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Masala Movies : बॉलीवुड में अक्सर कुछ फिल्में अपने समय से इतनी आगे होती है कि रिलीज के वक्त दर्शक उन्हें समझ नहीं पाते. साल 1980 में आई सुभाष घई की फिल्म ‘कर्ज’ के साथ भी ऐसा ही हुआ. आज इसे एक कल्ट क्लासिक माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते है कि जब यह रिलीज हुई थी, तो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई थी? दिलचस्प बात यह है कि इसी ‘फ्लॉप’ फिल्म के आईडिया ने बाद में बॉलीवुड को दो सबसे बड़ी हिट फिल्में करण अर्जुन और ओम शांति ओम दी.
बॉक्स ऑफिस पर क्यों फेल हुई ‘कर्ज’?
1980 में जब ‘कर्ज’ रिलीज हुई, तो इसके ठीक एक हफ्ते बाद फिरोज खान की फिल्म ‘कुर्बानी’ आ गई. ‘कुर्बानी’ के स्टाइल और गानों के सामने ‘कर्ज’ की चमक फीकी पड़ गई. फिल्म मात्र 4 करोड़ रुपये भी नहीं कमा पाई. ऋषि कपूर इस असफलता से इतने दुखी हुए थे कि वह कुछ समय के लिए डिप्रेशन में चले गए थे.
पुनर्जन्म और बदले का वह आईडिया
‘कर्ज’ की कहानी पुनर्जन्म (Reincarnation) और प्रतिशोध पर आधारित थी. फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे एक पत्नी अपने पति (रवि वर्मा) को मारकर उसकी जायदाद हड़प लेती है और फिर वही पति ‘मोंटी’ बनकर वापस आता है और अपना बदला लेता है.
इस आईडिया ने बॉलीवुड के डायरेक्टर्स को एक नया फॉर्मूला दे दिया
करण अर्जुन (1995) राकेश रोशन ने ‘कर्ज’ के पुनर्जन्म वाले आईडिया को लिया और उसमें ‘माँ’ के इमोशन और दो भाइयों की कहानी जोड़ दी. ‘मेरे करण अर्जुन आएंगे’ का जादू ऐसा चला कि फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई. ओम शांति ओम (2007) फराह खान ने तो ‘कर्ज’ को एक तरह से ट्रिब्यूट (श्रद्धांजलि) ही दे दी. फिल्म का नाम ‘कर्ज’ के मशहूर गाने पर रखा गया. फिल्म की शुरुआत में ऋषि कपूर का वही आइकॉनिक डांस दिखाया गया और क्लाइमेक्स में भी अपराधी को बेनकाब करने का तरीका ‘कर्ज’ जैसा ही था.
गानों ने बनाया रिकॉर्ड
भले ही फिल्म नहीं चली, लेकिन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत अमर हो गया. ‘दर्द-ए-दिल’, ‘ओम शांति ओम’, ‘एक हसीना थी’ और ‘पैसा ये पैसा’ जैसे गाने आज भी हर पार्टी की जान है. मजेदार बात यह है कि इस फिल्म के लगभग हर गाने के नाम पर भविष्य में एक अलग फिल्म बनी.
एक फिल्म जिसने इतिहास बदला
आज ‘कर्ज’ को हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन थ्रिलर फिल्मों में गिना जाता है. सिमी गरेवाल का विलेन अवतार और ऋषि कपूर का ‘मोंटी’ वाला अंदाज आज भी एक्टर्स के लिए एक स्कूल की तरह है. इसने साबित किया कि एक अच्छी कहानी कभी मरती नहीं, वह किसी न किसी रूप में वापस जरूर आती है.