Railway New Rule: रेलवे का टिकट तो आमतौर पर लोग एक से दो महीने पहले बुक करते हैं, लेकिन बावजूद इसके कुछ यात्रियों का टिकट RAC ही रह जाता है. RAC में आपको रेल की केवल आधी सीट मिलती है, जिसपर बैठकर आपको सफर करना पड़ता है. लेकिन, इस आधी सीट का किराया रेलवे द्वारा सभी चार्जिस के साथ पूरा वसूला जाता है. इसी मुद्दे को देखते हुए कांग्रेस सांसद के.सी.वेणुगोपाल राव की अध्यक्षता वाली संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने सवाल उठाया है.
समिति द्वारा कहा गया कि भारतीय रेलवे में रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन (RAC) टिकट पर यात्रा करने वाले लोगों से पूरा किराया वसूलना ठीक नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि, उन्हें RAC सीट का भी पूरा किराया देना पड़ता है.
नहीं लिया जाना चाहिए पूरा किराया
इस मुद्दे को देखते हुए पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) ने कहा कि रेल की चार्ट बन जाने के बाद भी जिन यात्रियों को कन्फर्म बर्थ नहीं मिलने की वजह से RAC में ही यात्रा करनी पड़ती है उनसे किराया नहीं लिया जाना चाहिए. समिति का सुझाव है कि रेल मंत्रालय को कुछ ऐसे सिस्टम पर काम करना चाहिए, जिससे ऐसे यात्रियों को किराया वापस मिल सके जिन्होंने अपनी यात्रा के लिए पूरा किराया दिया हो और उनको कंफर्म बर्थ नहीं मिला है. ऐसे में पूरा किराया लेने का कोई हक नहीं बनता है.
सुपरफास्ट ट्रेनों पर भी उठाया सवाल
PAC ने रेलवे में सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए जो मानक तय किए गए थे, उनपर भी सवाल उठाए. समिति ने कहा कि मई 2007 में भारतीय रेलवे ने सुपरफास्ट ट्रेन की औसत गति का मानक तय किया था. रेलवे ने ब्रॉड गेज पर 55 kmph और मीटर गेज पर 45 kmph आदि जैसे कुछ मानक तय किए थे. समिति ने कहा कि इन मानकों की अब फिर से समीक्षा की जानी चाहिए. PAC ने कहा कि रेलवे को एक नया सिस्टम बनाकर RAC किराए में बदलाव करके संसद में पेश करना चाहिए. हालांकि, अभी रेलवे की ओर से इसपर कोई नया नियम नहीं बनाया गया है.
RAC में भी देना पड़ता है पूरा किराया
कुछ लोगों को RAC बर्थ के बारे में अभी भी सटीक जानकारी नहीं है. दरअसल, RAC एक ऐसा बर्थ है, जिसमें आपको किसी अन्य व्यक्ति के साथ सीट शेयर करनी पड़ती है. ऐसा तब होता है जब आप द्वारा कराई गई टिकट कंफर्म नहीं होती है. लेकिन, इस सीट पर बैठने के लिए भी आपको उतना ही किराया देना पड़ता है, जितना कि सिंगल सीट के लिए चुकाना पड़ता है.