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Home > मनोरंजन > जब पत्नी ने शरारती अंदाज में झटके अपने गीले बाल; तभी गीतकार ने लिखा सदाबहार रोमांटिक गाना, जो हो गया अमर

जब पत्नी ने शरारती अंदाज में झटके अपने गीले बाल; तभी गीतकार ने लिखा सदाबहार रोमांटिक गाना, जो हो गया अमर

Na Jhatko Zulf Se...Song Secrets: हर फिल्मी गाने के पीछे एक कहानी होती है. एक ऐसा ही गाना 1964 में आई फिल्म का था. गीतकार अपनी पत्नी के गीले बालों से इतना प्रभावित हो गया कि उसने एक ऐसा रोमांटिक गीत लिख दिया, जो आज भी लोग गुनगुनाते नजर आते हैं.

Written By: Kamesh Dwivedi
Last Updated: March 28, 2026 11:38:05 IST

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Na Jhatko Zulf Se Paani Song Behind Story: फिल्मों के गाने लिखने के लिए कभी-कभी गीतकार को महीनों लग जाते हैं, तो कभी चंद मिनटों में ही गाने तैयार हो जाते हैं. सब कुछ शब्दों और भाव का खेल है. कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाएं घटती है कि तुरंत गीत तैयार हो जाते हैं और वो दर्शकों के दिलों में इस कदर उतर जाते हैं कि सालों-साल के लिए अमर रहते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही गाने के बारे में बता जा रहे हैं, जो गीतकार राजेंद्र कृष्णन ने अपनी पत्नी से प्रभावित होकर लिखा था. वो 4 मिनट 24 सेकेंड का गीत 60 सालों बाद भी दर्शकों को उतना ही रोमांटिक लगता है. चलिए जानते हैं उस गाने और उसके पीछे की कहानी के बारे में. 

कौन सा है गाना?

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, वह साल 1964 में आई फिल्म ‘शहनाई’ का गीत है. उसके बोल ‘ना झटको जुल्फ से पानी, ये मोती फूट जाएंगे..’. इसके बोल गीतकार राजेंद्र कृष्णन ने लिखे थे. वहीं इसे आवाज दी थी मोहम्मद रफी साहब ने. इसके अलावा इसमें संगीत देने का काम रवि शंकर शर्मा ने किया था. ये रोमांटिक गाना आज भी लोगों को मदहोश करता नजर आता है. 

पत्नी ने झटके गीले बाल, फिर निकला गीत…

‘ना झटको जुल्फ से पानी’ गाने के बोल लिखने के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है. कहा जाता है कि गीतकार राजेंद्र कृष्णन जब भी कोई गीत लिखते थे तो वह अपने बेड पर आराम से बैठ कर लिखा करते थे. बताया जाता है कि एक दिन वह कुछ चिंतित थे. तभी उनकी पत्नी नहाकर कमरे में आईं और अपने गीले बालों को तौलिए से पोछने लगी. तभी कुछ पानी की बूंदे गीतकार के ऊपर पड़ी और कुछ उनके कागजों पर भी. इतना देखते ही उनकी पत्नी हंस पड़ी. लेकिन गीतकार के मन में तो कुछ और ही चल रहा था. इसके बाद राजेंद्र कृष्णन ने इस घटना को शब्दों में पिरो दिया और गाना लिख दिया ‘ना झटको जुल्फ से पानी..’. फिर इस गाने ने इतिहास रच दिया और इसे दर्शकों ने खूब प्यार दिया. 

कुछ दिनों में ही लिख देते थे गीत

गीतकार राजेंद्र कृष्णन के बारे में कहा जाता है कि निर्देशक उन्हें फिल्म के गाने लिखने के लिए महीने भर देते थे. लेकिन वह बाकी दिन मस्ती करते थे और आखिरी दिन गाना लिख देते थे. फिर वो गाने काफी हिट भी होते थे. 

फिल्म के बारे में 

एस डी नारंग के निर्देशन में फिल्म ‘शहनाई’ का निर्माण किया गया था. फिल्म में बिश्वजीत चटर्जी, राजश्री और निरूपा राय अहम भूमिका में थी. 

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Written By: Kamesh Dwivedi
Last Updated: March 28, 2026 11:38:05 IST

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Na Jhatko Zulf Se Paani Song Behind Story: फिल्मों के गाने लिखने के लिए कभी-कभी गीतकार को महीनों लग जाते हैं, तो कभी चंद मिनटों में ही गाने तैयार हो जाते हैं. सब कुछ शब्दों और भाव का खेल है. कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाएं घटती है कि तुरंत गीत तैयार हो जाते हैं और वो दर्शकों के दिलों में इस कदर उतर जाते हैं कि सालों-साल के लिए अमर रहते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही गाने के बारे में बता जा रहे हैं, जो गीतकार राजेंद्र कृष्णन ने अपनी पत्नी से प्रभावित होकर लिखा था. वो 4 मिनट 24 सेकेंड का गीत 60 सालों बाद भी दर्शकों को उतना ही रोमांटिक लगता है. चलिए जानते हैं उस गाने और उसके पीछे की कहानी के बारे में. 

कौन सा है गाना?

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, वह साल 1964 में आई फिल्म ‘शहनाई’ का गीत है. उसके बोल ‘ना झटको जुल्फ से पानी, ये मोती फूट जाएंगे..’. इसके बोल गीतकार राजेंद्र कृष्णन ने लिखे थे. वहीं इसे आवाज दी थी मोहम्मद रफी साहब ने. इसके अलावा इसमें संगीत देने का काम रवि शंकर शर्मा ने किया था. ये रोमांटिक गाना आज भी लोगों को मदहोश करता नजर आता है. 

पत्नी ने झटके गीले बाल, फिर निकला गीत…

‘ना झटको जुल्फ से पानी’ गाने के बोल लिखने के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है. कहा जाता है कि गीतकार राजेंद्र कृष्णन जब भी कोई गीत लिखते थे तो वह अपने बेड पर आराम से बैठ कर लिखा करते थे. बताया जाता है कि एक दिन वह कुछ चिंतित थे. तभी उनकी पत्नी नहाकर कमरे में आईं और अपने गीले बालों को तौलिए से पोछने लगी. तभी कुछ पानी की बूंदे गीतकार के ऊपर पड़ी और कुछ उनके कागजों पर भी. इतना देखते ही उनकी पत्नी हंस पड़ी. लेकिन गीतकार के मन में तो कुछ और ही चल रहा था. इसके बाद राजेंद्र कृष्णन ने इस घटना को शब्दों में पिरो दिया और गाना लिख दिया ‘ना झटको जुल्फ से पानी..’. फिर इस गाने ने इतिहास रच दिया और इसे दर्शकों ने खूब प्यार दिया. 

कुछ दिनों में ही लिख देते थे गीत

गीतकार राजेंद्र कृष्णन के बारे में कहा जाता है कि निर्देशक उन्हें फिल्म के गाने लिखने के लिए महीने भर देते थे. लेकिन वह बाकी दिन मस्ती करते थे और आखिरी दिन गाना लिख देते थे. फिर वो गाने काफी हिट भी होते थे. 

फिल्म के बारे में 

एस डी नारंग के निर्देशन में फिल्म ‘शहनाई’ का निर्माण किया गया था. फिल्म में बिश्वजीत चटर्जी, राजश्री और निरूपा राय अहम भूमिका में थी. 

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