Bollywood Infamous Movie: बॉलीवुड हर साल 1,500 से ज़्यादा फिल्में बनाता है, जिनमें से कई B- और C-ग्रेड की भी होती हैं. यह मुख्य रूप से छोटे शहरों के दर्शकों के लिए बनाई जाती हैं. ऐसी ही एक C-ग्रेड फिल्म 1998 में रिलीज़ हुई थी. जो काफी विवादों में घिरी रही और कुछ समय के बाद बैन भी हो गई. हालांकि, इस फिल्म को दोबारा रिलीज किया गया और फिर इसे दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया गया. खराब प्रोडक्शन के बाद भी यह फिल्म क्लासिक बन गई.
ये है वो फिल्म
जिस फिल्म की हम बात कर रहे हैं, वह है गुंडा. यह सोचकर हैरानी होती है कि एक ऐसी फिल्म जिसे कभी बिल्कुल बेकार मान लिया गया था, वह सालों बाद दर्शकों को काफी पसंद आई. सितंबर 1998 को रिलीज़ हुई इस फिल्म के अजीब डायलॉग और अनोखे किरदार तब से सोशल मीडिया पर अनगिनत मीम्स का विषय बन गए हैं. इस मूवी में मिथुन चक्रवर्ती मुख्य भूमिका में हैं और इसमें सबसे यादगार सीन में से एक है, जब वे साइकिल की पिछली सीट पर बैठकर रिवॉल्वर चलाते हैं. कांति शाह द्वारा निर्देशित इस मूवी के डायलॉग आज भी लोगों को जहन में बसे हैं.
इन कलाकारों ने किया काम
मिथुन चक्रवर्ती के साथ गुंडा में मुकेश ऋषि, शक्ति कपूर, हरीश पटेल, इशरत अली, मोहन जोशी, सपना सप्पू, रामी रेड्डी, गुलशन राणा, रज्जाक खान, बब्बनलाल यादव, दीपक शिर्के और राणा जंग बहादुर जैसे कलाकार थे. डायलॉग बशीर बब्बर ने लिखे थे और फिल्म को अनिल सिंह ने प्रोड्यूस किया था. इसका संगीत कमर्शियली पूरी तरह से फ्लॉप रहा. हालांकि, हैरानी की बात यह है कि फिल्म की IMDb रेटिंग 7.3 है.
आज भी डायलॉग है मजेदार
गुंडा के मीम-योग्य बनने का मुख्य कारण इसके डायलॉग डिलीवरी का काव्यात्मक अंदाज़ है. हर किरदार की एक खास पंचलाइन थी और नाम भी काफी अजीब थे. शक्ति कपूर ने चुटिया नाम का किरदार निभाया था, जिसने यह लाइन बोली थी: “मेरा नाम चुटिया है, मैं अच्छे-अच्छे लोगों की ज़िंदगी बर्बाद कर देता हूँ.” इशरत अली ने लंबू आटा, मुकेश ऋषि ने बुल्ला, रज्जाक खान ने लकी चिकना, रामी रेड्डी ने काला शेट्टी, हरीश पटेल ने इबू हटेला और मोहन जोशी ने पोते का किरदार निभाया था. इन सबमें मुकेश ऋषि के किरदार बुल्ला को सबसे ज्यादा पसंद किया गया. उन्होंने बोला कि मेरा नाम बुल्ला है, मैं करता हूं सब खुल्लम खुल्ला.
अनकट वर्जन कर दिया था रिलीज
कांति शाह ऐसी लो-क्वालिटी फिल्में बनाने के लिए बदनाम थे. गुंडा के बारे में एक और दिलचस्प किस्सा यह है कि रिलीज़ के तुरंत बाद इसे बैन कर दिया गया था. जब इसे सेंसर बोर्ड को भेजा गया, तो 40 से ज़्यादा कट लगाने की मांग की गई. कांति शाह मान गए लेकिन फिर भी सिनेमाघरों में अनकट वर्जन रिलीज़ कर दिया. कॉलेज के छात्रों द्वारा फिल्म में हिंसा और अश्लीलता की शिकायतों के बाद सेंसर बोर्ड ने दखल दिया. गुंडा को थिएटर से हटा लिया गया और बाद में कट के साथ फिर से रिलीज़ किया गया.
कांति शाह द्वारा निर्देशित यह फिल्म करीब 1.5 करोड़ रुपए के बजट में बनी थी और इसने लगभग 4 करोड़ रुपए कमाए थे. उस समय बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होने के बावजूद, इसे बाद में कल्ट स्टेटस मिल गया. आज इसके युवा दर्शकों के बीच एक बड़ी फैन फॉलोइंग है जो इसे इसके अनजाने एंटरटेनमेंट वैल्यू के लिए देखते हैं.