How ISRO Worked Before Internet: वैसे तो सभी को पता है कि भारत में इंटरनेट की शुरुआत कब हुई थी, लेकिन अगर आपको नहीं पता है तो हम आपको बता दें कि भारत में इंटरनेट की शुरुआत साल 1995 में हुई थी. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि साल 1995 से पहले जब भारत देश में इंटरनेट नहीं था तो उससे पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) कैसे काम करता था. आइए हम आपको बताते हैं-
जैसा की आपको हमने अभी बताया कि भारत में इंटरनेट की शुरुआत 1995 में हुई थी और इसके बाद से दुनिया का संचार पूरी तरह बदल गया, लेकिन इससे पहले भी देश के काफी काम हुआ करते थे, वैज्ञानिक भी बड़े मिशनों पर काम करते थे. जब साल 1969 में इसरो की स्थापना हुई थी तब न तो देश में इंटरनेट था ना ही कोई अलग सुविधा, लेकिन इसके बाद भी अंतरिक्ष ने कड़ी पहचान बनाई.
कैसे होता था बिना इंटरनेट के काम?
साल 1995 से पहले ISRO का काम पूरी तरह से पारंपरिक तरीको से होता था, उस दौर में वैज्ञानिक सीमित तकनीकों में काम करते थे. जब भी कोई डेटा ट्रांसफर करना होता था तो वो फिजिकल टेप, डिस्क और रेडियो कम्युनिकेशन का यूज करते थे. अगर उन्हें कोई जानकारी भेजनी होती थी तो घंटो लगते थे और बहुत बार तो ऐसा होता था कि कई दिनों का समय लग जाता था.
ग्राउंड स्टेशन होता था सहारा
जब नेट नहीं था तो इसरो अपने सैटेलाइट नेटवर्क और ग्राउंड स्टेशनों के जरिए काम करता था. कोई भी मिशन की बड़ी जानकारी को ट्रैकिंग स्टेशनों तक भेजा जाता था और फिर उसे आगे प्रोसेस किया जाता था. ये पूरा काम टफ जरूर था लेकिन या काफी भरोसेमंद माना जाता था.
साथ ही जैसा की उस समय वैज्ञानिकों को रियल अपडेट नहीं मिल पाती थी, इसलिए हर मिशन को करने के लिए पहले से डिटेल में एक शानदार प्लान बनाया जाता था. ऐसा की कोई गलती न हो क्योंकि छोटी सी गलती बड़े नुकसान का कारण बन जाती थी, इसलिए हर कदम फूक कर रखना पड़ता था. इसलिए ही कम साधन के बाद भी इसरो ने काफी सफल मिशन किए हैं, क्योंकि उनका टीम वर्क काफी अच्छा होता था.
आज कैसा है सिस्टम?
अगर आज की बात करें तो आज देश के पास हर सुविधा है. इंटरनेट से सबकुछ काफी आसान बना दिया है. अब कोई भी डेटा तुरंत ट्रांसफर हो जाता है और तुरंत लोगों को चीजों की जानकारी मिल जाती है. जब पहले इंटरनेट नहीं था तो काम करन काफी चैलेंजिंग होता था, लेकिन उसी समय इसरो ने अपनी नींव रखी.