क्या हैं बंगाली शैली में खास?
अन्य क्षेत्रीय शैलियां और उनकी विशेषताएं
बिहार और बंगाल कलाकारों का सहयोग
इस सहयोग से विभिन्न कला शैलियों का समावेश हुआ है. पारंपरिक पाला शैली की मूर्तियों में पहले कई देवता और राक्षस एक ही फ्रेम में दिखाए जाते थे, जबकि अब मौर्य शैली की साफ और अलग-अलग फ्रेमिंग की विशेषताएं भी देखी जा सकती हैं. इसका परिणाम यह हुआ कि मूर्तियां भावपूर्ण आंखों और गंभीर भावों को बरकरार रखते हुए आधुनिक फ्रेमिंग शैली को भी अपना रही हैं.