Oscar song : साल 2008 में जब दिग्गज फिल्ममेकर सुभाष घई फिल्म ‘युवराज’ बना रहे थे, तब उन्होंने संगीत की जिम्मेदारी ए.आर. रहमान को सौंपी थी. इसी फिल्म के लिए रहमान ने ‘जय हो’ की धुन तैयार की थी. लेकिन सुभाष घई को लगा कि यह गाना फिल्म की कहानी और मुख्य किरदार (जायद खान) की आक्रामक छवि के हिसाब से काफी ‘सॉफ्ट’ है. उन्होंने इसे फिल्म में रखने से मना कर दिया.
सुभाष घई की ना और डैनी बॉयल की हां
जब ‘युवराज’ के लिए यह गाना रिजेक्ट हुआ, तो रहमान ने इसके बारे में निर्देशक डैनी बॉयल को बताया, जो उस समय अपनी फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ पर काम कर रहे थे. डैनी बॉयल को यह धुन इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसे तुरंत अपनी फिल्म के क्लाइमैक्स के लिए चुन लिया. सुभाष घई ने भी खुशी-खुशी इस गाने को रहमान को वापस दे दिया, क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि यह धुन आगे चलकर इतिहास रचने वाली है.
ऑस्कर की रात और वैश्विक पहचान
‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ रिलीज हुई और पूरी दुनिया में छा गई. 81वें एकेडमी अवॉर्ड्स (Oscars) में इस फिल्म ने 8 ऑस्कर जीतकर तहलका मचा दिया. इसमें से ए.आर. रहमान ने दो ऑस्कर जीते एक ‘बेस्ट ओरिजिनल स्कोर’ के लिए और दूसरा ‘जय हो’ के लिए ‘बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग’ की श्रेणी में गुलज़ार साहब ने इसके बोल लिखे थे, जिन्होंने इस गाने को एक प्रार्थना और जीत का उत्सव बना दिया.
बदल गया सिनेमा का नजरिया
‘जय हो’ की सफलता ने भारतीय संगीत को एक नई वैश्विक पहचान दी .जहां बॉलीवुड फिल्म ‘युवराज’ बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई, वहीं उसी के एक ‘रिजेक्टेड’ गाने ने पूरी दुनिया को झूमने पर मजबूर कर दिया. यह घटना साबित करती है कि हर कला का अपना एक नसीब होता है. आज भी जब यह गाना बजता है, तो यह हर भारतीय के दिल में गर्व और उत्साह भर देता है.