वर्तमान में प्लास्टिक का उपयोग बढ़ता ही जा रहा है. खास तौर पर लोग प्लास्टिक की पानी की बोतलों का इस्तेमाल बहुतायत में कर रहे हैं. बाजार में मिलने वाली पानी की बोतल एक बार खरीदने के बाद वो उसे बार-बार इस्तेमाल करते हैं, जो उनके स्वास्थ्य को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रहा है.
इन बोतलों में BPA (बिस्फेनॉल ए) नामक हानिकारक यौगिक होता है. यूरोपियन इनवायरमेंट एजेंसी के अनुसार ‘बीपीए हार्मोनल डिसरप्शन का कारण बनता है, जो प्रजनन क्षमता प्रभावित करता है. यह हृदय रोग, विकास संबंधी समस्याएं और कैंसर जोखिम बढ़ा सकता है.’ यह इतना हानिकारक है कि कनाडा, फ्रांस और EU ने बेबी बॉटल्स में बीपीए बैन कर दिया है.
बीपीए क्या है और कैसे बनता है?
बीपीए पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक और एपॉक्सी रेजिन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादित होता है. यह पानी की बोतलों, फूड कैन, बोतल कैप्स और वाटर सप्लाई लाइन्स में मिलता है. डेंटल सीलेंट्स में भी इसका उपयोग होता है. गर्मी या बार-बार इस्तेमाल से यह रिसाव करता है, जो लंबे समय तक इस्तेमाल होने पर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है. पर्यावरण पर भी इसका असर पड़ता है, क्योंकि यह आसानी से विघटित नहीं होता. ये प्लास्टिक हर जगह मौजूद हैं, सुरक्षा चश्मों से लेकर हवाई जहाज के कंपोजिट पंखों तक. लेकिन एक महत्वपूर्ण बात यह है कि जब खाद्य और पेय पदार्थों के कंटेनरों में इसका उपयोग किया जाता है, तो शोधकर्ताओं ने पाया कि इसकी थोड़ी मात्रा भोजन में मिल जाती है.
बीपीए-फ्री का मतलब क्या है?
जिन उत्पादों पर बीपीए-फ्री लेबल लगा होता है इसका अर्थ है प्रोडक्ट में बिस्फेनॉल ए नामक रसायन बिल्कुल नहीं है. हालांकि, BPS या PSF जैसे समान रसायनों से भी सावधान रहें, जो समान खतरे पैदा करते हैं. बीपीए-फ्री बोतलें रीयूजेबल होती हैं, प्लास्टिक प्रदूषण कम करती हैं और पानी का प्राकृतिक स्वाद बनाए रखती हैं.
प्लास्टिक बोतलें प्लास्टिक टेस्ट छोड़ सकती हैं और अपने रसायन पानी में मिला सकती हैं. बीपीए-फ्री विकल्प स्वास्थ्य, स्थिरता और जीवन शैली का संतुलन देते हैं. रोजाना इस्तेमाल के प्रोडक्ट्स चुनते समय स्वास्थ्य प्राथमिकता दें. घर के लिए या बॉक्सःसौं के लिए बोतलें खरीदते समय इस बात पर विशेष ध्यान दें कि वो किस पदार्थ से बनी हैं. स्टील या तांबे की बोतल एक अच्छा विकल्प हो सकती हैं.