बॉलीवुड में जब भी क्लासिक सिनेमा की बात होगी, तो उसमें 2014 में आई फिल्म हैदर का नाम जरूर होगा. यह उस साल की सबसे सफल फिल्म बन गई थी, जिसने 5 नेशनल अवॉर्ड सहित 35 अवॉर्ड्स अपने नाम किये थे.
यह मास्टरपीस फिल्म 90 के दशक के कश्मीर को दिखाती है, जिसे शाहिद कपूर के शानदार अभिनय ने जीवंत कर दिया था. सबसे दिलचस्प बात ये कि इस फिल्म के लिए लीड हीरो शाहिद कपूर और डायरेक्टर विशाल भारद्वाज ने एक रुपया भी फीस नहीं ली थी.
फिल्म का बैकग्राउंड
विशाल भारद्वाज ने शेक्सपियर के ‘हैमलेट’ को कश्मीर के 90 के दशक के अशांत दौर में सेट किया. शाहिद कपूर ने हैदर मीर नाम के एक युवक का रोल निभाया, जो अपनी पढ़ाई पूरी करके श्रीनगर वापस लौटता है. वहां आकर वो तत्कालीन कश्मीर की राजनीतिक सामाजिक परिस्थितियों में उलझ जाता है. उसे पता चलता है कि उसके पिता गायब हो गए हैं और उनकी गुमशुदगी के पीछे उसके अंकल का ही हाथ है. वहीं उसे इस बात से भी झटका लगता है कि उसकी मां (तब्बू) की नजदीकियां उसके अंकल (केके मेनन) से बढ़ रही हैं. यह कहानी केवल व्यक्तिगत प्रतिशोध तक सीमित नहीं है; यह कश्मीर में राजनीतिक अशांति और टूटे रिश्तों में फंसे आम लोगों के जीवन का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करती है. फिल्म में तब्बू का किरदार भी बेहद सशक्त था, जो अंत तक रहस्य बनाये रखता है.
फ्री में काम की वजह
इस फिल्म का विजन बड़ा था लेकिन फंडिंग कम थी. शाहिद और विशाल अगर फीस लेते तो फिल्म का बनना ही मुश्किल हो जाता. शाहिद और विशाल ने तय किया कि फीस न लेकर सारा पैसा प्रोडक्शन पर लगे. आईएमडीबी के अनुसार, अगर शाहिद और विशाल भारद्वाज रेगुलर फीस लेते तो फिल्म बन ही न पाती. यह फैसला फिल्म को कश्मीर की खूबसूरत लेकिन दर्दभरी लोकेशन्स पर शूट करने में मददगार साबित हुआ.
बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और अवॉर्ड्स
जब यह फिल्म रिलीज हुई तो उम्मीद से ज्यादा लोगों ने इसे पसंद किया. इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से ही प्रशंसा मिली. फिल्म ने भारत में 61 करोड़ नेट कमाए.इस फिल्म ने कुल 35 अवॉर्ड्स जीते, जिनमें 5 नेशनल अवॉर्ड्स भी शामिल है. शाहिद को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. यह फिल्म शाहिद के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इसने शाहिद की चॉकलेटी बॉय की इमेज तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और दिखाया कि शाहिद कपूर ऐसे गंभीर किरदार बखूबी निभा सकते हैं.