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भागवत गीता से लेकर उपनिषद तक…अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान क्या-क्या साथ ले गई थी सुनीता विलियम्स?

Sunita Williams Retire: भारतीय मूल की नासा की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स रिटायर्ड हो गईं हैं. अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उन्होंने अपने साथ भागवत गीता और उपनिषद की एक कॉपी ले गईं थीं. इसके अलावा, उन्हें भारतीय खाने से बहुत लगाव था. अंतरिक्ष में वो अपने साथ समोसे ले गई थीं.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: January 21, 2026 16:30:34 IST

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Sunita Williams Career: भारतीय मूल की नासा की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स जिनका इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर आठ दिन का मिशन आखिरकार नौ महीने से ज्यादा समय तक चला, 27 साल के शानदार करियर के बाद रिटायर हो गई हैं. नासा ने मंगलवार को घोषणा की कि उनका रिटायरमेंट 27 दिसंबर, 2025 को क्रिसमस के तुरंत बाद से लागू हो गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि उनका भारत से क्या कनेक्शन था.

नासा की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष की विशालता में यात्रा करते हुए भी हमेशा अपनी भारतीय जड़ों से गहराई से जुड़ी रही हैं.

अपने हर मिशन के दौरान भारतीय संस्कृति से जुड़ीं रहीं सुनीता

अमेरिका में जन्मी और पली-बढ़ी विलियम्स ने यह सुनिश्चित किया है कि वह हर मिशन पर अपनी सांस्कृतिक विरासत को अपने साथ ले जाएं. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर भागवत गीता की एक कॉपी ले जाने से लेकर ऑर्बिट में दिवाली मनाने तक उनके कामों ने भारतीय विरासत पर उनके गर्व को दिखाया है. पिछले कुछ सालों में उन्होंने कई दिल को छू लेने वाले पल शेयर किए हैं जो भारत के प्रति उनके प्यार को दिखाते हैं.

एस्ट्रोनॉट विलियम्स ने बोइंग स्टारलाइनर पर अपने मिशन के दौरान अपनी विरासत का एक हिस्सा अंतरिक्ष में ले जाने का एक तरीका खोजा, यह सुनिश्चित करके कि समोसे भी उनके साथ यात्रा करें.

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भारतीय खाने की बहुत बड़ी फैन रहीं हैं सुनीता विलियम्स

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुनीता विलियम्स भारतीय खाने की बहुत बड़ी फैन रही हैं. उन्होंने घर के स्वाद के लिए अपना प्यार जाहिर करते हुए कहा कि भारतीय खाना! आप कभी भी भारतीय खाने से ऊब नहीं सकते. यह विलियम्स के लिए सिर्फ एक स्नैक से कहीं ज्यादा था. यह एक पर्सनल टच था, अंतरिक्ष की विशालता में रहते हुए अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का एक तरीका. नासा एस्ट्रोनॉट्स को लॉन्च से पहले अपना खाना चुनने की इजाजत देता है, और विलियम्स के लिए अपनी पसंदीदा भारतीय चीज को शामिल करना एक प्राथमिकता थी.

अपने साथ समोसे ले जाकर उन्होंने न केवल आरामदायक खाने का मजा लिया, बल्कि अपने मिशन पर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी साथ ले गईं, यह दिखाते हुए कि सबसे छोटी खुशियां भी पृथ्वी की सीमाओं को पार कर सकती हैं.

सुनीता ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर मनाई दिवाली

एस्ट्रोनॉट विलियम्स की सबसे प्यारी याद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर दिवाली मनाना था. उस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने अपने पिता को याद किया, जो भारत से अमेरिका चले गए थे और प्यार से कहा कि मुझे खास तौर पर अपने पिता की याद आती है. जमीन से 260 मील ऊपर रोशनी का त्योहार मनाना उनके पिता के प्रभाव और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके गहरे लगाव के प्रति एक दिल को छू लेने वाला इशारा था.

बाहरी अंतरिक्ष में होने से यह उत्सव और भी ज्यादा यादगार बन गया, क्योंकि इससे उन्हें दिवाली मनाने और घर से इतनी दूर होने के बावजूद अपनी विरासत से जुड़ाव महसूस करने में मदद मिली. यह एक मजबूत याद दिलाता था कि उनकी सांस्कृतिक विरासत हमेशा चमकती रहेगी, ठीक दिवाली की रोशनी की तरह.

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अंतरिक्ष में ले गई भागवत गीता और उपनिषदों का कॉपी

एस्ट्रोनॉट विलियम्स ने भगवद गीता और उपनिषदों की एक कॉपी ले जाकर अंतरिक्ष में आध्यात्मिक अर्थ भी जोड़ा. ये पवित्र ग्रंथ, जिन्हें वह अक्सर सोचने और मार्गदर्शन के लिए पढ़ती थीं, इन ग्रंथों ने उन्हें अपने मिशन के दौरान ताकत और समझ दी. उन्होंने बताया कि ये किताबें स्पेस में ले जाने के लिए बिल्कुल सही थीं,. और इस बात पर जोर दिया कि घर से दूर रहते हुए भी इनकी शिक्षाओं ने उन्हें फोकस और क्लैरिटी बनाए रखने में कैसे मदद की. स्पेस के अकेलेपन में ये आध्यात्मिक ग्रंथ आराम और जुड़ाव का माध्यम बन गए, जिससे शांति और मकसद का एहसास हुआ. विलियम्स का इन किताबों को साथ ले जाने का फैसला उनकी गहरी आध्यात्मिकता और स्पेस की विशालता में भी अंदरूनी सोच-विचार के महत्व को दिखाता है.

कौन थे दीपक पंड्या?

सुनीता विलियम्स ने भारत की अपनी हालिया यात्रा के दौरान अपने पिता दीपक पंड्या को याद किया. नई दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में एक इंटरैक्टिव सेशन में बोलते हुए पूर्व NASA अंतरिक्ष यात्री ने अपने पिता के बारे में बात की और बताया कि अंतरिक्ष में रहते हुए वह अपने “असली घर” को कैसे ढूंढती थीं. सुनीता विलियम्स के पिता दीपक पंड्या गुजरात के झुलसन के रहने वाले थे. उनका 2020 में अमेरिका में 88 साल की उम्र में निधन हो गया.

वह एक न्यूरोएनाटोमिस्ट थे जिन्होंने 1953 में गुजरात यूनिवर्सिटी से इंटरमीडिएट साइंस (I.S.) से अपनी उच्च शिक्षा की यात्रा शुरू की थी. 1957 में उन्होंने MD की डिग्री हासिल की. 1964 में वह केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी में एनाटॉमी डिपार्टमेंट में पोस्टडॉक्टोरल फेलो के तौर पर शामिल हुए. वह अपनी पत्नी और सुनीता विलियम्स की मां स्लोवेनियाई-अमेरिकी उर्सुलिन बोनी जालोकर से 1957 में मिले थे.

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