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Home > मनोरंजन > गीतकार ने बेटे के वियोग में लिखा ये सॉन्ग, बन गया प्रेमियों का सबसे अमर गाना, झकझोर कर रख देगी कहानी

गीतकार ने बेटे के वियोग में लिखा ये सॉन्ग, बन गया प्रेमियों का सबसे अमर गाना, झकझोर कर रख देगी कहानी

Song Secrets: हिंदी सिनेमा में एक ऐसा गाना आया, जिसे गीतकार ने बेटे के वियोग में लिखा था. फिर यह गाना प्रेमियों की पहली पसंद बन गया था. जानिए गाने के नाम.

Written By: Kamesh Dwivedi
Last Updated: April 10, 2026 16:27:43 IST

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Zara Saamne To Aao Chhaliye: साल 1957 में एक फिल्म रिलीज हुई थी. इस फिल्म के एक गाने उसे दौर में तहलका मचा दिया था. यह गाना इतना सुपरहिट हुआ कि उस साल नंबर वन गीत बन गया गया था. गीतकार ने ऐसी व्यथा में इस गीत की रचना की थी सुनकर आपका कलेजा भी पिघल जाएगा. इस सॉन्ग को लिखा था भारत व्यास जी ने.  

कौना सा है गाना?

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, वह फिल्म ‘जनम-जनम के फेरे’ का है. इस गाने का नाम है, ‘जरा सामने तो आओ छलिए’. इस गीत को आवाज दी थी मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर ने. वहीं इस गाने को एस.एन त्रिपाठी ने संगीतबद्ध किया था. इस गाने के सुंदर बोल लिखे थे पंडित भारत व्यास ने. 

बेटे के गम में हुए दुखी

इस गीत को लिखा था पंडित भारत व्यास जी ने. दरअसल हुआ गीतकार का एक बेटा था, जिनका नाम श्याम सुंदर व्यास था. वह बहुत ही संवेदनशील लड़का था एक दिन वह अपने पिता से  किसी बात पर नाराज होकर घर छोड़कर चला गया था. भारत जी ने उसे लाख ढूंढा रेडियो, अखबारों में विज्ञापन दिया गली-गली दीवारों पर पोस्टर चिपका. उसे ढूंढने के लिए उन्होंने धरती आकाश और पाताल सब एक कर दिया. ज्योतिष आदि से भी संपर्क किया लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला. आखिर में निराश होकर भारत व्यास बहुत ही व्यतीत रहने लगे. हर वक्त यही सोचते कहां हो पुत्र तेरी सारी इच्छाओं सर आंखों पर रखूंगा. बस तू लौट के तो आजा. 

निर्माता ने गाना लिखने को दिया

एक तरफ बेटे के वियोग में गीतकार भारत व्यास थे. वहीं दूसरी तरफ उस वक्त उनके कैरियर का बेहतरीन दौड़ चल रहा था. निराशा से भरे ऐसे दौर में एक निर्माता भारत व्यास जी से मिलने आया और उन्हें अपने फिल्म के लिए गाना लिखने के लिए कहा. लेकिन गीतकार इतने गुस्से में थे कि उन्होंने निर्माता को घर से निकलने को कह दिया. हालांकि, भारत जी की पत्नी ने कैसे तैसे निर्माता को रोका और दूसरे दिन सुबह दोबारा आने के लिए विनती किया और निर्माता तैयार हो गए. इसके बाद गीतकार की पत्नी ने व्यास जी को समझाया कि आप कैसे भी ये गाना लिख दीजिए चाहे तो पुत्र वियोग में ही. 

लिखा ऐसा गाना, जिसने रचा इतिहास

पत्नी की बात मानकर गीतकार भारत व्यास ने लिखा ‘जरा सामने तो आओ छलिए’.  इस गीत को वर्ष 1957 में आई फिल्म जनम-जनम के फेरे में शामिल किया गया. लता जी ने इस गाने को बड़ी तबीयत से और दर्द भरे गले से गया और गीत में व्यथा की भावना ने लोगों को अंदर तक झकझोर कर रख दिया. यह गीत खूब मशहूर हुआ लेकिन अफसोस के बेटा फिर भी ना लौटा. 

फिर लौट आया बेटा

व्यास जी ने इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी. फिर साल 1959 में आई फिल्म ‘रानी रूपमती’ में एक गीत लिखा, ‘आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं’ इस गीत को सुनकर उनका बेटा वापस लौट आया. 

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Written By: Kamesh Dwivedi
Last Updated: April 10, 2026 16:27:43 IST

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Zara Saamne To Aao Chhaliye: साल 1957 में एक फिल्म रिलीज हुई थी. इस फिल्म के एक गाने उसे दौर में तहलका मचा दिया था. यह गाना इतना सुपरहिट हुआ कि उस साल नंबर वन गीत बन गया गया था. गीतकार ने ऐसी व्यथा में इस गीत की रचना की थी सुनकर आपका कलेजा भी पिघल जाएगा. इस सॉन्ग को लिखा था भारत व्यास जी ने.  

कौना सा है गाना?

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, वह फिल्म ‘जनम-जनम के फेरे’ का है. इस गाने का नाम है, ‘जरा सामने तो आओ छलिए’. इस गीत को आवाज दी थी मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर ने. वहीं इस गाने को एस.एन त्रिपाठी ने संगीतबद्ध किया था. इस गाने के सुंदर बोल लिखे थे पंडित भारत व्यास ने. 

बेटे के गम में हुए दुखी

इस गीत को लिखा था पंडित भारत व्यास जी ने. दरअसल हुआ गीतकार का एक बेटा था, जिनका नाम श्याम सुंदर व्यास था. वह बहुत ही संवेदनशील लड़का था एक दिन वह अपने पिता से  किसी बात पर नाराज होकर घर छोड़कर चला गया था. भारत जी ने उसे लाख ढूंढा रेडियो, अखबारों में विज्ञापन दिया गली-गली दीवारों पर पोस्टर चिपका. उसे ढूंढने के लिए उन्होंने धरती आकाश और पाताल सब एक कर दिया. ज्योतिष आदि से भी संपर्क किया लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला. आखिर में निराश होकर भारत व्यास बहुत ही व्यतीत रहने लगे. हर वक्त यही सोचते कहां हो पुत्र तेरी सारी इच्छाओं सर आंखों पर रखूंगा. बस तू लौट के तो आजा. 

निर्माता ने गाना लिखने को दिया

एक तरफ बेटे के वियोग में गीतकार भारत व्यास थे. वहीं दूसरी तरफ उस वक्त उनके कैरियर का बेहतरीन दौड़ चल रहा था. निराशा से भरे ऐसे दौर में एक निर्माता भारत व्यास जी से मिलने आया और उन्हें अपने फिल्म के लिए गाना लिखने के लिए कहा. लेकिन गीतकार इतने गुस्से में थे कि उन्होंने निर्माता को घर से निकलने को कह दिया. हालांकि, भारत जी की पत्नी ने कैसे तैसे निर्माता को रोका और दूसरे दिन सुबह दोबारा आने के लिए विनती किया और निर्माता तैयार हो गए. इसके बाद गीतकार की पत्नी ने व्यास जी को समझाया कि आप कैसे भी ये गाना लिख दीजिए चाहे तो पुत्र वियोग में ही. 

लिखा ऐसा गाना, जिसने रचा इतिहास

पत्नी की बात मानकर गीतकार भारत व्यास ने लिखा ‘जरा सामने तो आओ छलिए’.  इस गीत को वर्ष 1957 में आई फिल्म जनम-जनम के फेरे में शामिल किया गया. लता जी ने इस गाने को बड़ी तबीयत से और दर्द भरे गले से गया और गीत में व्यथा की भावना ने लोगों को अंदर तक झकझोर कर रख दिया. यह गीत खूब मशहूर हुआ लेकिन अफसोस के बेटा फिर भी ना लौटा. 

फिर लौट आया बेटा

व्यास जी ने इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी. फिर साल 1959 में आई फिल्म ‘रानी रूपमती’ में एक गीत लिखा, ‘आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं’ इस गीत को सुनकर उनका बेटा वापस लौट आया. 

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