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अच्छी भली आंखों को थका रही यह बीमारी, शुरुआत में दिखते हैं ये 9 मामूली लक्षण, डॉक्टर से जानें बचाव के उपाय

Computer Vision Syndrome: आज यदि शरीर के किसी अंग का सबसे अधिक शोषण हो रहा है तो वो हैं हमारी आंखें. क्योंकि, आज लोगों का ज्यादातर समय स्क्रीन पर बीत रहा है. चाहें वो फोन हो, कंप्यूटर हो या फिर लैपटॉप. डॉक्टर की मानें तो, जब आंखों को काफी देर तक फोकस की मुद्रा में रखा जाए या फिर इन्हें रिलैक्स करने का समय न दिया जाए, तो ये आई फटीग का कारण बनता है. आइए जानते हैं कि क्या है फटीग यानी कंप्यूटर विजन सिंड्रोम-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: February 15, 2026 16:31:42 IST

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Computer Vision Syndrome: आंखें मानव शरीर की सबसे जरूरी और नाजुक अंग हैं. इनके बिना दुनिया की कल्पना मुश्किल है. क्योंकि, यही तो हैं जो हमें दुनिया की खूबसूरती का दीदार कराती हैं. इसलिए इनकी देखभाल भी अच्छे से करने की जरूरत है. लेकिन, आजकल की डिजिटल दुनिया ने आंखों को बीमार बना दिया है. आज यदि शरीर के किसी अंग का सबसे अधिक शोषण हो रहा है तो वो हैं हमारी आंखें. क्योंकि, आज लोगों का ज्यादातर समय स्क्रीन पर बीत रहा है. चाहें वो फोन हो, कंप्यूटर हो या फिर लैपटॉप. डॉक्टर की मानें तो, जब आंखों को काफी देर तक फोकस की मुद्रा में रखा जाए या फिर इन्हें रिलैक्स करने का समय न दिया जाए, तो ये आई फटीग का कारण बनता है. 

मेडिकल भाषा में आई फटीग को डिजिटल आई स्ट्रेन या फिर कंप्यूटर विजन सिंड्रोम भी कहा जाता है. आजकल आई फटीग के पीड़ितों की संख्या अधिक देखी जा रही है. ऐसे में सवाल है कि आई फटीग क्या बीमारी है? कंप्यूटर विजन सिंड्रोम शरीर के किस अंग पर कर रही है हमला? आई फटीग के लक्षण और बचाव क्या हैं? इस बारे में India News को बता रही हैं चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय दिल्ली की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शिप्रा शारदा-

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम क्या है?

डॉक्टर शिप्रा कहती हैं कि, आई फटीग (कंप्यूटर विजन सिंड्रोम) एक गंभीर बीमारी है. मेडिकल टर्म में इसे डिजिटल आई स्ट्रेन या फिर कंप्यूटर विजन सिंड्रोम भी कहते हैं. यह लंबे वक्त तक किसी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकती है. इसमें मरीज को बहुत ज्यादा थकान होती है, जो कम से कम छह महीने तक बनी रहती है. यह इंसान के शारीरिक या मानसिक कार्य को भी प्रभावित कर सकती है. कई ऐसा लंबे समय तक स्क्रीन पर देखने से, बुक रीडिंग करने से, प्रदूषण से, यूवी किरणों से या लंबे समय तक ड्राइव करने के कारण हो सकता है.

कैसे डिजिटल आई स्ट्रेन की परेशानी को कम करें

  1. आई योग जरूर करें. हाथों को रगड़ कर इसकी गर्माहट से आंखों को दबाएं. आप पेंसिल पुशअप एक्सरसाइज भी कर सकते हैं. इससे आंख की मांसपेशियां मजबूत होंगी और इनकी फ्लेक्सिबिल्टी भी बढ़ेगी.
  2. हर 20 मिनट में 20 सेकेंड के लिए अपनी आंखों को स्क्रीन से हटाएं और हर दिशा में घुमाकर एक्सरसाइज करें. स्क्रीन पर देखते देखते बीच बीच में पलकों को कई बार झपकाएं.
  3. वर्किंग की डिस्टेंस का जरूर ध्यान रखें. इसके लिए स्क्रीन को अपनी आंखों से कम से कम 50 से 60 सेमी पर रखें. ऐसा करने से आई फटीग की समस्या को दूर करने में मदद मिल सकती है.
  4. मॉनिटर की ब्राइटनेस कम करें. इसके लिए डार्क मोड ऑन कर लें या फिर बीच-बीच में स्क्रीन से ब्रेक लेते रहें. ये सभी एक प्रकार के आई वर्कआउट हैं, जो आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.
  5. स्क्रीन पर काम करते समय आंखों को हर दिशा में घुमाएं. ऐसे में आप आंखों को घुमा कर 8 का फिगर बना सकते हैं. इन सबके साथ ही, विटामिन ए, बी12 और डी 3 युक्त आहार लें, जिससे आंखों का स्वास्थ्य अच्छा बना रहे.

क्या है डॉक्टर की सलाह

आर्टिफिशियल टियर्स का इस्तेमाल करें. ये आंखों को लुब्रिकेट करता है. साथ ही आंखों की नमी बरकरार रखता है, जिससे ड्राई आईज की समस्या नहीं होती है. इसके अलावा, ड्राईनेस दूर करने के लिए डॉक्टर की सलाह से ड्रॉप ले सकते हैं.

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण

  • ड्राई आईज होना
  • आंखों से पानी आना
  • लाइट से सेंसिटिविटी
  • आंखों में जलन और दर्द
  • आंखों में खुजली होना
  • सिरदर्द की परेशानी
  • नजर का धुंधला होना
  • डबल विजन होना
  • अनिद्रा यानी नींद न आना

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