kidney damage signs: किडनी इंसानी शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है. यह ब्लड को साफ करती है, अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालती है. यही नहीं, किडनी ब्लड प्रेशर, इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम, पोटेशियम) और रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन को कंट्रोल करती है. आसान भाषा में कहें तो, किडनी शरीर में फिल्टरेशन का काम करती है. इसलिए अगर इसमें कुछ खराबी आ जाए तो जीवन पर संकट आ सकता है. दरअसल, आजकल के अनहेल्दी खानपान से किडनी पर अधिक दबाव पड़ता है. इस स्थिति में किडनी जहरीले रसायन को पूरी तरह से फिल्टर नहीं कर पाती है. फिर धीरे-धीरे किडनी डैमेज होने लगती है. आपको बता दें कि, किडनी अचानक खराब नहीं होतीं. इससे पहले शरीर कुछ संकेत देता है. अगर इस संकेतों को समय पर पहचान लिया जाए तो परेशानी से बचाव संभव है. अब सवाल है कि, आखिर किन संकेतों से समझें कि किडनी डैमेज होने लगी है? किडनी खराब होने पर कौन-कौन सी परेशानियां होने लगती हैं? आइए जानते हैं इस बारे में-
गुर्दे की खराबी के कारण
पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (पीकेडी): क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट मुताबिक, पीकेडी एक आनुवांशिक स्थिति है, जो आपको अपने माता-पिता में से किसी एक से विरासत में मिलती है. इसके कारण आपकी किडनी के अंदर तरल पदार्थ से भरी थैली (सिस्ट) विकसित हो जाती हैं. इसके अन्य कारणों में अनियंत्रित मधुमेह (Diabetes) और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) हैं, जो किडनी के फिल्टर करने की क्षमता को नुकसान पहुंचाते हैं.
किडनी डैमेज से पहले शरीर से मिलने वाले संकेत
पैर सूज जाना: पैरों में सूजन किडनी खराबी के संकेत हो सकते हैं. दरअसल, किडनी खराब होने पर हीमोग्लोबिन का बैलेंस बिगड़ जाता है जिसका असर पैरों में देखने को मिलता है. इसलिए पैरों में अनावश्यक सूजन को नजरअंदाज न करें.
पेशाब बार-बार आना: किडनी शरीर के वेस्ट मैटेरियल को पेशाब के रास्ते बाहर निकालती है. इसलिए किडनी खराबी की स्थिति में पेशाब की मात्रा में परिवर्तन होने लगता है. इस स्थिति में पेशाब का रंग और स्मैल भी बदल सकता है. इसके अलावा, बार-बार पेशाब आती है.
भूख न लगना: किडनी में खराबी आने पर जी मितलाने लगता है. दरअसल, पेट का अंदर वेस्ट प्रोडक्ट कई तरह के हानिकारक रसायनों से भरा रहता है. ऐसे में उल्टी भी होने लगती है और भूख कम लगती. यहां तक कि पेट में दर्द भी हो सकता है.
फेफड़ों में सूजन और सांस फूलना: सांस फूलना सिर्फ हार्ट की दिक्कतें नहीं हो सकती. अगर किडनी सही तरीके से वेस्ट मैटेरियल नहीं निकालेगी तो यह लंग्स में भी जा सकती है. जब लंग्स में वेस्ट मैटेरियल जमा होने लगे तो फेफड़े में सूजन होने लगेगी और सांस फूलने लगेगा.
हर समय थकान: अत्यधिक थकान भी किडनी डैमेज का संकेत हो सकता है. बता दें कि, किडनी फेल होने से ब्लड में टॉक्सिन एकत्रित होने लगते हैं. इससे साइड इफेक्ट के रूप में थकावट महसूस होती है.
स्किन ड्राई होना: टॉक्सिन के बिल्ड अप होने से यूरिमिक प्यूराईटिस की स्थिति पैदा होती है. इससे कुछ ऐसे मिनरल ब्लड में एकत्रित हो जाते हैं, जिससे स्किन में खुजली हो सकती है और स्किन ड्राई हो जाती है.
सोने में परेशानी होना: जब किडनी ब्लड को अच्छे से फिल्टर नहीं कर पाती है, तो टॉक्सिन एकत्रित होने लगते हैं. इससे सोने में भी दिक्कत महसूस होती है. इसलिए ऐसी दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें.