Women energetic Age: आजकल जैसी हमारी दिनचर्या है उसमें महिला-पुरुष दोनों का फिट रहना चुनौती बन गया है. सेहतमंद रहने के लिए हम हेल्दी डाइट से लेकर और न जानें क्या-क्या करते हैं. लेकिन, विज्ञान कहती है कि हमारे शरीर में एक उम्र तक ग्रोथ होती है. जब वह उम्र निकल जाती है तो फिर यह ग्रोथ रुक जाती है. इसलिए एनर्जेटिक रहने में उम्र का भी अहम रोल माना गया है. ये नेचुरल ही है कि, हम 40 के बाद एक युवा की तरह ऊर्जावान नहीं रह सकते हैं. ये बात महिला और पुरुष दोनों पर लागू होती है. हालांकि, मेल और फीमेल की फिटनेस अलग-अलग होती है. दोनों के शरीर की बनावट भी अलग है. इसलिए दोनों के ऊर्जावान रहने की उम्र का पैमाना भी अलग है. तो आज हम बात करेंगे महिलाओं की फिटनेस पर. बता दें कि, महिलाओं की चाहत, सोच, खुशी, आनंद… यानी उनकी हर एक चीज पुरुषों से अलग होती है. इसीलिए, यह एक आम धारणा है कि महिलाओं की चाहत और उनकी सोच को समझ पाना एक टेढ़ी खीर है. अब सवाल है कि आखिर, महिलाएं किस उम्र में सबसे ज्यादा जवान और ऊर्जावान होती हैं? उम्र और एनर्जी का क्या है पैमाना? आइए जानते हैं इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण-
वैज्ञानिक अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, महिलाओं की जवानी केवल शारीरिक सौंदर्य तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और हार्मोनल बदलावों से भी जुड़ी होती है. हालांकि, महिलाओं की जवानी का सबसे बड़ा संकेत उनका शारीरिक स्वास्थ्य होता है. सामान्य तौर पर युवावस्था यानी 20 से 30 साल की उम्र में महिलाओं का शरीर सबसे फिट, चुस्त-दुरुस्त और स्वस्थ होता है.
ये हार्मोन महिलाओं को बनाए रखता जवान
महिलाओं की जवानी में हार्मोनल बदलावों की भूमिका अहमहोती है. इस उम्र में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर उच्च होता है, जो महिलाओं के स्वास्थ्य और सुंदरता को बनाए रखने में मदद करता है. एस्ट्रोजन त्वचा को मुलायम और जवान बनाए रखता है और इसके कारण महिलाओं के चेहरे पर झुर्रियां कम होती हैं. इसके अलावा यह हार्मोन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है. यही वजह है कि युवावस्था में महिलाओं को आमतौर पर कम स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं.
महिलाओं की ऊर्जा और उम्र के बीच संबंध
प्रैक्टो डॉट कॉम पर डॉक्टर अमित नैले लिखते हैं कि महिलाओं की ऊर्जा और उम्र के बीच सीधा कोई संबंध नहीं है. इसको कई अन्य फैक्टर प्रभावित करते हैं. इसमें उम्र के साथ हार्मोलन बदलाव, रिलेशनशिप स्टैटस, निजी अनुभव और फिटनेस सब एक दूसरे से जुड़े हैं. महिलाओं की ऊर्जा के बारे में एक जनरल बात हर महिला पर लागू नहीं होती. हालांकि इसको कुछ एक ग्रुप के हिसाब से बांटा जा सकता है.
युवा अवस्था की जिज्ञासा
आमतौर कोई भी युवती 18 से 20 साल की उम्र में ऊर्जा से भरपूर रहती है. इस उम्र में उसके अंदर एक तरह की जिज्ञासा होती है. वह उस जिज्ञासा की पूर्ति करना चाहती है. ऐसे में वह इस उम्र में तरह के तरह से चीजों का अनुभव लेना चाहती है. हालांकि, यहां ध्यान रखना होगा कि हर चीज और माहौल अनुकूल हो तभी इस तरह जिज्ञासा की उम्मीद की जा सकती है. ऐसा लड़कों में भी देखा जाता है. लड़के भी इस उम्र में सबसे ज्यादा उम्रदराज होते हैं.
महिलाओं की 20 से 35 की उम्र का अनुभव
महिलाएं 20 से 35 साल की उम्र में सबसे ज्यादा ऊर्जावान फील करती हैं. इसकी सबसे खास वजह यह है कि, वह लाइफ में काफी हद तक सेटल हो चुकी होती हैं. उनका लाइफ पार्टनर होता है. ऐसे में दोनों मिलकर सपने देखते हैं. पार्टनर के साथ मिलकर उनका स्ट्रगल खूबसूरत बन जाता है. वह एक दूसरे की ऊर्जा के स्रोत बनते हैं. ऐसे में उनका ऊर्जावान होना लाजिमी है. हालांकि, यहां भी अपवाद है. अगर पार्टनर के साथ सब अच्छा चलता है तो.
महिलाओं की गोल्डन एज 35 से 45
महिलाओं के लिए 35 प्लस की उम्र लाइफ का गोल्डन टाइम होता है. 40 प्लस में बढ़ने के साथ महिलाएं मेनोपॉज की ओर बढ़ने लगती हैं. वह लाइफ में पूरी सेटल हो चुकी हैं. वे और उनका लाइफ पार्टनर पूरी तरह एक दूसरे के पूरक बन चुके होते हैं. इस दौरान उनकी बॉडी में एक बार फिर बड़ा हार्मोनल चेंज होता है. इससे उनकी ऊर्जा पर भी असर पड़ता है. लेकिन, कई शोध में दावा किया गया है कि अगर परिवार में खुशी और आनंद हो, महिला के जीवन में आनंद हो तो कई दफा वह इस उम्र में भी काफी ऊर्जावान फील करती हैं. उनकी ऊर्जा कई बार किसी युवती की तरह होती हैं. बशर्ते उनको यह फील होना चाहिए कि उनको लाइफ ने हर चीज दिया है.