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Home > जनरल नॉलेज > पानी का रंग नीला तो क्यों कहते हैं लाल सागर? जानें क्या है इस विचित्र नाम के पीछे का रहस्य

पानी का रंग नीला तो क्यों कहते हैं लाल सागर? जानें क्या है इस विचित्र नाम के पीछे का रहस्य

Red Sea: आपने अक्सर भूगोल में समुद्रों और महासागरों के बारे में पढ़ते हुए लाल सागर का नाम सुना होगा. इसका नाम सुनकर ऐसा लगता है कि इस सागर में लाल रंग का पानी बहता होगा पर ऐसा नहीं है. आइये जानते हैं दुनिया के सबसे गर्म और खारे सागर का नामकरण कैसे हुआ.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: April 4, 2026 11:54:43 IST

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Red Sea: आपने अक्सर भूगोल में समुद्रों और महासागरों के बारे में पढ़ते हुए लाल सागर का नाम सुना होगा. इसका नाम सुनकर ऐसा लगता है कि इस सागर में लाल रंग का पानी बहता होगा पर ऐसा नहीं है. 

फिर एक सवाल ये भी उठता है कि अगर ऐसा नहीं है, तो इसका नाम लाल सागर या रेड सी क्यों हुआ. इसका जवाब इतिहास में छिपा है. आइये जानते हैं दुनिया के सबसे गर्म और खारे सागर का नामकरण कैसे हुआ.

लाल सागर की भौगोलिक स्थिति 

लाल सागर (रेड सी) मिस्र के स्वेज से दक्षिण-पूर्व की ओर करीब 1,930 किमी लंबा संकीर्ण जलमार्ग है, जो बाब-एल-मंडेब जलसंधि से अरब सागर से जुड़ता है. यह पश्चिम में मिस्र, सूडान, इरिट्रिया से तथा पूर्व में सऊदी अरब, यमन से घिरा है. इसकी चौड़ाई अधिकतम 190 मील और गहराई 9,974 फीट तक है. यह दुनिया का सबसे गर्म और खारा समुद्र है.

यह समुद्र स्वेज नहर के माध्यम से भूमध्य सागर से जुड़ा हुआ है और यूरोप-एशिया व्यापार का प्रमुख मार्ग है. प्राचीन मिस्रवासियों ने 2500 ईसा पूर्व में इसे खोजा था.

नामकरण का सिद्धांत

जैसेकि अभी बताया गया कि इस सागर को प्राचीन मिस्रवासियों ने खोजै था और उन्होंने इसका नाम ‘एरिथ्रा थलासा’ रखा था, जिसका अर्थ ‘लाल सागर’ है. हिब्रू भाषा में इसे स्वेज की रीड्स के कारण ‘यम सुफ’ (रीड्स का सागर) के नाम से जाना जाता है. लाल सागर के नाम का एक कारण शैवाल सिद्धांत भी है. इस सागर में पाए जाने वाले ट्राइकोडेस्मियम एरिथ्रियम नामक सायनोबैक्टीरिया पानी को लाल-भूरा रंग देती है.

इसके अलावा इसके नाम का एक दिशा सिद्धांत भी है. प्राचीन एशियाई भाषाओं में दक्षिण को ‘लाल’ कहा जाता था (उत्तर ‘काला’ जैसे ब्लैक सी), इसलिए  ग्रीक/अनातोलियन दृष्टि से यह दक्षिणी सागर था.

जैव विविधता

लाल सागर में 1,166 मछली प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें 165 केवल यहीं पाई जाती हैं. इसके अलावा 44 शार्क की प्रजातियां भी यहां देखने को मिलती हैं. दुनिया का सबसे लंबा कोरल रीफ (2,000 किमी) यहां मौजूद है. इनमें से कुछ तो 7,000 वर्ष पुराने कोरल रीफ हैं जिनमें 346 कठोर कोरल प्रजातियां हैं. सबसे तेज मछली सेलफिश (68 मील/घंटा) भी इस सागर में निवास करती है. 

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Last Updated: April 4, 2026 11:54:43 IST

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Red Sea: आपने अक्सर भूगोल में समुद्रों और महासागरों के बारे में पढ़ते हुए लाल सागर का नाम सुना होगा. इसका नाम सुनकर ऐसा लगता है कि इस सागर में लाल रंग का पानी बहता होगा पर ऐसा नहीं है. 

फिर एक सवाल ये भी उठता है कि अगर ऐसा नहीं है, तो इसका नाम लाल सागर या रेड सी क्यों हुआ. इसका जवाब इतिहास में छिपा है. आइये जानते हैं दुनिया के सबसे गर्म और खारे सागर का नामकरण कैसे हुआ.

लाल सागर की भौगोलिक स्थिति 

लाल सागर (रेड सी) मिस्र के स्वेज से दक्षिण-पूर्व की ओर करीब 1,930 किमी लंबा संकीर्ण जलमार्ग है, जो बाब-एल-मंडेब जलसंधि से अरब सागर से जुड़ता है. यह पश्चिम में मिस्र, सूडान, इरिट्रिया से तथा पूर्व में सऊदी अरब, यमन से घिरा है. इसकी चौड़ाई अधिकतम 190 मील और गहराई 9,974 फीट तक है. यह दुनिया का सबसे गर्म और खारा समुद्र है.

यह समुद्र स्वेज नहर के माध्यम से भूमध्य सागर से जुड़ा हुआ है और यूरोप-एशिया व्यापार का प्रमुख मार्ग है. प्राचीन मिस्रवासियों ने 2500 ईसा पूर्व में इसे खोजा था.

नामकरण का सिद्धांत

जैसेकि अभी बताया गया कि इस सागर को प्राचीन मिस्रवासियों ने खोजै था और उन्होंने इसका नाम ‘एरिथ्रा थलासा’ रखा था, जिसका अर्थ ‘लाल सागर’ है. हिब्रू भाषा में इसे स्वेज की रीड्स के कारण ‘यम सुफ’ (रीड्स का सागर) के नाम से जाना जाता है. लाल सागर के नाम का एक कारण शैवाल सिद्धांत भी है. इस सागर में पाए जाने वाले ट्राइकोडेस्मियम एरिथ्रियम नामक सायनोबैक्टीरिया पानी को लाल-भूरा रंग देती है.

इसके अलावा इसके नाम का एक दिशा सिद्धांत भी है. प्राचीन एशियाई भाषाओं में दक्षिण को ‘लाल’ कहा जाता था (उत्तर ‘काला’ जैसे ब्लैक सी), इसलिए  ग्रीक/अनातोलियन दृष्टि से यह दक्षिणी सागर था.

जैव विविधता

लाल सागर में 1,166 मछली प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें 165 केवल यहीं पाई जाती हैं. इसके अलावा 44 शार्क की प्रजातियां भी यहां देखने को मिलती हैं. दुनिया का सबसे लंबा कोरल रीफ (2,000 किमी) यहां मौजूद है. इनमें से कुछ तो 7,000 वर्ष पुराने कोरल रीफ हैं जिनमें 346 कठोर कोरल प्रजातियां हैं. सबसे तेज मछली सेलफिश (68 मील/घंटा) भी इस सागर में निवास करती है. 

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