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मधुबाला की अनसुनी कहानी: जब ‘कैंसल कल्चर’ के दौर में रिवॉल्वर लेकर चलने को मजबूर हुई ‘वीनस ऑफ इंडियन सिनेमा’

The untold story : भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत अदाकारा, जिनकी एक मुस्कान पर दुनिया फिदा थी... क्या आप जानते है कि वही मधुबाला कभी डर के साये में जीने को मजबूर थी ? 1950 के दशक में जब लोग उनकी खूबसूरती के कसीदे पढ़ रहे थे, तब पर्दे के पीछे उन्हें बदनाम करने की एक ऐसी साजिश रची गई कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए रिवॉल्वर उठानी पड़ी.

Written By: Mansi Sharma
Last Updated: 2026-02-14 18:26:06

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The untold story : मधुबाला को अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में सराहा गया, लेकिन उनकी सफलता के पीछे एक ऐसा दौर भी था जब उन्हें नीचा दिखाने के लिए मीडिया और टैब्लॉइड्स ने उन पर तीखे हमले किए.  यह संघर्ष इतना बढ़ गया था कि उन्हें राज्य सरकार से हथियार रखने की इजाजत लेनी पड़ी. 
 

राज कपूर से भी बेहतर अभिनेत्री

फिल्म ‘नील कमल’ के निर्देशक केदार शर्मा ने मधुबाला को राज कपूर से भी बेहतर और बुद्धिमान अभिनेत्री बताया था.  उन्होंने कहा था कि वह एक मशीन की तरह काम करती थी और कभी सेट पर देर से नहीं आती थी.  कम उम्र में ही उन्होंने ‘महल’ जैसी फिल्मों से खुद को साबित कर दिया था. 
 

कैसे शुरू हुआ विरोध का सिलसिला?

दुष्प्रचार की शुरुआत तब हुई जब उनकी फिल्म ‘मधुबाला’ (1950) फ्लॉप हो गई.  इसके बाद एक फिल्म के सेट पर स्वच्छता कारणों (Hygiene) से स्विमिंग पूल में उतरने से मना करने पर प्रेस ने उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया.  उन पर ‘बॉक्स ऑफिस पॉइजन’ होने का ठप्पा लगा दिया गया और उनके चरित्र पर भद्दे कमेंट्स किए जाने लगे. 
 

रिवॉल्वर और हथियारबंद गार्ड्स का साया

मानसिक दबाव और अपनी जान को खतरा महसूस होने पर तत्कालीन गृह मंत्री मोरारजी देसाई ने मधुबाला को एक लाइसेंसी रिवॉल्वर दी और तीन महीने तक उन्हें हथियारबंद गार्ड्स की सुरक्षा मुहैया कराई गई.  यह उस दौर में किसी फिल्मी सितारे के लिए एक असाधारण बात थी. 
 

पत्रकार बी.के. करंजिया ने सुलझाया मामला

वरिष्ठ पत्रकार बी.के. करंजिया की मध्यस्थता से मामला शांत हुआ.  मधुबाला और उनके पिता अताउल्लाह खान ने पत्रकारों से मुलाकात की और आपसी मतभेदों को सुलझाया.  इसके बाद मधुबाला ने ‘मुगल-ए-आजम’ जैसी अमर फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया. 

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