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खबरदार! इस पक्षी को छूने की गलती पड़ सकती है आपको भारी, इसके रोंगटे-रोंगटे में बसा है जानलेवा जहर

न्यू गिनी (New Guinea) के वर्षावनों में पाया जाने वाला यह हुडेड पिटोहुई (Hooded Pitohui) पक्षी दुनिया के दुर्लभ पक्षियों (Rare Bird) में से एक माना जाता है.

Hooded Pitohui Rare Poisonous Bird: प्रकृति अपने आप में ही कई रहस्यों से भरी हुई है. लेकिन इस धरती पर एक ऐसा भी पक्षी है जिसके शरीर में जानलेवा जहर बसा हुआ है. हुडेड पिटोहुई (Hooded Pitohui)  उन्हीं पक्षियों में से एक है. न्यू गिनी के वर्षावनों में पाया जाने वाला यह पक्षी दुनिया के उन अत्यंत दुर्लभ पक्षियों (Rare Bird) में एक है, जो सबसे ज्यादा जहरीले होते हैं. वैज्ञानिक रूप से Pitohui dichrous के नाम से जाना जाने वाला यह पक्षी दिखने में जितना सुंदर होता है, लेकिन छूने में उससे कई ज्यादा खतरनाक.

रूप-रंग और क्या है इसका पहचान?

हुडेड पिटोहुई का शरीर चमकीले नारंगी और काले रंग का होता है. जानकारी के मुताबिक, इसका सिर, गला और पंख गहरे काले होते हैं, जबकि बाकी शरीर ईंट जैसे लाल या नारंगी रंग का भी होता है. यह रंगों का मेल प्रकृति में एक चेतावनी की तरह सबसे ज्यादा काम करता है, जो शिकारियों को संदेश देता है कि इसे खाना एक तरह से जानलेवा भी हो सकता है.

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विष का स्रोत: बैट्राचोटॉक्सिन

हालाँकि, इस पक्षी की सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि इसके पंखों और त्वचा में बैट्राचोटॉक्सिन (Batrachotoxin) नाम की एक घातक न्यूरोटॉक्सिन पाया जाता है. और सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि ये वहीं ज़हर है जो कोलंबिया के प्रसिद्ध पॉइजन डार्ट फ्रॉग‘ (मेंढक) में भी पाया जाता है.

ऐसा माना जाता है कि यह पक्षी खुद जहर पैदा नहीं कर सकता है, बल्कि यह विशेष प्रकार के मेलिडे (Melyrid) बीटल (कीड़े) खाता है, जिनमें यह जहर पैदा करने की ताकत होती है. इन कीड़ों को खाने से जहर पक्षी के शरीर में जमा हो जाता है, जिससे वह खुद जहरीला बन जाता है.

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मानव और शिकारियों पर क्या है असर

अगर कोई इंसान हुडेड पिटोहुई को नंगे हाथों से छूता है, तो उसे तुरंत इसके प्रभाव का अनुभव महसूस करना पड़ता है. त्वचा के संपर्क में आते ही वह हिस्सा पूरी तरह से सुन्न पड़ जाता है. इतना ही नहीं उच्च सांद्रता (High Concentration) में यह जहर मांसपेशियों में हल्का मरोड़ पैदा करना शुरू कर देता है. इस खतरनाक पक्षी को छूने के बाद ही हाथ, आँखों या फिर नाक के पास ले जाया जाए, तो तेज जलन के साथ-साथ छीकें भी आनी शुरू हो जाती है.

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स्थानीय लोग क्यों कहते हैं इसे कचरा पक्षी?

दरअसल, स्थानीय लोग इसे “कचरा पक्षी” भी कहते हैं. क्योंकि इसे पकाया नहीं जा सकता है. इसकी गंध बहुत ही ज्यादा तीखी होती है और इसका स्वाद इतना कड़वा है कि यह खाने के लायक ही नहीं होता है. इसके अलावा यह जहर मुख्य रूप से सांपों, बाजों और अन्य परजीवियों से इस पक्षी की रक्षा करने में बेहद ही मदद करता है.

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