वह अपनी पढ़ाई के लिए मुंबई जाने लगीं, तो उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए चिंता होने लगी.
वह कहती हैं, “मैं 12वीं क्लास में अग्रवाल क्लासेस के लिए दादर आती थी.” उस समय लोकल ट्रेन मेरे लिए एक ऑप्शन नहीं था, इसलिए मैं बस से सफ़र करती थी. मैंने यह सब किया है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट आपको ज़िंदगी के बारे में सिखाता है.”
सुरक्षा के लिए बैग का इस्तेमाल
एक्ट्रेस ने आगे कहा कि इतनी कम उम्र में ऐसे माहौल में आप खुद को बचाने के अपने तरीके ढूंढ लेते हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरे पास दोनों तरफ बहुत बड़े बैग होते थे. अंदर मैं हार्डकवर किताबें रखती थी और उन्हें ढाल की तरह पकड़ती थी. वही मेरी सुरक्षा थी.’ अगर मुझे सीट मिल जाती तो मैं दोनों तरफ एक-एक बैग रख लेती ताकि कोई मुझे छू न सके. ‘ये मेरी लाइफ है’ और ‘कहना है कुछ मुझको’ जैसे टीवी शो में नज़र आ चुकी हैं.
‘मैं इतनी छोटी थी कि मुझे समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ’
अदिति गोवित्रीकर ने माना कि लड़कियों और महिलाओं को अक्सर जानने वाले लोगों द्वारा दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है. वह कहती हैं, ‘मेरे मामले में एक घटना में परिवार का एक जाना-पहचाना सदस्य शामिल था. तब मैं बहुत छोटी थी. फिर एक दिन बाज़ार में हुई एक और घटना ने मुझे हिला दिया. मैं इतनी छोटी थी कि मुझे पूरी तरह समझ नहीं आया कि क्या हुआ था. आपको बस लगता है कि आपकी बेइज्जती हुई है. कुछ गलत हुआ है. वह एहसास बहुत बुरा होता है, और वह कभी नहीं जाता.’
जब कोई बहुत ज़्यादा करीब आता है तो मेरा शरीर रिएक्ट करता है
अदिति कहती हैं कि उन्होंने इन अनुभवों के बारे में पहली बार तब खुलकर बात की जब वह 15 साल की थीं. वह कहती हैं, ‘मेरा यकीन मानिए, यह एक तरह का PTSD है. आज भी अगर कोई पब्लिक जगह पर बहुत ज़्यादा करीब आता है तो मेरा शरीर अपने आप रिएक्ट करता है. मैं उन्हें दूर धकेलने के लिए तैयार रहती हूँ. मैं अब बकवास बर्दाश्त नहीं करती. हर लड़की अपनी कोहनी का इस्तेमाल करना सीख जाती है. एक बार एक सिक्योरिटी गार्ड ने भी बदतमीज़ी की थी. लेकिन ऐसे लोग जल्दी से कह देते हैं, ‘अरे, गलती हो गई.’ जबकि आपको पता होता है कि यह बर्दाश्त के बाहर है.’