Look a likes : सोशल मीडिया स्क्रॉल करते समय अक्सर हमारी नजरें किसी ऐसे चेहरे पर टिक जाती है जो बिल्कुल शाहरुख खान, कैटरीना कैफ या आलिया भट्ट जैसा दिखता है. देखते ही देखते उन पर लाखों लाइक्स और कमेंट्स की बाढ़ आ जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आम लोग सिर्फ किसी स्टार जैसा दिखने भर से इतने मशहूर क्यों हो जाते है? इसके पीछे इंसान की मानसिकता, भारत में स्टार्स की दीवानगी और सोशल मीडिया के खास फॉर्मूले का बड़ा हाथ है.
इंसान की साइकोलॉजी ,’परिचित’ चेहरों की तलाश
लोगों का दिमाग उन चीजों की ओर जल्दी आकर्षित होता है जिन्हें वह पहले से जानता है. जब हम किसी अनजान व्यक्ति में शाहरुख खान की मुस्कान या कैटरीना कैफ की आंखों जैसी झलक देखते है, तो हमारा दिमाग तुरंत उसे ‘रिकॉल’ (Recall) करता है. मनोविज्ञान के अनुसार, हम उन लोगों से जुड़ाव महसूस करते है जो हमारे पसंदीदा सितारों की याद दिलाते है. यही वजह है कि एक साधारण चेहरा भी हमें ‘खास’ लगने लगता है.
भारत में ‘स्टार वर्शिप’ (सितारों की पूजा)
भारत में बॉलीवुड केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक भावना है यहां फैंस अपने पसंदीदा एक्टर्स को भगवान की तरह पूजते है. जब असली सुपरस्टार तक पहुंचना मुमकिन नहीं होता, तो लोग उनके हमशक्लों (Lookalikes) को देखकर ही खुश हो जाते है. लोग इन हमशक्लों के साथ फोटो खिंचवाते है और उन्हें वही सम्मान देते है, जो वे अपने स्टार को देना चाहते है. यह ‘स्टार वर्शिप’ ही इन साधारण लोगों को ‘वायरल सेंसेशन’ बना देती है.
सोशल मीडिया एल्गोरिथम का कमाल
इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का Algorithm इसी तरह काम करता है कि जो चीज ज्यादा देखी जा रही है, उसे और बढ़ावा दिया जाए. जब कोई यूजर किसी हमशक्ल की वीडियो पर रुकता है या कमेंट करता है, तो एल्गोरिथम उसे ‘हाई इंगेजमेंट’ (High Engagement) मानकर हज़ारों नए लोगों तक पहुंचा देता है. एक बार जब कोई वीडियो शेयर होने लगता है, तो वह ‘डिजिटल जंगल’ की आग की तरह फैल जाता है.
साधारण से खास बनने का सफर
सोशल मीडिया ने आम लोगों को एक ऐसा मंच दिया है जहां केवल ‘शक्ल’ मिलना ही काफी है. आलिया भट्ट की हमशक्ल ‘सेलेस्टी बैरागी’ या कैटरीना जैसी दिखने वाली ‘अलीना राय’ इसके बड़े उदाहरण है. इन लोगों को न केवल सोशल मीडिया पर फेम मिलता है, बल्कि कई बार इन्हें विज्ञापनों और फिल्मों के ऑफर भी मिलने लगते है. बॉलीवुड के दीवाने इस देश में, अगर आपकी शक्ल किसी बड़े स्टार से मिलती है, तो आपकी किस्मत चमकने में वक्त नहीं लगता. यह हमशक्लों का क्रेज साबित करता है कि भारत में सिनेमा का जादू सिर्फ परदे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की असल जिंदगी का भी हिस्सा है.