Cervical Cancer: जनवरी का महीना सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह (Cervical Cancer Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार पर ध्यान केंद्रित करना है. ये कैंसर दुनियाभर की महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे कॉमन कैंसर है. डॉ. मीरा पाठक से जानिए यह कैंसर किस उम्र की महिलाओं में अधिक होने का खतरा रहता है.
डॉक्टर से जानिए, किस उम्र की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा अधिक. (Canva)
Cervical Cancer: जनवरी का महीना सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह (Cervical Cancer Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार पर ध्यान केंद्रित करना है. महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा में होने वाली सर्वाइकल कैंसर बेहद जानलेवा बीमारी है. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के रि-प्रोडक्शन ऑर्गन में होने वाला जानलेवा कैंसर है. यह कैंसर महिलाओं के शरीर में इतने धीरे से पनपता है. इस कैंसर के सेल्स यूट्रस और वेजाइना को जोड़ने वाले हिस्से सर्विक्स में होता है. ये कैंसर दुनियाभर की महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे कॉमन कैंसर है. हालांकि, इसे समय रहते पहचानकर और करके आसानी से रोका जा सकता है.
नोएडा की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि, गर्भाशय के निचले हिस्से में विकसित होने वाला सर्वाइकल कैंसर, हाई रिश्क वाले ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमणों के माध्यम से होता है. इसे टीकाकरण के जरिए रोकने और स्क्रीनिंग से प्रारंभिक अवस्था में ही कैंसर का पता लगाया जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के अनुसार, HPV वैक्सीन न लेने से हर 2 मिनट में एक महिला की मौत हो रही है. इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है यह जानना कि कौन सी उम्र में इस कैंसर का रिस्क सबसे ज्यादा होता है ताकि सही टेस्ट और उपचार से इसे रोका जा सके.
एक्सपर्ट के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर आमतौर पर 35 से 55 साल की उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है. हालांकि, 40 से 50 साल के बीच की महिलाएं इसका सबसे ज्यादा शिकार होती हैं. अगर इस उम्र में किसी महिला को संबंध के बाद ब्लीडिंग (पोस्ट कॉइटल ब्लीडिंग) या संबंध के दौरान दर्द (पोस्ट कॉइटल पेन) जैसी शिकायत होती है, तो यह सर्वाइकल कैंसर के सबसे कॉमन लक्षण माने जाते हैं.
डॉ. पाठक कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर को आसानी से रोका जा सकता है. इसके लिए समय रहते स्क्रीनिंग और वैक्सीनेशन जरूरी है. इसके दो मुख्य तरीके हैं-
पहला उपाय- पैप स्मीयर टेस्ट हर उस महिला को करना चाहिए जो सेक्सुअली एक्टिव हो चुकी है. इस टेस्ट में सैंपल माउथ ऑफ सर्विक्स से लिया जाता है. यह टेस्ट हर तीन साल में किया जाना चाहिए. यदि 65 साल तक लगातार पैप स्मीयर नॉर्मल आता रहे, तो उसके बाद यह टेस्ट बंद किया जा सकता है.
दूसरा उपाय- एचपीवी डीएनए टेस्टिंग जो यह पता लगाने में मदद करता है कि महिला को ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) का इन्फेक्शन तो नहीं है. एचपीवी वायरस ही सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. इस टेस्ट को भी माउथ ऑफ सर्विक्स से सैंपल लेकर किया जाता है. अगर 30 साल की उम्र से यह टेस्ट शुरू किया जाए तो हर पांच साल पर दोबारा टेस्ट कर सकते हैं. इस टेस्ट के साथ पैप स्मीयर भी कराई जा सकती है.
इसके अलावा, एचपीवी वैक्सीन भी सर्वाइकल कैंसर से बचाव में बहुत मददगार है. वैक्सीन को यौन गतिविधि शुरू होने से पहले लगवाना सबसे सुरक्षित माना जाता है. डॉ. पाठक कहती हैं कि शुरुआत में हल्की ब्लीडिंग या दर्द को हल्के में न लें. समय पर जांच और टेस्ट कराना ही इस कैंसर को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है.
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