27
बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह इन दिनों दो अलग-अलग वजहों से कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहे है. पहला मामला उनकी फिल्म ‘डॉन 3’ से बाहर होने और उसके बाद मेकर्स द्वारा मांगे गए ₹40 करोड़ के मुआवजे से जुड़ा है. दूसरा मामला फिल्म ‘कांतारा’ के धार्मिक प्रतीकों का मजाक उड़ाने को लेकर है, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी है.
‘डॉन 3’ विवाद: क्यों मांगे गए ₹40 करोड़ का हर्जाना?
रणवीर सिंह और एक्सेल एंटरटेनमेंट (फरहान अख्तर की कंपनी) के बीच चल रहा यह विवाद अब ‘प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ तक पहुंच गया है. रणवीर सिंह ने अचानक फिल्म ‘डॉन 3’ छोड़ने का फैसला किया, जिससे फिल्म के प्री-प्रोडक्शन (शुरुआती तैयारी) में लगा सारा पैसा बर्बाद हो गया. इसी आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए मेकर्स ने अभिनेता से ₹40 करोड़ की मांग की है.
इस मामले में रणवीर सिंह का अपना तर्क है. उनका कहना है कि उन्हें फिल्म की फाइनल स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई थी और प्रोजेक्ट में लगातार देरी हो रही थी. रणवीर के अनुसार, चूंकि उन्हें इस फिल्म के लिए कोई साइनिंग अमाउंट (एडवांस पैसा) नहीं मिला था, इसलिए वे कोई भी रकम वापस करने के लिए जिम्मेदार नहीं है. हाल ही में आमिर खान के घर हुई एक मीटिंग में कई बड़े फिल्मकारों ने दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी और अब मामला कानूनी मोड़ ले चुका है.
कांतारा मिमिक्री विवाद: हाई कोर्ट की सख्त चेतावनी
रणवीर सिंह के लिए दूसरा संकट कर्नाटक से जुड़ा है, जहां फिल्म ‘कांतारा’ के एक सीन की नकल करने के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी. दरअसल, गोवा में आयोजित एक इवेंट के दौरान रणवीर ने ‘कांतारा’ फिल्म के पवित्र ‘पंजुरली दैवा’ की मिमिक्री की थी और अनजाने में उन्हें ‘भूत’ कह दिया था. इससे तटीय कर्नाटक के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई थी और मामला कोर्ट तक पहुंच गया.
सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने रणवीर सिंह को कड़ी फटकार लगाई. उन्होंने कहा, आप सुपरस्टार हो सकते है, लेकिन आप कानून से ऊपर नहीं है. आपको अपनी जुबान पर काबू रखना चाहिए और किसी की धार्मिक आस्था का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए. कोर्ट ने रणवीर के व्यवहार को ‘लापरवाह’ बताया और टिप्पणी की कि इंसान अपनी गलती भूल सकता है, लेकिन इंटरनेट कभी कुछ नहीं भूलता. हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल राहत देते हुए 2 मार्च तक उनकी गिरफ्तारी या किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी है.