Strait Ka Matlab Kya Hai: युद्ध हमें उन तरीकों से भी प्रभावित करता है जिनका हमें एहसास भी नहीं होता. जब युद्ध छिड़ता है, तो लोगों को फौरन नुकसान होता है. आम नागरिकों की जान चली जाती है, परिवार बिछड़ जाते हैं और अपने घरों से भागने को मजबूर हो जाते हैं, और समुदाय बिखर जाते हैं. लेकिन युद्ध की लहरें युद्ध के मैदान से कहीं आगे तक पहुँचती हैं. इसका सीधा सीधा जवाब है कि युद्ध की लहरें हमारे ऊर्जा तंत्र, हमारी अर्थव्यवस्थाओं और जलवायु तक पहुंचती हैं. वहीं अब एक बार फिर वो स्थति पैदा हो गई है जब दो देशों की वजह से पूरे गल्फ में जंग का माहौल है. पानी से लेकर LPG तक की दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है.
क्यों हुई तेल की किल्ल्त?
जैसे की आप सभी जानते हैं कि इस यद्ध की वजह से ईरान ने अमेरिकी ठिकानों, खाड़ी देशों और पूरे क्षेत्र में तेल के बुनियादी ढाँचे पर जवाबी हमले किए. और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को जहाज़ों की आवाजाही के लिए बंद करने की घोषणा कर दी. यह क्षेत्र दुनिया के आधे से ज़्यादा तेल भंडार पर स्थित है. यहाँ जो होता है, उसका असर यहीं तक सीमित नहीं रहता. कुछ ही दिनों के भीतर, पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतों में भारी उथल-पुथल मच गई, और हर जगह, हर किसी को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ा.
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‘Strait of Hormuz’ में क्या है STRAIT ?
जैसा की आप सभी जानते हैं कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच समुद्र की एक संकरी पट्टी है. यह फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और दुनिया के बाकी महासागरों से जोड़ता है. अपने सबसे संकरे बिंदु पर इसकी चौड़ाई केवल लगभग 33 किलोमीटर है, यह लगभग उतनी ही दूरी है जितनी आप एक घंटे में साइकिल चलाकर तय कर सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘Strait of Hormuz’ में STRAIT का मतलब क्या है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Strait of Hormuz एक अत्यंत संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जो फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है. बता दें कि Strait जल के एक ऐसे संकरे मार्ग को कहते हैं, जो दो बड़े समुद्रों को आपस में जोड़ता है. इस मार्ग की बड़ी बात ये है कि ये मार्ग ईरान और ओमान के बीच दुनिया के लगभग 20% तेल के परिवहन का माध्यम बनता है. इसी के कारण तेल एक देश से दूसरे देश पहुंचता है.
तेल पहुंचने का एक मात्र रास्ता
लेकिन इसका आकार भ्रामक है. इस जलडमरूमध्य से हर दिन दुनिया भर में खपत होने वाले कुल तेल का 5वां हिस्सा, और साथ ही बड़ी मात्रा में गैस गुज़रती है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात से आने वाले तेल और गैस को दुनिया के बाकी हिस्सों तक पहुँचने से पहले इसी रास्ते से गुज़रना पड़ता है. संघर्ष, हमले या नाकेबंदी जैसी किसी भी बाधा से दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति तुरंत प्रभावित हो सकती है.