Neuroendocrine Tumor: बॉलीवुड के दिग्गज स्टार इरफान खान का न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के कारण निधन हुआ था. 2018 में उन्होंने एक एक्स पोस्ट के जरिए इस बात का खुलासा किया था. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर क्या है? दरअसल न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर एक ऐसी बीमारी है, जिससे अंत: स्रावी ग्रंथियां प्रभावित होती हैं. ये ग्रंथियां हार्मोन का स्राव करती हैं, जिसका नियंत्रण तंत्रिका तंत्र से होता है. अंत: स्रावी सेल्स पीयूष ग्रंथि, थाइरॉइड, पैराथाइराइड, टेस्टिस, ओवरीज, एड्रीनल और थाइमस आदि में स्रावी कोशिकाएं पाई जाती हैं. न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर तीन तरह के होते हैं. इनमें फियोक्रोमोसाइटोमा, न्यूरोएंडोक्राइन कार्सिनोमा, मेर्केल सेल कैंसर होते हैं.
- इनके लक्षणों की बात करें, तो न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के कारण अचानक से वजन बढ़ने और घटने लगता है.
- पैरों और एड़ियों में सूजन आने लगती है.
- शरीर में ऐंठन होती है.
- त्वचा पर घाव होने लगते हैं और त्वचा पतली होने लगती है.
- अचानक से ग्लूकोज लेवल बढ़ने और घटने लगता है.
- अचानक से स्ट्रेस बढ़ने लगता है और चक्कर आने लगते हैं.
- कभी-कभी लोगों में बेहोशी होने लगती है.
- पेट में अचानक दर्द होने लगता है.
- शरीर में थकावट और कमजोरी रहती है.
- ब्लड प्रेशर का बढ़ना.
- दिल और सांस से संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं.
- डायरिया होना.
- गर्दन और चेहरे पर बिना सूजन के लाल दाने पड़ जाना.
क्या हैं इसके कारण?
न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर एक दुर्ललभ बीमारी मानी जाती है. डॉक्टर्स का कहना है कि ये बीमारी जेनेटिक हो सकती है. अगर किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, तो भी इस बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा ज्यादा समय तक धूप में रहने के कारण शरीर पर अल्ट्रा वायलेट किरणों का बुरा असर पड़ता है. इससे ये बीमारी बढ़ सकती है.
क्या है न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का इलाज?
सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर शरीर के किस अंग में है. इसके लिए सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. अगर इसके इलाज की बात करें, तो इसे दवाओं, रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी से ठीक किया जा सकता है. डॉक्टर्स इसकी सर्जरी करके ट्यूमर और उसके आसपास के प्रभावित लिम्फ नोड्स निकाल देते हैं.
नोट: किसी भी तरह की शारीरिक समस्या महसूस होते ही सबसे पहले डॉक्टटर से संपर्क करें. उनके बताए इलाज से ही आपकी बीमारी सही हो सकती है. समय रहते इलाज होने से गंभीर बीमारियों से भी बचाव किया जा सकता है.