Do Deewane Sheher Mein and Assi Movie Review: आज एक तरफ सिद्धांत चतुर्वेदी और मृणाल ठाकुर की फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ रिलीज हुई, तो वहीं तापसी पन्नू की फिल्म ‘अस्सी’ भी बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है. दोनों ही फिल्में एक दूसरे से काफी अलग हैं. सिद्धांत और मृणाल अपने फैंस के लिए लव स्टोरी लेकर आए हैं, जिसमें मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच एक कपल रिश्तों की उलझनों को बेहद संवेदनशील अंदाज में लोगों के सामने लाती है. फिल्म में दिखाया गया है कि आज के समय में प्यार परफेक्ट नहीं होता और दोनों का अधूरापन ही उसे खूबसूरत बनाता है. वहीं तापसी पन्नू स्टारर फिल्म अस्सी एक पावरफुल कोर्टरूम ड्रामा है. ये फिल्म जिंदगी और सिस्टम की कमजोरियों को दिखाती है.
दो दीवाने शहर में रिव्यू
सिद्धांत चतुर्वेदी और मृणाल ठाकुर की फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ रिलीज हो गई है. फिल्म की कहानी मुंबई जैसे व्यस्त महानगर में रहने वाले कपल रोशनी श्रीवास्तव और शशांक शर्मा की कहानी दिखाई गई है. ये एक मिलेनियल लव स्टोरी है, जो प्यार में बड़े सपने नहीं दिखाती लेकिन उन असुरक्षाओं को बताती है, जिससे आज के समय में लगबग सभी युवा गुजर रहे हैं. शशांक एक सफल कॉरपोरेट कंपनी में काम करता है. वो काफी हिचकिचाता और उसके श और स बोलने में थोड़ी परेशानी होती है. ये वैसे तो एक छोटी सी परेशानी है लेकिन कॉर्पोरेट लाइफ में काम करने वाले लोगों के लिए ये एक बहुत बड़ी समस्या है.
वहीं रोशनी मीडिया जगत में काम करती है. वो आधुनिक और स्वतंत्र लड़की है लेकिन लुक्स को लेकर एक गहरे कॉम्प्लेक्स की शिकार है. वो अपने आप को दुनिया की नजरों से दूर रखती है. दोनों के परिवार शादी का दबाव बनाते हैं लेकिन वे इसे टालते रहते हैं. उन दोनों का डर खुद से होता है कि लोग उनकी कमियों के साथ उन्हें कैसे स्वीकार करेंगे. इस फिल्म का आधार है कि कैसे ये दो इम्परफेक्ट लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और एक दूसरे को वैसे स्वीकार करते हैं, जैसे वे हैं. दोनों ने अपने-अपने किरदार को बेहद बारीकी से निभाया है, जिसकी लोग तारीफ कर रहे हैं.
अस्सी रिव्यू
बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू अपना कोर्टरूम ड्रामा अस्सी लेकर बड़े पर्दे पर आ गई हैं. डायरेक्टर अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी फिल्म अस्सी का ट्रेलर लोगों को काफी पसंद आया था. फिल्म में तापसी पन्नू रावी नाम की एक वकील के किरदार में नजर आ रही हैं. फिल्म की कहानी स्कूल टीचर परिमा के बारे में है. वो एक पार्टी के बाद मेट्रो से घर लौट रही होती हैं. इसी दौरान पांच लड़के उसे किडनैप कर लेते हैं और उनके साथ गैंग रेप होता है. वो लड़के उस महिला को बुरी तरह घायल अवस्था में रेलवे ट्रैक पर छोड़ देते हैं. इसके बाद शुरू होता है कानूनी दावपेंच. रावी परिमाा का केस लड़ती हैं और कानून के रास्ते से न्याय चाहती हैं.
हालांकि उन्हें काफी चीजों का सामना करना पड़ता है, जैसे पुलिस में भ्रष्टाचार, गवाहों पर दबाव, सबूतों की छेड़छाड़ आदि. इसके साथ ही समाज की बेरुखी पीड़िता को अंदर से तोड़ देती है. आरोपी अमीर हैं और वे केस का मजाक बनाकर बेफिक्र होकर घूमते हैं. ये फिल्म रेप कल्चर, पुलिस का लापरवाही और कोर्ट की कमजोरियों के बारे में है. ये क्राइम फिल्म होने के साथ ही समाज की कमियों पर भी बात करती है.