Facing Online Bullying: बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर होने वाली आलोचनाओं के बारे में अपने विचार रखते हुए कहा कि वह इसे व्यावहारिक नहीं मानती हैं. उन्होंने कहा कि सेलेब्स के बारे में कंटेंट क्रिएट करने वाले अक्सर लोकप्रियता और व्यूज प्राप्त करने के लिए उनके नाम का इस्तेमाल करते हैं और क्लिकबेट के साथ-साथ एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए भी ऐसा किया जाता है. उन्होंने बताया कि जब उन्हें इस बात की समझ हुई, तो उन्होंने इसे व्यक्तिगत रूप से लेना बंद कर दिया.
‘बुलीइंग और हैरेसमेंट’ में होता है दुख
सोशल मीडिया पर अक्सर होने वाले पेड पॉजिटिव-नेगेटिव पीआर गेम के बारे में बात करते हुए जाह्नवी कपूर कहती हैं कि वह इसे अपने दिमाग पर हावी नहीं होने देतीं है. हालांकि, उन्होंने वह यह भी मानती हैं कि इससे दुख भी हो सकता है. खासकर जब यह मामला ‘बुलीइंग और हैरेसमेंट’ में बदल जाता है, जैसा कि उन्होंने अपने भाई अर्जुन कपूर के साथ होते देखा है.
हर कोई वायरल होना चाहता है
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जाह्नवी कपूर ने सोशल मीडिया पर होने वाली आलोचना के बारे में बात की और कहा, सोशल मीडिया कल्चर के बारे में मेरी समझ यह है कि हर कोई लोकप्रियता, व्यूज और वायरल होना चाहता है, इसलिए अगर वे आपके बारे में कंटेंट बना रहे हैं, तो आप सिर्फ एक बलि का बकरा हैं, वे सिर्फ क्लिकबेट, आपको गुस्सा दिलाने वाली सामग्री और अन्य किसी भी तरह से अपने एंगेजमेंट को बढ़ाने के लिए आपके नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं.
आपसे कोई लेना-देना नहीं है
उन्होंने आगे यह बताया कि, आपका बस यही एक मकसद है, और जब आप इसे इस नजरिए से देखते हैं, तो आपको समझ आता है कि लोग आपके बारे में जो कह रहे हैं उसका आपसे कोई लेना-देना नहीं है. फिर आप उस बात को दिल पर लेना कम कर देते हैं.
सोशल मीडिया पर पेड पीआर गेम
इन सबके बीच, सोशल मीडिया पर पेड पीआर गेम के बारे में बात करते हुए अभिनेत्री कहती हैं कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उन्होंने अपने भाई अर्जुन कपूर के साथ हो रही ऑनलाइन बदसुलूकी और नफरत पर प्रतिक्रिया जाहीर की और स्वीकार किया कि गलत समझे जाने का एहसास दुखदायी हो सकता है.
सब घर चलाने के लिए कर रहे हैं कोशिश
वो आगे कहती हैं कि, सभी वहीं कर रहे हैं जो उसे करना है, सब घर चलाने के लिए कोशिश कर रहे हैं. आपको लेन-देन को अच्छे से समझना होगा. इसमें गंभीरत कुछ नहीं है और इस बारे में पांच मिनट से ज्यादा सोचना बेवकूफी है.