Kahan Ja Raha Hai Song Secrets: हिंदी सिनेमा में कुछ ऐसे गाने बने, जो जीवन के फलसफे और दर्द को बखूबी दर्शाते हैं. ऐसा ही एक गाना साल 1955 में रिलीज हुआ था. इस गाने को आवाज दी थी मोहम्मद रफी साहब ने. चलिए जानते हैं इस गाने के पीछे की कहानी.
क्या है गाने के पीछे का रहस्य?
जिस गाने के बारे में हम बता रहे हैं वह 1955 में रिलीज हुई फिल्म ‘सीमा’ का है. इस गाने का नाम है ‘कहां जा रहा है…’. इस गीत के बोल लिखे थे गीतकार शैलेंद्र ने और आवाज दी थी मोहम्मद रफी साहब ने. इस गीत की जब रिकॉर्डिंग हो रही थी, तो उस वक्त रफी साहब बहुत संजीदा हो गए और गाने के अंतिम बंद को गाते समय वो भावनाओं में इस कदर बह गए कि उनका गला रुंध गया. गायक को लगा कि उनसे गलती हो गई है, लेकिन उन्होंने गाना पूरा किया. इस गाने की अंतिम लाइन थी, ‘बांधे थे जो बंदन क्यों तोड़ डाले…’ इसे गाते समय ही रफी साहब भावुक हो गए थे.
नहीं रिकॉर्ड हुआ दूसरी बार
रफी साहब द्वारा गाए गए इस गाने को संगीतकार शंकर जय किशन और गीतकार शैलेंद्र ने सुना और उन्हें पसंद आया. रफी साहब जिस लाइन पर थोड़ा अटके थे उसे बिना एडिट किए शामिल किया गया, जो उस गाने की पहचान बन गई. क्योंकि इसमें गायक का दर्द साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है, जिसने गाने को बना दिया सुपरहिट.
फिल्म के बारे में
फिल्म सीमा को अमिया चक्रवर्ती ने निर्देशित किया था. फिल्म में नूतन और बलराज साहनी मुख्य भूमिका में थे. इसकी कहानी ने दर्शकों का दिल जीतने का काम किया था. फिल्म की कहानी में अनाथ गौरी (नूतन) पर झूठे चोरी का आरोप लगाया जाता है. वह अशोक (बालराज साहनी) द्वारा चलाये जानेवाले बाल सुधार गृह में जाती है. उसकी विद्रोही स्वभाव से वह मुसीबत में पड़ती है पर वह अशोक की मदद से धीरे-धीरे सुधार जाती है.