दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 2,300 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिसके चलते सरकार ने एक चेतावनी जारी की है क्योंकि H1N1, इन्फ्लूएंजा B और कोविड का प्रकोप जारी है. यहां अधिकारियों द्वारा सावधानियों और जोखिमों के बारे में दी गई जानकारी दी गई है.
दिल्ली में स्वाइन फ्लू, COVID और इन्फ्लुएंजा का कहर! तेजी से बढ़ रहे मामले (AI generated image)
भारत में स्वाइन फ्लू के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जिसके चलते स्वास्थ्य अधिकारियों ने निगरानी और परामर्श जारी करने में तेजी ला दी है. दिल्ली अब तक सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां मामलों की संख्या सामान्य से कहीं अधिक है.
बीते कई दिनों से राजधानी में फ्लू, इन्फ्लुएंजा और कोविड के मामले बढ़ते जा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है और लगातार बढ़ते हुए मामलों की निगरानी कर रहा है.
पीटीआई के अनुसार, दिल्ली में अब तक स्वाइन फ्लू के 2,308 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पिछले वर्षों के औसत से लगभग आठ गुना अधिक है. मामलों में इस अचानक वृद्धि को देखते हुए दिल्ली सरकार ने एक जन परामर्श जारी किया है, जिसमें निवासियों से विशेष रूप से भीड़-भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतने का आग्रह किया गया है. वहीं ICMR के निदेशक राजीव बहल ने मंगलवार को बताया कि लगभग 650 फ्लू के मामले भी दर्ज किए गए हैं, और सरकार ने फिलहाल कोविड-19 जैसी सावधानियों का पालन करने की सिफारिश की है, हालांकि मास्क पहनना अनिवार्य नहीं है.
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वह स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और शहर में बढ़ते मामलों से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है. अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तैयारी पूरी कर ली है कि अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ती मांग को पूरा कर सकें. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने निवासियों को आश्वस्त किया है कि घबराने की कोई बात नहीं है और लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया है. सलाह में भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने और बुनियादी श्वसन स्वच्छता का पालन करने पर जोर दिया गया है. H1N1 मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं और मंत्री ने कहा कि अगर किसी मरीज को अस्पताल में बिस्तर देने से मना किया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी.
ICMR के निदेशक राजीव बहल ने बताया कि कोविड महामारी के बाद से भारत में बीमारियों की निगरानी प्रणाली में काफी सुधार हुआ है, जिससे अधिकारियों को देश भर में सक्रिय वायरसों की लगभग वास्तविक समय में जानकारी मिल रही है. यह निगरानी देशभर की 73 प्रयोगशालाओं के माध्यम से की जाती है, जहां गंभीर श्वसन संक्रमण से जुड़े मामलों के लिए प्रति सप्ताह लगभग 25 नमूनों की जांच की जाती है. वर्तमान में, निगरानी आंकड़ों से पता चलता है कि H1N1 का प्रसार अधिक है, साथ ही इन्फ्लूएंजा B भी है, जो अभी तक प्रमुख रूप से नहीं फैला है, और कोविड के मामलों की संख्या कम है. इसी तरह की निगरानी प्रणालियों का उपयोग देश भर में दस्त और अज्ञात बुखार के मामलों पर नज़र रखने के लिए भी किया जाता है.
बहल ने कहा कि फ्लू वायरस में लगातार बदलाव होते रहते हैं, यही कारण है कि पिछले साल फ्लू होने से इस मौसम में दोबारा होने से बचाव नहीं मिलता. उन्होंने मौजूदा मामलों में आई तेजी को मौसमी H1N1 संक्रमण बताया, न कि कोई नई या असामान्य घटना, और कहा कि ज्यादातर संक्रमण हल्के ही रहते हैं. हालांकि, छोटे बच्चों, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए जोखिम अधिक बना रहता है.
ICMR के निदेशक राजीव बहल की सलाह है कि फ्लू के लक्षण दिखने पर दो से तीन दिन आराम करें, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पिएं और पौष्टिक आहार लें ताकि शरीर ठीक हो सके. चूंकि यह संक्रमण श्वसन बूंदों के माध्यम से फैलता है जो दो मीटर तक फैल सकती हैं, इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि बार-बार छुई जाने वाली सतहों को साफ रखें और चेहरे को बार-बार छूने से बचें. साथ ही उन्होंने आगे कहा कि एंटीबायोटिक्स इस संक्रमण के खिलाफ कोई असर नहीं करेंगी और एंटीवायरल दवाएं केवल गंभीर मामलों के लिए रखी जाती हैं.
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