‘द केरल स्टोरी 2’ के आने से पहले समाज के कड़वे सच और कट्टरपंथ पर बहस छिड़ गई है. अगर आप धर्म और पहचान की इस लड़ाई को करीब से समझना चाहते है, तो ओटीटी पर मौजूद ये 9 फिल्में आपकी आंखें खोल देंगी. ये फिल्में न केवल आपका मनोरंजन करेंगी, बल्कि एक गहरा संदेश भी देंगी.
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यह फिल्म इस सीरीज की पहली कड़ी है, जिसे देखना बेहद जरूरी है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे केरल की मासूम लड़कियों का ब्रेनवॉश कर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया और फिर उन्हें आतंकी संगठन ISIS में शामिल कर लिया गया. यह फिल्म कट्टरपंथ के खतरनाक जाल को उजागर करती है.
विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित यह फिल्म 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अन्याय, हिंसा और उनके पलायन की दर्दनाक दास्तां बयां करती है. यह फिल्म न केवल कट्टरपंथ के खौफनाक चेहरे को दिखाती है, बल्कि विस्थापन के सामाजिक आघात (Social Trauma) को भी गहराई से महसूस कराती है.
यह फिल्म आतंकवाद के मनोवैज्ञानिक पहलू पर आधारित है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए युवाओं को ‘जन्नत’ और ‘हूरों’ का लालच देकर आत्मघाती हमलों के लिए तैयार किया जाता है. यह फिल्म ब्रेनवॉश करने की प्रक्रिया पर एक कड़ा प्रहार करती है.
अनुभव सिन्हा की यह फिल्म एक मुस्लिम परिवार के संघर्ष की कहानी है, जिसे अपने ही देश में अपनी वफादारी साबित करनी पड़ती है. यह फिल्म समाज में फैले पूर्वाग्रह, भेदभाव और धर्म के नाम पर लगने वाले कलंक जैसे संजीदा विषयों को बहुत ही बारीकी से उठाती है.
आयुष्मान खुराना अभिनीत यह फिल्म भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 पर आधारित है, जो जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव को रोकता है. यह फिल्म ग्रामीण भारत में गहराई तक समाए जातिवाद और उसके कारण होने वाले सामाजिक शोषण की एक कड़वी तस्वीर पेश करती है.
हंसल मेहता की यह फिल्म ढाका में हुए एक वास्तविक आतंकी हमले पर आधारित है. यह युवाओं के बीच बढ़ती कट्टरपंथी सोच और उस विचारधारा के खिलाफ खड़े होने वाले एक युवक के साहस को दिखाती है. फिल्म यह सवाल पूछती है कि धर्म और इंसानियत में बड़ा कौन है.
विशाल भारद्वाज की यह फिल्म कश्मीर की पृष्ठभूमि पर बनी है. यह शेक्सपियर के ‘हेमलेट’ का भारतीय रूपांतरण है, जो वहां के संघर्षपूर्ण वातावरण में एक परिवार के टूटने और मानसिक आघात की कहानी है. यह फिल्म राजनीति और कट्टरपंथ के बीच पिसती आम जनता के दर्द को दिखाती है.
यह फिल्म उत्तर-पूर्व भारत की राजनीतिक उथल-पुथल और वहां के लोगों के बीच अपनी पहचान को लेकर चल रही लड़ाई पर केंद्रित है. ‘अनेक’ हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर एक ‘भारतीय’ होने का असली मतलब क्या है और कैसे क्षेत्रीय कट्टरवाद समाज को बांटता है.
यह एक शानदार क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज है जो केरल पुलिस की एक वास्तविक जांच पर आधारित है. हालांकि यह सीधे तौर पर राजनीति से नहीं जुड़ी है, लेकिन यह समाज के उन अंधेरे कोनों और आपराधिक मानसिकता को बखूबी दिखाती है, जो अक्सर मुख्यधारा की मीडिया से छिपे रहते है.