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क्या Srilanka में भी मनाई जाती है Diwali? जवाब सुन चौंक जाएंगे

Diwali 2025: जब भी भारत में दिवाली का पर्व मनाया जाता है, तब मन में एक सवाल जागता है कि क्या श्रीलंका में भी दिवाली मनाई जाती है या नहीं? तो आइए जानें इस सवाल का जवाब.

Diwali 2025 in Sri Lanka: भारत में जब दिवाली का उत्सव पूरे जोश और उल्लास के साथ मनाया जाता है, तब दिल में एक सवाल उठता है कि क्या रावण की नगरी लंका में भी दिवाली मनाई जाती होगी? तो इस सवाल का जवाब है, जी हां,  श्रीलंका में भी दिवाली को बड़े हर्षोल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाता है. दिलचस्प बात यह है कि भारत और श्रीलंका की दिवाली की जड़ें भले ही एक ही सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी हों, लेकिन यहां इसे मनाने का तरीका और इसका प्रतीकात्मक अर्थ कुछ अलग और बेहद खास होता है.

परंपरा और भावना से जुड़ा त्योहार

जैसा कि हम सब जानते है कि श्रीलंका एक बहुधार्मिक देश है यहां बौद्ध, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी समुदाय रहते हैं. इनमें से तमिल हिंदू समुदाय दिवाली को अपने सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में गिनता है. यह पर्व अच्छाई की बुराई पर विजय, प्रकाश के अंधकार पर विजय और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है. भारत में दिवाली को भगवान राम की अयोध्या वापसी से जोड़ा जाता है, लेकिन श्रीलंका में इस त्योहार का धार्मिक अर्थ थोड़ा अलग है. यहां रावण को एक विद्वान और शक्तिशाली राजा के रूप में देखा जाता है, इसलिए दिवाली को रावण-वध से नहीं जोड़ा जाता, बल्कि इसे “लैंप फेस्टिवल” यानी दीपों के पर्व के रूप में मनाया जाता है.

 

हफ्तों पहले शुरू होती है तैयारियां

दिवाली से कई दिन पहले श्रीलंका में उत्सव की तैयारी शुरू हो जाती है. लोग अपने घरों की गहन सफाई करते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में ‘सुथु कांडू’ कहा जाता है. इसका अर्थ होता है नकारात्मकता को हटाकर सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करना. बाजारों में रौनक बढ़ जाती है, दुकानों को दीयों और रोशनियों से सजाया जाता है और परिवार नए कपड़े, गहने और मिठाइयां खरीदते हैं बिलकुल वैसे ही जैसे भारत में दिवाली के पहले का नज़ारा होता है.

 पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाने वाला दिन

दिवाली की सुबह श्रीलंका के तमिल परिवार तेल स्नान से दिन की शुरुआत करते हैं. इसे शुद्धिकरण और शुभता का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद घरों के मुख्य द्वार पर चावल के आटे से रंगोली बनाई जाती है, जो मेहमानों और देवताओं के स्वागत का प्रतीक होती है.

यहां एक खास परंपरा है  केले के पत्तों से बने छोटे दीपों में मोमबत्ती, धूप और सिक्के रखकर उन्हें जलाना. कई परिवार इन दीपों को नदियों या झीलों में प्रवाहित करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस परंपरा से घर में समृद्धि, सौभाग्य और शांति आती है.

कोलंबो में दीपों की जगमगाहट

राजधानी कोलंबो में दिवाली की शाम विशेष रूप से भव्य होती है. यहां स्थित प्राचीन पोन्नम्बलवनेश्वर शिव मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु एकत्रित होकर विशेष पूजा और आरती करते हैं. मंदिर को हजारों दीयों से सजाया जाता है और वातावरण में भक्ति का गहरा भाव झलकता है. श्रद्धालु भगवान शिव और देवी लक्ष्मी से समृद्धि और शांति की कामना करते हैं.

रावण-वध नहीं माना जाता है प्रकाश का पर्व

भारत में जहां दिवाली को राम की रावण पर विजय से जोड़ा जाता है, वहीं श्रीलंका में यह त्योहार प्रकाश, एकता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. यहां के तमिल हिंदू समुदाय में दिवाली को “अंधकार पर प्रकाश की विजय” के रूप में मनाया जाता है  बिना किसी युद्ध या पराजय की भावना के. 

कोलंबो से लेकर जाफना तक फैली रोशनी

कई लोग मानते हैं कि श्रीलंका में दिवाली केवल कोलंबो तक सीमित है, लेकिन ऐसा नहीं है. जाफना, त्रिंकोमाली और कैंडी जैसे तमिल-बहुल इलाकों में भी दिवाली की जगमगाहट देखने लायक होती है. हर मोहल्ला, हर घर रोशनी में डूबा होता है.  लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, मिठाइयों का आदान-प्रदान करते हैं और पूरे समाज में उत्सव का माहौल बनता है.

Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

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