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Home > मनोरंजन > शाहिद की पत्नी मीरा बच्चों को सिखा रहीं मनी मैनेजमेंट, बेटी से पूछा दादी के दिए पैसे का क्या करोगी?

शाहिद की पत्नी मीरा बच्चों को सिखा रहीं मनी मैनेजमेंट, बेटी से पूछा दादी के दिए पैसे का क्या करोगी?

शाहिद कपूर और मीरा कपूर दो बच्चों ज़ैन और मीशा के प्राउड पेरेंट्स हैं. हाल ही में मुंबई में हुए एक इवेंट में मीरा ने बताया कि वह अपने बच्चों को छोटी उम्र से ही मनी मैनेजमेंट की बेसिक बातें सिखा रही हैं.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: March 10, 2026 13:04:26 IST

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बॉलीवुड. शाहिद कपूर और मीरा कपूर दो बच्चों ज़ैन और मीशा के प्राउड पेरेंट्स हैं. हाल ही में मुंबई में हुए एक इवेंट में मीरा ने बताया कि वह अपने बच्चों को छोटी उम्र से ही मनी मैनेजमेंट की बेसिक बातें सिखा रही हैं. वेलनेस एंटरप्रेन्योर ने बताया कि उनके बच्चे बेक सेल्स जैसी एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेते हैं और अपनी दादी से मिले गिफ्ट में मिले पैसे भी इन्वेस्ट करते हैं.

उनके मुताबिक, घर पर फाइनेंस के बारे में रेगुलर बातचीत का मकसद बच्चों को यह सिखाना है कि पैसा कैसे काम करता है, न कि बिना उसकी वैल्यू समझे बस ले लेना.

मीरा कपूर ने क्या कहा

वोग वैल्यूज़: विमेन ऑफ़ एक्सीलेंस इवेंट में बोलते हुए, मीरा ने अपनी बेटी मीशा के साथ हुई बातचीत को याद किया. उन्होंने कहा कि उससे पैसों के बारे में बात करते हुए क्या नानी ने उसे एक लिफाफा दिया है, ‘तुम इसका क्या करोगी?’ ‘क्या यह तुम्हारे तकिए के नीचे जाएगा या बैंक में जाना चाहिए?’ अगर बैंक को दिया जाता है, तो अंदर के पैसे का क्या होता है? उसने हाल ही में एक बेकरी बूथ खोला है, और मैंने उसे यह समझने में मदद की कि उसे मुझसे कितने पैसे लोन के तौर पर मिले हैं, उसे प्रॉफिट कमाने के लिए कितने पैसे चाहिए.

पेरेंटिंग पर शाहिद कपूर

हाल ही में  शाहिद ने ज़ैन और मीशा को जितना हो सके नॉर्मल परवरिश देने की अहमियत के बारे में भी बात की. मैं चाहता हूं कि वे जितना हो सके नॉर्मल रहें. लेकिन इसके बाद, जो है सो है. जैसे-जैसे वे बड़े होंगे वे और ज़्यादा अवेयर हो जाएंगे लेकिन हम इस बारे में बात करने के लिए कुछ नहीं करते. अगर कोई सवाल उठता है, तो हम पेरेंट्स के तौर पर सबसे अच्छे तरीके से उनका जवाब देने की कोशिश करते हैं. बाकी जो है सो है. शाहिद और मीरा की शादी 2015 में हुई थी. उन्होंने 2016 में अपनी बेटी मीशा और 2018 में अपने बेटे ज़ैन का वेलकम किया.

फाइनेंशियल लिटरेसी ज़रूरी 

मीरा कपूर ने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में फाइनेंशियल लिटरेसी बहुत ज़रूरी है और सेल्फ-कॉन्फिडेंस बनाने में अहम भूमिका निभाती है. उनका मानना ​​है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही फाइनेंशियल फैसले लेना सिखाया जाना चाहिए ताकि वे बड़े होकर फाइनेंशियली मजबूत और इंडिपेंडेंट बन सकें.

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बॉलीवुड. शाहिद कपूर और मीरा कपूर दो बच्चों ज़ैन और मीशा के प्राउड पेरेंट्स हैं. हाल ही में मुंबई में हुए एक इवेंट में मीरा ने बताया कि वह अपने बच्चों को छोटी उम्र से ही मनी मैनेजमेंट की बेसिक बातें सिखा रही हैं. वेलनेस एंटरप्रेन्योर ने बताया कि उनके बच्चे बेक सेल्स जैसी एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेते हैं और अपनी दादी से मिले गिफ्ट में मिले पैसे भी इन्वेस्ट करते हैं.

उनके मुताबिक, घर पर फाइनेंस के बारे में रेगुलर बातचीत का मकसद बच्चों को यह सिखाना है कि पैसा कैसे काम करता है, न कि बिना उसकी वैल्यू समझे बस ले लेना.

मीरा कपूर ने क्या कहा

वोग वैल्यूज़: विमेन ऑफ़ एक्सीलेंस इवेंट में बोलते हुए, मीरा ने अपनी बेटी मीशा के साथ हुई बातचीत को याद किया. उन्होंने कहा कि उससे पैसों के बारे में बात करते हुए क्या नानी ने उसे एक लिफाफा दिया है, ‘तुम इसका क्या करोगी?’ ‘क्या यह तुम्हारे तकिए के नीचे जाएगा या बैंक में जाना चाहिए?’ अगर बैंक को दिया जाता है, तो अंदर के पैसे का क्या होता है? उसने हाल ही में एक बेकरी बूथ खोला है, और मैंने उसे यह समझने में मदद की कि उसे मुझसे कितने पैसे लोन के तौर पर मिले हैं, उसे प्रॉफिट कमाने के लिए कितने पैसे चाहिए.

पेरेंटिंग पर शाहिद कपूर

हाल ही में  शाहिद ने ज़ैन और मीशा को जितना हो सके नॉर्मल परवरिश देने की अहमियत के बारे में भी बात की. मैं चाहता हूं कि वे जितना हो सके नॉर्मल रहें. लेकिन इसके बाद, जो है सो है. जैसे-जैसे वे बड़े होंगे वे और ज़्यादा अवेयर हो जाएंगे लेकिन हम इस बारे में बात करने के लिए कुछ नहीं करते. अगर कोई सवाल उठता है, तो हम पेरेंट्स के तौर पर सबसे अच्छे तरीके से उनका जवाब देने की कोशिश करते हैं. बाकी जो है सो है. शाहिद और मीरा की शादी 2015 में हुई थी. उन्होंने 2016 में अपनी बेटी मीशा और 2018 में अपने बेटे ज़ैन का वेलकम किया.

फाइनेंशियल लिटरेसी ज़रूरी 

मीरा कपूर ने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में फाइनेंशियल लिटरेसी बहुत ज़रूरी है और सेल्फ-कॉन्फिडेंस बनाने में अहम भूमिका निभाती है. उनका मानना ​​है कि बच्चों को छोटी उम्र से ही फाइनेंशियल फैसले लेना सिखाया जाना चाहिए ताकि वे बड़े होकर फाइनेंशियली मजबूत और इंडिपेंडेंट बन सकें.

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