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दिल से दिल तक नहीं, टकराव से प्यार तक; स्क्रीन पर रॉम-कॉम के बजाय क्यों छा रही हैं गुस्सैल रोमांटिक फिल्में?

बॉलीवुड इंटेंस लव स्टोरी ट्रेंड: अब रोमांटिक फिल्मों में वो पहले वाली बात नहीं रही, जिसे देख दिल को सुकून और प्यार पर विश्वास करने का मन करता था, जिसे देख एक ख्याल निकलता था कि हमारे पास भी ऐसा ही लविंग पार्टनर होना चाहिए.

Written By: Shristi S
Last Updated: February 15, 2026 15:57:13 IST

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Bollywood Intense Love Stories: अब रोमांटिक फिल्मों में वो पहले वाली बात नहीं रही, जिसे देख दिल को सुकून और प्यार पर विश्वास करने का मन करता था, जिसे देख एक ख्याल निकलता था कि हमारे पास भी ऐसा ही लविंग पार्टनर होना चाहिए. लेकिन अब उन फिल्मों का चलन कुछ फिका पड़ गया है, और उसकी जगह ले ली है ज्यादा गुस्से वाले रोमाटिंक फिल्म में जिसमें आपको प्यार तो दिखेगा लेकिन पहली वाली बात नजर नहीं आयेगी. इस इंटेंस रोमाटिंक ड्रामा में कॉम पीछे छूट गया है क्योंकि इंटेसिटी ने कंट्रोल कर लिया है. ऐसे में चलिए विस्तार से समझे कि यह बदलाव कैसे हुआ है.

यह एक गुस्से वाली दुनिया 

 

तनु वेड्स मनु जैसी रोम-कॉम फ़्रैंचाइज़ से लेकर धनुष और कृति सनोन स्टारर उनकी ब्लॉकबस्टर इंटेंस रोमांस तेरे इश्क में तक रोम-कॉम बनाने वाले फिल्म निर्देशक आनंद एल राय ने इस पर अपनी राय रखते हुए कहा कि झे लगता है, होश में या अनजाने में, हम सब अपने आस-पास की दुनिया पर रिएक्ट कर रहे हैं. बहुत ज़्यादा अनिश्चितता, बेचैनी और हिंसा है, चाहे वह देशों के बीच हो या उनके अंदर भी. हम सब अब ज़्यादा जागरूक और जुड़े हुए भी हैं. तो, हमारे आस-पास की नफ़रत हमारे प्यार के आइडिया पर असर कैसे नहीं डाल सकती?
उनका लेटेस्ट प्रोडक्शन, बिजॉय नांबियार की तू या मैं, जिसमें आदर्श गौरव और शनाया कपूर स्टारर हैं, इस वैलेंटाइन डे से एक दिन पहले रिलीज़ हुई. इसमें रोम-कॉम के एलिमेंट हैं, लेकिन हल्की-फुल्की रोम-कॉम के लिए बेचैन दर्शकों को लुभाने के लिए इसमें एक मगरमच्छ और एक सर्वाइवल ड्रामा भी शामिल करना होगा. इसका मुकाबला विशाल भारद्वाज की रोमांटिक थ्रिलर ओ’रोमियो से है, जिसमें शाहिद कपूर और त्रिप्ति डिमरी स्टारर हैं, यह एक ऐसी कहानी है जो प्यार के साथ-साथ बदले की भी है.

वैलेंटाइन डे पर रिलीज हुई ओ’रोमियो और तू या मैं

तू या मैं और ओ’रोमियो इस साल वैलेंटाइन डे पर रिलीज़ होने वाली फ़िल्में हैं. शाहिद (कबीर सिंह, 2019) और त्रिप्ति (एनिमल, 2023) संदीप रेड्डी वांगा के प्यार के स्कूल का हिस्सा रही हैं, जिसमें रोमांटिक रिश्ते में आंख के बदले आंख और थप्पड़ के बदले थप्पड़ को डिफ़ॉल्ट माना जाता है. यह बात कि वे एक के बाद एक जब वी मेट (2007) और लैला मजनू (2018) जैसी मशहूर रोम-कॉम का हिस्सा रही हैं, उन्हें ज़्यादा गहराई वाले प्यार और अक्सर नैतिक उलझनों को सपोर्ट करने से नहीं रोकती, क्योंकि आजकल यही चलन में है.

अदिवी सेष, जिन्होंने डकैत: ए लव स्टोरी लिखी है, जो एक और आने वाली एक्शन रोमांस है जिसमें वे मृणाल ठाकुर के साथ हैं, उन्हें लगता है कि भारत प्यार को कैज़ुअली ट्रीट करना नहीं जानता. एक कल्चर के तौर पर, हम प्यार को बहुत गहराई से ट्रीट करते हैं. हम इतनी आसानी से घुलते-मिलते नहीं हैं, और न ही इतनी आसानी से छोड़ते हैं. सैन फ्रांसिस्को के उलट, जहां मैं बड़ा हुआ, और जहां लोगों का डिवोर्स लेना कोई आम बात नहीं थी. हमारे यहाँ एक थकावट है. जब चीजें खराब हो रही होती हैं, तब भी हम देखना चाहते हैं कि क्या होता है.

मृणाल ठाकुर और अदिवी सेश की डकैत

ए लव स्टोरी एक्स-लवर्स के बीच की लड़ाई है. इसके साथ, वह शाहरुख खान की कही बात को दोहराते हैं, जो उन्होंने स्क्रीन पर निभाए प्यार के दो अलग-अलग पहलुओं के बारे में कहा था, यश चोपड़ा की डर (1991) में पज़ेसिव किरदार से लेकर उनके बेटे आदित्य चोपड़ा की दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995) में ज़बरदस्त किरदार तक — दोनों का लेना-देना पॉज़िटिव या नेगेटिव तरह के ऑब्सेशन से है. उनकी रेंज यह सवाल उठाती है कि हम DDLJs, कुछ कुछ होता है, या कुंदन शाह की 1994 की मास्टरक्लास ‘कभी हां कभी ना’ के बजाय डर, अंजाम और बाज़ीगर के पीछे क्यों भाग रहे हैं, जिसमें हल्के-फुल्के, नुकसान न पहुंचाने वाले स्टॉकिंग का इस्तेमाल किया गया है. खैर, उनके रा.वन डायरेक्टर इसके लिए कुछ हद तक स्टार को दोषी ठहराएंगे, जिन्होंने पठान, जवान और आने वाली किंग के साथ एक्शन की ओर रुख किया.

अनुभव सिन्हा, जिन्होंने पहले रोम-कॉम फ्रेंचाइजी ‘तुम बिन’ बनाई थी, ने अपने आप ही मुल्क, आर्टिकल 15, थप्पड़ और आने वाली ‘अस्सी’ जैसी सोशियो-पॉलिटिकल ड्रामा फिल्में बनाई हैं. लेकिन इंडस्ट्री के ज़्यादातर फिल्ममेकर्स के उलट, जो सिर्फ ट्रेंड्स पर भरोसा करते हैं, उनमें धीरे-धीरे बदलाव आया है. उन्हें याद है कि जब उन्होंने एटली की 2023 की एक्शन थ्रिलर ‘जवान’ देखी, जिसमें शाहरुख खान थे, तो उन्हें लगा कि उन्हें धोखा मिला है. सिन्हा याद करते हैं कि मुझे लगा था कि अब अगले छह साल तक सिर्फ एक्शन फिल्में ही बनेंगी। हर कोई ‘जवान’ बनाना चाहेगा.

रोमांस के बदशाह भी वक्त के साथ बन गए एक्शन स्टार

भारत की टॉप रोमांस फिल्मों का चेहरा शाहरुख खान, ‘जवान’ के साथ एक एक्शन स्टार बन गए हैं. हालांकि ‘जवान’ में रोमांस कुछ समय के लिए और बिना किसी परेशानी के था, लेकिन भारतीय रोम-कॉम के ब्रांड एंबेसडर का ‘गुलाब’ के बदले ‘बंदूक’ लेना उनके बहुत बड़े फैनबेस के लिए एक बड़ा झटका था. दो साल बाद, यशराज फिल्म्स, जिसने कभी एक या दो पूरी जेनरेशन के लिए रोमांस को डिफाइन किया था, ने मोहित सूरी की ‘सैयारा’ के साथ एक सरप्राइज़ दिया, जो नए एक्टर्स, अहान पांडे और अनीत पड्डा के साथ अब तक की सबसे ज़्यादा कमाने वाली फिल्म बन गई.

गौरी शिंदे का क्या हैं कहना?

गौरी शिंदे, जिन्होंने पिछली बार डियर ज़िंदगी (2016) डायरेक्ट की थी, कहती हैं कि मुझे उम्मीद है कि यह एक ट्रेंड बनेगा क्योंकि जब कोई खास तरह की सफल फिल्म होती है, तो हम उस फ़ॉर्मूले को फ़ॉलो करते हैं. बस उम्मीद है कि यह फ़ॉर्मूला वाली लव स्टोरीज़ न बन जाए. लेकिन मोहित सूरी को भी ‘सैयारा’ को हरी झंडी मिलने से पहले कई दरवाज़े खटखटाने पड़े, बिना एक तकलीफ़देह लेकिन दिल को छू लेने वाली लव स्टोरी कहने की अपनी सिग्नेचर आवाज़ से कॉम्प्रोमाइज़ किए और तो और, यह अभी भी एक इंटेंस लव स्टोरी है जिसमें एक बहुत गुस्से वाला प्रोटागोनिस्ट है.
लेकिन रॉकी और रानी की प्रेम कहानी भी तीन साल पहले की बात है. पिछले साल धर्मा की रोम-कॉम फिल्में, जैसे शौना गौतम की नादानियां और शशांक खेतान की सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी, नेटफ्लिक्स इंडिया या थिएटर में बुरी तरह पिट गईं. लव स्टोरी का क्या मतलब है अगर आपके पास सिर्फ हेट वॉचिंग ही बची हो? फिर भी विवेक सोनी की आप जैसा कोई भी है, जिसमें फातिमा सना शेख और आर माधवन हैं, जो गुस्से वाले रोमांस, इक्कीस और धुरंधर के बिल्कुल उलट है. लेकिन दुख की बात यह है कि ऐसी रोम-कॉम फिल्मों को थिएटर में रिलीज करना बहुत बड़ा रिस्क होता है क्योंकि उनसे ट्रेड की उम्मीदें भी बड़े पैमाने पर बनी फिल्मों जैसी ही होती हैं.

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