Computer Vision Syndrome: आज यदि शरीर के किसी अंग का सबसे अधिक शोषण हो रहा है तो वो हैं हमारी आंखें. क्योंकि, आज लोगों का ज्यादातर समय स्क्रीन पर बीत रहा है. चाहें वो फोन हो, कंप्यूटर हो या फिर लैपटॉप. डॉक्टर की मानें तो, जब आंखों को काफी देर तक फोकस की मुद्रा में रखा जाए या फिर इन्हें रिलैक्स करने का समय न दिया जाए, तो ये आई फटीग का कारण बनता है. आइए जानते हैं कि क्या है फटीग यानी कंप्यूटर विजन सिंड्रोम-
जानिए क्या है आंखों को थकाने वाली बीमारी. (Canva)
Computer Vision Syndrome: आंखें मानव शरीर की सबसे जरूरी और नाजुक अंग हैं. इनके बिना दुनिया की कल्पना मुश्किल है. क्योंकि, यही तो हैं जो हमें दुनिया की खूबसूरती का दीदार कराती हैं. इसलिए इनकी देखभाल भी अच्छे से करने की जरूरत है. लेकिन, आजकल की डिजिटल दुनिया ने आंखों को बीमार बना दिया है. आज यदि शरीर के किसी अंग का सबसे अधिक शोषण हो रहा है तो वो हैं हमारी आंखें. क्योंकि, आज लोगों का ज्यादातर समय स्क्रीन पर बीत रहा है. चाहें वो फोन हो, कंप्यूटर हो या फिर लैपटॉप. डॉक्टर की मानें तो, जब आंखों को काफी देर तक फोकस की मुद्रा में रखा जाए या फिर इन्हें रिलैक्स करने का समय न दिया जाए, तो ये आई फटीग का कारण बनता है.
मेडिकल भाषा में आई फटीग को डिजिटल आई स्ट्रेन या फिर कंप्यूटर विजन सिंड्रोम भी कहा जाता है. आजकल आई फटीग के पीड़ितों की संख्या अधिक देखी जा रही है. ऐसे में सवाल है कि आई फटीग क्या बीमारी है? कंप्यूटर विजन सिंड्रोम शरीर के किस अंग पर कर रही है हमला? आई फटीग के लक्षण और बचाव क्या हैं? इस बारे में India News को बता रही हैं चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय दिल्ली की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शिप्रा शारदा-
डॉक्टर शिप्रा कहती हैं कि, आई फटीग (कंप्यूटर विजन सिंड्रोम) एक गंभीर बीमारी है. मेडिकल टर्म में इसे डिजिटल आई स्ट्रेन या फिर कंप्यूटर विजन सिंड्रोम भी कहते हैं. यह लंबे वक्त तक किसी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकती है. इसमें मरीज को बहुत ज्यादा थकान होती है, जो कम से कम छह महीने तक बनी रहती है. यह इंसान के शारीरिक या मानसिक कार्य को भी प्रभावित कर सकती है. कई ऐसा लंबे समय तक स्क्रीन पर देखने से, बुक रीडिंग करने से, प्रदूषण से, यूवी किरणों से या लंबे समय तक ड्राइव करने के कारण हो सकता है.
आर्टिफिशियल टियर्स का इस्तेमाल करें. ये आंखों को लुब्रिकेट करता है. साथ ही आंखों की नमी बरकरार रखता है, जिससे ड्राई आईज की समस्या नहीं होती है. इसके अलावा, ड्राईनेस दूर करने के लिए डॉक्टर की सलाह से ड्रॉप ले सकते हैं.
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