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Home > जनरल नॉलेज > 80,000 रु. में 1 किलो पनीर; गाय, भैंस नहीं बल्कि इस पशु के दूध से बनता है अमीरों का खास पनीर, नाम जानकर रह जाएंगे हैरान!

80,000 रु. में 1 किलो पनीर; गाय, भैंस नहीं बल्कि इस पशु के दूध से बनता है अमीरों का खास पनीर, नाम जानकर रह जाएंगे हैरान!

एक पनीर ऐसा भी है, जिसकी 1 किलो मात्रा की कीमत 80,000 रु. है. हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे महंगे पनीर 'पुले' की, जो किसी गाय या भैंस नहीं बल्कि गधी के दूध से बनाया जाता है. आइये जानते हैं कि अमीरों का ये खास पनीर इतना महंगा क्यों है?

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: March 6, 2026 11:28:28 IST

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हर भारतीय रसोई में पनीर का अपना एक विशेष स्थान है. शाकाहारी लोगों के लिए तो ये और भी खास है, क्योंकि ज्यादातर वेजीटेरियन लोग प्रोटीन के लिए पनीर पर निर्भर हैं. लेकिन सोचिये अगर यही पनीर 80000 रु. प्रति किलो के हिसाब से मिलने लगे तो? ये काल्पनिक बात नहीं है, बल्कि वास्तव में एक पनीर ऐसा भी है, जिसकी 1 किलो मात्रा के लिए आपको 80,000 रु. देने होंगे.

हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे महंगे पनीर ‘पुले’ की, जो किसी गाय या भैंस नहीं बल्कि गधी के दूध से बनाया जाता है. यह विशिष्ट पनीर सर्बिया के एक बायोस्फियर रिजर्व में बनाया जाता है.

‘पुले’ (Pule) पनीर का परिचय

‘पुले’ (Pule) पनीर सर्बिया में गधी के दूध से तैयार किया जाने वाला पनीर है, जो अपने कम उत्पादन और विशिष्ट पोषक गुणों के कारण काफी महंगा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह $600 (लगभग 50,000 रुपये) से $1000 (लगभग 85,000 रुपये) प्रति किलोग्राम तक बिकता है. इसकी दुर्लभता और विशेष गुणों के कारण यह दुनिया का सबसे महंगा पनीर माना जाता है. स्लोबोडन सिमिच नामक किसान इसे अपने फार्म पर बनाते हैं.

अत्यधिक जटिल है बनाने की प्रक्रिया

पुले पनीर बनाने की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल और महंगी है. 1 किलोग्राम पुले पनीर बनाने के लिए लगभग 25 लीटर दूध की जरूरत होती है, लेकिन गधी 1 दिन में सिर्फ 1.5 से 2 लीटर दूध देती है, जबकि गाय 60 लीटर तक दे सकती है. इसके दूध में कम ठोस पदार्थ होते हैं, इसलिए पनीर बनाने के लिए अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है. इसके अलावा एक गधी केवल 6 महीने दूध देती है, फिर एक साल इंतजार करना पड़ता है. इन सब कारणों से पनीर बनने की प्रक्रिया काफी धीमी, जटिल और महंगी हो जाती है. 

पोषण और फायदे

गधी के दूध में गाय, भैंस जैसे डेयरी पशुओं के मुकाबले अधिक पोषक तत्व होते हैं. यह प्रोटीन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं जो पेट की समस्याओं, हड्डियों को मजबूत करते हैं और बॉडी में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं. इसका टेक्स्चर क्रीमी, बिल्कुल मलाई जैसा होता है. 

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Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: March 6, 2026 11:28:28 IST

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हर भारतीय रसोई में पनीर का अपना एक विशेष स्थान है. शाकाहारी लोगों के लिए तो ये और भी खास है, क्योंकि ज्यादातर वेजीटेरियन लोग प्रोटीन के लिए पनीर पर निर्भर हैं. लेकिन सोचिये अगर यही पनीर 80000 रु. प्रति किलो के हिसाब से मिलने लगे तो? ये काल्पनिक बात नहीं है, बल्कि वास्तव में एक पनीर ऐसा भी है, जिसकी 1 किलो मात्रा के लिए आपको 80,000 रु. देने होंगे.

हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे महंगे पनीर ‘पुले’ की, जो किसी गाय या भैंस नहीं बल्कि गधी के दूध से बनाया जाता है. यह विशिष्ट पनीर सर्बिया के एक बायोस्फियर रिजर्व में बनाया जाता है.

‘पुले’ (Pule) पनीर का परिचय

‘पुले’ (Pule) पनीर सर्बिया में गधी के दूध से तैयार किया जाने वाला पनीर है, जो अपने कम उत्पादन और विशिष्ट पोषक गुणों के कारण काफी महंगा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह $600 (लगभग 50,000 रुपये) से $1000 (लगभग 85,000 रुपये) प्रति किलोग्राम तक बिकता है. इसकी दुर्लभता और विशेष गुणों के कारण यह दुनिया का सबसे महंगा पनीर माना जाता है. स्लोबोडन सिमिच नामक किसान इसे अपने फार्म पर बनाते हैं.

अत्यधिक जटिल है बनाने की प्रक्रिया

पुले पनीर बनाने की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल और महंगी है. 1 किलोग्राम पुले पनीर बनाने के लिए लगभग 25 लीटर दूध की जरूरत होती है, लेकिन गधी 1 दिन में सिर्फ 1.5 से 2 लीटर दूध देती है, जबकि गाय 60 लीटर तक दे सकती है. इसके दूध में कम ठोस पदार्थ होते हैं, इसलिए पनीर बनाने के लिए अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है. इसके अलावा एक गधी केवल 6 महीने दूध देती है, फिर एक साल इंतजार करना पड़ता है. इन सब कारणों से पनीर बनने की प्रक्रिया काफी धीमी, जटिल और महंगी हो जाती है. 

पोषण और फायदे

गधी के दूध में गाय, भैंस जैसे डेयरी पशुओं के मुकाबले अधिक पोषक तत्व होते हैं. यह प्रोटीन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं जो पेट की समस्याओं, हड्डियों को मजबूत करते हैं और बॉडी में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं. इसका टेक्स्चर क्रीमी, बिल्कुल मलाई जैसा होता है. 

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