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मशहूर गायिका आशा भोसले ने 92 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया. गायिका से जुड़ा एक किस्सा काफी चर्चित है, जब उनकी दिग्गज गायक मोहम्मद रफी से किसी बात को लेकर भिड़ंत हो गई थी. इसके बाद दोनों ने बहुत दिनों तक बात की.
आशा भोसले और मोहम्मद रफी में क्यों बातचीत हुई बंद?
बताया जाता है कि 1960 के दशक में रॉयल्टी भुगतान को लेकर आशा भोसले और लता मंगेशकर ने रॉयल्टी अधिकारों को लेकर समर्थन किया था. हालांकि मोहम्मद रफी ने इसका विरोध किया था. इस वजह से आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने करीब एक साथ तक नहीं हुई थी बातचीत.
मोहम्मद रफी को लेकर कह दी थी बड़ी बात
पिछले साल सितंबर महीने 2025 में दिवंगत गायिका आशा भोसले ने कहा था कि मोहम्मद रफी के अंदर संगीत की कला सुधारने की कमी थी. और युगत संगीत में वह मोहम्मद रफी से अच्छी थीं. जैसे ही यह बात फैली समाज दो भागों में बंट गया. दिग्गज गायक मोहम्मद रफी के समर्थक उनका विरोध करने लगे थे.
मोहम्मद रफी के बेटे ने किया था विरोध
आशा भोसले की इस बात पर मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी ने गायिका का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि मंगेशकर बहनें और उनका पूरा परिवार मोहम्मद रफी से जलन करता था. साथ ही उन्होंने आशा भोसले पर रफी साहब की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया था.
ये गाने साथ में गाए
आशा भोसले और मोहम्मद रफी की जोड़ी ने कई बेहतरीन गाने गाए हैं. इस लिस्ट में ‘अभी ना जाओ छोड़कर’, ‘दीवाना हुआ बादल’, ‘इशारों इशारों में दिल लेने वाले’, ‘आओ हुजूर तुमको सितारों में ले चलें’, ‘उड़े जब जब जुल्फें तेरी’ जैसे सदाबहार गाने शामिल हैं.