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2-3 नहीं, इतने महीने में बने रश्मिका-विजय की शादी के गहने; कई किलो सोने का हुआ उपयोग, टेंपल ज्वेलरी पर फिदा हुए नेटिजंस

रश्मिका और विजय की शादी में जेवरों को डिजाइन करने वाले श्री ज्वेलर्स ने बताया कि इन आभूषणों को बनाने में 10 महीने का समय और कठिन परिश्रम लगा था, जिसमें कई किलो सोने का उपयोग किया गया. जेवरों को डिजाइन करने वाले श्री ज्वेलर्स ने बताया कि इन आभूषणों को बनाने में 10 महीने का समय और कठिन परिश्रम लगा था, जिसमें कई किलो सोने का उपयोग किया गया.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: February 27, 2026 17:10:48 IST

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VIROSH Wedding: सोशल मीडिया पर रश्मिका और विजय की शादी छायी हुई है. दोनों के वेडिंग लुक ने एक नया ट्रेंड स्थापित किया है. शादी में जिस चीज ने सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया वो थे दूल्हा और दुल्हन के गहने. 
इन जेवरों को डिजाइन करने वाले श्री ज्वेलर्स ने बताया कि इन आभूषणों को बनाने में 10 महीने का समय और कठिन परिश्रम लगा था, जिसमें कई किलो सोने का उपयोग किया गया. यह राजसी ज्वेलरी दक्षिण भारतीय परंपराओं से प्रेरित थी.

दूल्हा-दुल्हन का दैवीय रूप 

तेलुगु सिनेमा के चर्चित कपल ने उदयपुर के मोमेंटोज इकाया होटल में आंध्रा और कोडावा रीति-रिवाजों से शादी रचाई. शादी की तस्वीरें अपलोड होते ही सोशल मीडिया पर छा गईं, जहां रश्मिका नारंगी साड़ी में और विजय धोती-कुर्ते में राजसी नजर आए. अनामिका खन्ना द्वारा डिजाइन किए गए आउटफिट्स के साथ हेरिटेज गोल्ड जूलरी ने सभी का ध्यान खींचा. कपल ने इंस्टाग्राम पर फोटोज शेयर कर फैंस को सरप्राइज दिया.  शादी में विजय देवरकोंडा ने जहां राजसी आभूषणों से मन मोह लिया, वहीं रश्मिका सौम्य मुस्कान के साथ एक देवी के रूप में तैयार हुईं.

विजय और रश्मिका ने पहने दुर्लभ गहने 

रश्मिका ने सिर से पैर तक सोने के 11 आभूषण पहने थे, जिनमें एक चोकर उसके ऊपर पारंपरिक हारम, स्टेटमेंट झुमके, जड़ा बिल्ला, चंपासरलू, हाथफूल, माथापट्टी, नोज पिन, चूड़ियां, बाजूबंद, कमरबंद और पायलें शामिल थे. हैदराबाद स्थित ज्वेलरी ब्रांड ने बताया, “इस कलेक्शन में उभरी हुई नक्षी कारीगरी और जटिल रवा ग्रैनुलेशन का काम शामिल था, जिसमें हर एक डिटेल को कुशल कारीगरों द्वारा हाथ से जोड़ा गया था.”
वहीं श्री ज्वैलर्स ने कहा, “एंटीक मैट पॉलिश में तैयार की गई इन कृतियों में एक समृद्ध, पारंपरिक चमक थी, जो उनकी आकृति के साथ सहजता से मेल खाती थी. इसका उद्देश्य केवल सजावट नहीं, बल्कि स्थायित्व था. ये पीढ़ियों तक चलने वाली विरासत के रूप में परिकल्पित आभूषण थे” 
वहीं विजय देवरकोंडा ने भी कई आभूषण पहने थे. विजय ने कान में सिक्के के आकार के कर्णफूल, लॉन्ग टेंपल नेकलेस, कासु माला, पेली बसिंगा, आर्म कफ, रिस्ट कफ, एंकल कड़ा, टेंपल हारम, गोल्ड रिंग और ओडियानम बेल्ट धारण किया था. यह सभी जूलरी हस्तनिर्मित थी, जिसमें फूल, हाथी, शेर जैसे मोटिफ्स की नक्काशी की गयी थी. श्री ज्वैलर्स ने बताया, “विजय देवरकोंडा के आभूषणों ने दूल्हे की अलंकृत शैली के इर्द-गिर्द एक मजबूत धारणा पेश की, जो भारतीय शादियों में अभी भी अपेक्षाकृत कम महत्व रखती है.”

निर्माण प्रक्रिया में लगा महीनों का समय

श्री ज्वैलर्स के अनुसार शादी की सारी ज्वेलरी तैयार करने में लगभग 10 महीने का समय लगा, जिसमें कारीगरों ने किलोग्रामों 24 कैरेट सोने का उपयोग किया. पारंपरिक साउथ इंडियन शादियों में सोना शुभ माना जाता है, इसलिए डायमंड या कुंदन के बजाय ऑल गोल्ड चुना गया. ज्वेलरी ब्रांड ने बताया, “हमने दक्षिण भारतीय वास्तुकला की भव्यता से गहरी प्रेरणा ली, जो संस्कृति को खूबसूरती से परिभाषित करती है. रश्मिका के दुल्हन के लुक को एक जीवंत देवी की आभा के इर्द-गिर्द परिकल्पित किया गया था, जबकि विजय के पहनावे में एक संप्रभु राजा की उपस्थिति झलकती थी.”  विजय और रश्मिका के आभूषणों में दीप नक्षी और रवा की बारीक कारीगरी को शामिल किया गया था, जिसे बनाने में उच्च कोटि के कौशल की जरूरत होती है.

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