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क्या आप जानते हैं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत जहाज पहुंचने में कितना समय लगता है? जानें दूरी

Strait of Hormuz to India Distance: विदेश में चल रहे तवान के चलते काफी अन्य देश भी चपेट में आए हैं और उसमें भारत भी शामिल है. वॉर के चलते ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के कई रास्ते बंद कर दिए थे जिससे कई जहाज वहां फस गए थे. तो क्या आपने सोचा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत जहाज को पहुंचने में कितना समय लगता है. आइए जानते हैं-

Written By: Sanskriti jaipuria
Last Updated: April 11, 2026 15:23:31 IST

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Strait of Hormuz to India Distance: जैसा की सभी को पता है कि मध्य पूर्व तनाव चल रहा है. खासकर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच टकराव ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ग्लोबल चर्चा के केंद्र में ला दिया है. हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इसे जल्द खोले जाने के संकेतों ने इस मुद्दे को और अहम बना दिया है. ये समुद्री मार्ग सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि ग्लोबल ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि यहीं से होकर कच्चा तेल और ईंधन भारत समेत कई देशों तक पहुंचता है.

गल्फ देशों से आने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. मौजूदा हालात में सुरक्षा कारणों से ईरान ने इस क्षेत्र में आवाजाही सीमित कर दी है, जिससे कई देशों के जहाज यहां फंस गए हैं. इसका असर भारतीय जहाजों पर भी साफ दिख रहा है, जो इसी मार्ग से भारत पहुंचते हैं.

 स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा लेकिन काफी जरूरी समुद्री मार्ग है, जिसकी चौड़ाई लगभग 21 से 33 किलोमीटर के बीच है. ये फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन इसी रास्ते से होता है.

 भारत से दूरी और यात्रा का समय

इस जलडमरूमध्य से भारत के पश्चिमी तट, खासकर गुजरात के कांडला बंदरगाह तक की दूरी लगभग 1000 से 1550 किलोमीटर है. इस दूरी को तय करने में जहाजों को आमतौर पर 37 से 53 घंटे लगते हैं, हालांकि ये समय जहाज की स्पीड और समुद्री परिस्थितियों पर निर्भर करता है.

सामान्य परिस्थितियों में तेल टैंकर 24 से 31 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं. इस हिसाब से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत पहुंचने में करीब 2 से 3 दिन का समय लगता है.

 भारत के लिए रणनीतिक महत्व

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए पूरा करता है, इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज देश के लिए बेहद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत तैनात किए हैं, ताकि तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों को सुरक्षा दी जा सके.

तनाव के बावजूद कुछ भारतीय जहाज नौसेना की निगरानी में सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं, जबकि कई अभी भी इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं. यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी हर हलचल का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

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Written By: Sanskriti jaipuria
Last Updated: April 11, 2026 15:23:31 IST

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Strait of Hormuz to India Distance: जैसा की सभी को पता है कि मध्य पूर्व तनाव चल रहा है. खासकर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच टकराव ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ग्लोबल चर्चा के केंद्र में ला दिया है. हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इसे जल्द खोले जाने के संकेतों ने इस मुद्दे को और अहम बना दिया है. ये समुद्री मार्ग सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि ग्लोबल ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि यहीं से होकर कच्चा तेल और ईंधन भारत समेत कई देशों तक पहुंचता है.

गल्फ देशों से आने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. मौजूदा हालात में सुरक्षा कारणों से ईरान ने इस क्षेत्र में आवाजाही सीमित कर दी है, जिससे कई देशों के जहाज यहां फंस गए हैं. इसका असर भारतीय जहाजों पर भी साफ दिख रहा है, जो इसी मार्ग से भारत पहुंचते हैं.

 स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा लेकिन काफी जरूरी समुद्री मार्ग है, जिसकी चौड़ाई लगभग 21 से 33 किलोमीटर के बीच है. ये फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन इसी रास्ते से होता है.

 भारत से दूरी और यात्रा का समय

इस जलडमरूमध्य से भारत के पश्चिमी तट, खासकर गुजरात के कांडला बंदरगाह तक की दूरी लगभग 1000 से 1550 किलोमीटर है. इस दूरी को तय करने में जहाजों को आमतौर पर 37 से 53 घंटे लगते हैं, हालांकि ये समय जहाज की स्पीड और समुद्री परिस्थितियों पर निर्भर करता है.

सामान्य परिस्थितियों में तेल टैंकर 24 से 31 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं. इस हिसाब से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत पहुंचने में करीब 2 से 3 दिन का समय लगता है.

 भारत के लिए रणनीतिक महत्व

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए पूरा करता है, इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज देश के लिए बेहद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत तैनात किए हैं, ताकि तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों को सुरक्षा दी जा सके.

तनाव के बावजूद कुछ भारतीय जहाज नौसेना की निगरानी में सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं, जबकि कई अभी भी इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं. यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी हर हलचल का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

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