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डायरेक्टर बनने का शौक पड़ा भारी! राजपाल यादव को क्यों खानी पड़ी जेल की हवा? जानें फिल्म ‘अता पता लापता’ का वो काला सच

Cheque Bounce Case Controversy :राजपाल यादव की पहली निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' उनके लिए एक कड़वी याद बन गई. 5 करोड़ के कर्ज और चेक बाउंस के मामले ने उन्हें तिहाड़ जेल पहुंचा दिया था. आज राजपाल फिर से बड़े पर्दे पर अपनी कॉमेडी से लोगों को हंसा रहे है, लेकिन यह विवाद उनके जीवन का सबसे बड़ा सबक रहा.

Written By: Mansi Sharma
Last Updated: 2026-02-12 17:07:56

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Cheque Bounce Case Controversy : मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव आज अपनी शानदार एक्टिंग से सबको हंसाते है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनके जीवन में अंधेरा छा गया था. यह पूरा विवाद उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है, जिसकी वजह से उन्हें दिल्ली की मशहूर तिहाड़ जेल की हवा खानी पड़ी थी.  राजपाल यादव का सपना था कि वे सिर्फ एक्टिंग ही नहीं बल्कि निर्देशन (Direction) में भी अपना नाम कमाएं.  इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने साल 2010 में फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने का फैसला लिया.  फिल्म के बजट के लिए उन्होंने दिल्ली के एक बड़े व्यापारी से 5 करोड़ रुपये का उधार लिया.  उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह कर्ज उनके करियर और मान-सम्मान के लिए एक बड़ी मुसीबत बन जाएगा. 
 

चेक बाउंस और अदालती कार्यवाही

मुसीबत तब और बढ़ गई जब राजपाल यह कर्ज समय पर नहीं लौटा पाए.  उन्होंने पैसे चुकाने के लिए जो चेक दिए थे, वे बैंक में बाउंस हो गए.  मामला कोर्ट तक पहुंच गया और वहां भी उन पर अदालत को गुमराह करने और गलत जानकारी (False Affidavit) देने का आरोप लगा.  इस कानूनी पचड़े ने राजपाल की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दीं और कोर्ट ने उनके व्यवहार पर सख्त नाराजगी जताई. 
 

तिहाड़ जेल का सफर और सजा

कानूनी लड़ाई का नतीजा बहुत कड़ा रहा.  साल 2013 में उन्हें पहली बार 10 दिनों के लिए जेल जाना पड़ा.  लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ, साल 2018 में कोर्ट ने उन्हें दोषी पाते हुए 3 महीने की जेल की सजा सुना दी.  राजपाल यादव को अपने जीवन का एक लंबा और कठिन समय तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे गुजारना पड़ा. 
 

बुरा दौर और जिंदगी का सबसे बड़ा सबक

जेल से बाहर आने के बाद राजपाल ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वह दौर उनके परिवार के लिए किसी बुरे सपने जैसा था.  हालांकि, उन्होंने जेल में भी हिम्मत नहीं हारी और वहां के कैदियों को हंसाने और उनके साथ मिलकर कुछ नया सीखने की कोशिश की.  उन्होंने माना कि उस एक गलती ने उन्हें कानून का सम्मान करना और जिंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखाया. 

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