आलू कार्बोहाइड्रेट्स का एक अच्छा सोर्स है, जिसे अधिकांश लोगों द्वारा खाया जाता है. आलू को किसी भी सब्जी में डाल देने से उसका स्वाद बढ़ाया जा सकता है. लेकिन,आलू केवल किचन तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह अन्य भी कई काम आती है. हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक अगर आलू को 8 मिनट तक उबाला जाए तो ऐसे में वह एक पोटैटो बैटरी की तरह काम करती है. हालांकि, यह सुनने में काफी अटपटा लग रहा होगा कि आलू बैटरी की तरह कैसे काम कर सकती है.
यह बात पूरी तरह सही है. आप आलू का इस्तेमाल करके अपने घर की लाइट बचा सकते हैं. चलिए इस लेख के माध्यम से जानते हैं इसके पीछे के साइंस के बारे में.
आलू से कैसे बन सकती है लाइट?
Hebrew University of Jerusalem द्वारा की गई इस स्टडी में यह दावा किया जा रहा है कि आलू को 8 मिनट तक उबालने से वह बैटरी की तरह काम करती है. यह स्टडी Smithsonian Magazine में प्रकाशित की गई है. दरअसल, इसके पीछे का लॉजिक या साइंस है कि आलू इलेक्ट्रोलाइट्स या सॉल्ट जैसा काम करता है. माना जाता है कि आलू में जिंक की कील और तांबे का सिक्का लगाया जाता है तो ऐसे में एक रिएक्शन होता है. दरअसल, आलू में फॉस्फोरिक एसिड, जो जिंक के साथ रिएक्ट करता है और इससे इलेक्ट्रॉन निकलते हैं. इससे इलेक्ट्रॉन का बहाव उसमें लगाए गए तार के जरिए एलईडी बल्ब तक पहुंचता है, जिससे लाइट जलती है. माना जाता है कि बैटरी की तुलना में यह सस्ती भी पड़ती है.
कैसे काम करता है यह तरीका?
अगर साइंस के तरीके और वैज्ञानिकों के नजरिए से देखा जाए तो आलू को अगर 8 मिनट तक उबाला जाए तो पाए जाने वाले सेल्स टूटने लगते हैं. ऐसी स्थिति में इलेक्ट्रिसिटी रजिस्टेंस यानि बिजली का प्रतिरोध कम होने लगता है. इस स्थिति में इलेक्ट्रॉन आसानी से बहने लगते हैं. इसलि आलू में बिजली पैदा करने की क्षमता होती है. आलू जिंक और कॉपर इलेक्ट्रॉड्स के साथ रिएक्ट करती है, जिससे एलईडी बल्ब को जलाया जा सकता है.
क्या वाकई एक महीने तक जल सकता है बल्ब?
देखा जाए तो आलू में वॉल्टेज काफी कम होता है, जो (~0.5 V to 0.9) होता है. अगर आप आलू की मदद से घर में एलईडी बल्ब जलाना चाहते हैं तो ऐसे में आपको कई आलो को स्लाइस में काटकर एकसाथ लगाना होगा, जिसकी मदद से बल्ब जलाया जा सकता है.