Asha Bhosle News: सुरों की मलिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी आवाज़ हमेशा हमारे दिलों में गूंजती रहेगी। 92 साल की उम्र में उनका जाना संगीत के एक सुनहरे युग का अंत है. आशा ताई सिर्फ सुरों की ही नहीं, बल्कि रिश्तों की भी धनी थीं फिर चाहे वो सचिन तेंदुलकर को बेटा मानना हो या ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ब्रेट ली के साथ सुर छेड़ना. आज उनके जाने पर, आइए याद करते हैं उनकी ज़िंदगी का वो दिलचस्प किस्सा जब उन्होंने क्रिकेट की दुनिया को भी अपनी आवाज़ का दीवाना बना दिया था.
महान गायिका आशा भोसले के निधन से पूरा संगीत जगत शोक में डूबा हुआ है. इसी बीच, हम आपके साथ इस महान गायिका से जुड़ी एक ऐसी कहानी साझा कर रहे हैं जो सचमुच हैरान करने वाली है. आशा भोसले को क्रिकेट से भी गहरा लगाव था. उनके इस जुनून का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक बार ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रेट ली के साथ मिलकर एक गाना गाया था. इस गाने के बोल खुद ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ ब्रेट ली ने लिखे थे. ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज़ ने अपनी आत्मकथा में भी इस कहानी का ज़िक्र किया है.
यह गाना 2006 में रिकॉर्ड किया गया था
यह घटना 2006 की है, जब भारत में चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन हो रहा था. बताया जाता है कि टूर्नामेंट के एक अभ्यास सत्र के दौरान, ब्रेट ली ने महज़ 30 मिनट में इस गाने के बोल लिख डाले थे. इस गाने का शीर्षक था ‘यू आर द वन फॉर मी’ (You’re the One for Me). यह ‘आशा एंड फ्रेंड्स’ (Asha & Friends) नामक एक प्रोजेक्ट का हिस्सा था.
अपनी आत्मकथा ‘माई लाइफ़’ (My Life) में ब्रेट ली ने लिखा है, ‘यह म्यूज़िक वीडियो तब फ़िल्माया गया था, जब मैं 2006 में चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भारत में था.’ इस गाने में ब्रेट ने ये पंक्तियाँ भी गाई थीं. ‘हाँ, मैं तुम्हारा हूँ,. मैं हमेशा तुम्हारा ही रहूँगा.’ इस तरह, आशा भोसले ने ब्रेट ली के साथ मिलकर इस गाने को रिकॉर्ड किया था. यह गाना रातों-रात हिट हो गया और फैंस इन दोनों दिग्गजों की केमिस्ट्री देखकर हैरान रह गए थे.
आशा ताई: भारतीय संगीत की लीजेंड
ब्रेट ली ने आशा जी के व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए लिखा था कि वह एक बेहद विनम्र और हंसमुख महिला थीं. उन्होंने लिखा, ‘एक पूर्ण लीजेंड के साथ काम करना मेरे लिए बहुत बड़ा अवसर था. वह उस समय अपने 70 के दशक में थीं और बॉलीवुड फिल्मों के लिए हज़ारों गाने गा चुकी थीं. वह वास्तव में भारतीय संगीत की अरेथा फ्रैंकलिन थीं.’