Tingling in Feet: कभी-कभी पैर सुन्न होना या झनझनाहट होना सामान्य बात है. अगर आप लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठे रहें, टाइट जूते पहनें या पैर दब जाए, तो नसों पर दबाव पड़ता है और ‘सुई चुभने जैसा एहसास होने लगता है. आमतौर पर पोजीशन बदलते ही यह ठीक हो जाता है.
पैरों में सुन्नपन के कई कारण हो सकते हैं. सबसे सामान्य कारण नसों पर दबाव पड़ना है. अगर मांसपेशियां खिंच जाएं, पीठ में स्लिप डिस्क हो, बहुत टाइट जूते पहनें या लंबे समय तक पैर मोड़कर बैठें, तो नस दब सकती है और झनझनाहट शुरू हो सकती है. अच्छी बात यह है कि ऐसे मामलों में सही इलाज और आराम से समस्या ठीक हो सकती है.
डायबिटीज भी है एक वजह
अगर यह समस्या बार-बार हो रही है या बिना किसी कारण के लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसके पीछे कोई मेडिकल वजह हो सकती है. डायबिटीज एक बड़ा कारण है, जिसमें ब्लड शुगर बढ़ने से नसें कमजोर हो जाती हैं. इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है. इसके अलावा रीढ़ की हड्डी की समस्या, स्लिप डिस्क, नस दबना, फाइब्रोमायल्जिया या मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी स्थितियां भी सुन्नपन और झनझनाहट का कारण बन सकती हैं.कुछ मामलों में पैरों की धमनियों में रुकावट आ जाने से खून का प्रवाह कम हो जाता है. इससे भी पैरों में ठंडापन, दर्द और संवेदना कम होने जैसी दिक्कत हो सकती है.
किन लक्षणों को हल्के में न लें?
अगर सुन्नपन के साथ तेज दर्द, जलन, चलने में दिक्कत या पैरों में घाव बनना शुरू हो जाए तो सतर्क हो जाना चाहिए. खासकर अगर आपको डायबिटीज है और पैरों में चोट का एहसास नहीं हो रहा, तो यह खतरनाक हो सकता है क्योंकि छोटे घाव भी इंफेक्शन का रूप ले सकते हैं.अचानक एक तरफ के पैर में सुन्नपन, कमजोरी, बोलने में दिक्कत या चक्कर आना स्ट्रोक का संकेत भी हो सकता है. ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. लगातार या बढ़ता हुआ सुन्नपन कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
राहत और बचाव के लिए क्या करें?
- अगर शुगर की वजह से नसों को नुकसान हो रहा है तो ब्लड शुगर कंट्रोल करना सबसे जरूरी है. नसों के दर्द के लिए डॉक्टर कुछ दवाएं दे सकते हैं जो झनझनाहट और जलन कम करती हैं.
- घर पर भी कुछ आसान उपाय मदद कर सकते हैं. हल्की एक्सरसाइज और वॉक से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. जरूरत के हिसाब से ठंडी या गर्म सिकाई आराम दे सकती है. टाइट जूते न पहनें और पैरों की रोज जांच करें, खासकर अगर आपको डायबिटीज है.
- सबसे जरूरी बात यह है कि अगर समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय से बनी हुई है, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें. समय पर जांच और सही इलाज से बड़ी जटिलताओं से बचा जा सकता है.शरीर छोटे-छोटे संकेत देता है, बस हमें उन्हें समझना और सही समय पर कदम उठाना होता है.