Ayurvedic Diet Calendar: आजकल अनहेल्दी लाइफस्टाइल और गलत खानपान ने सेहत पर बहुत गहरा असर डाला है. इससे तमाम गंभीर बीमारियां जन्म ले रही हैं. इन बीमारियों से बचने के लिए हेल्थ एक्सपर्ट हेल्दी डाइट लेने की सलाह देते हैं. अगर बात आयुर्वेद की करें तो, यहां खानपान सेहत का मुख्य आधार है, जो दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करने के लिए ताज़ा, सुपाच्य और मौसमी भोजन पर जोर देता है. ऐसा करने से पाचन तंत्र मजबूत रहता है और शरीर में रोगों की संभावना कम होती है. आयुर्वेद जहां, वसंत ऋतु में हल्का और कफ कम करने वाला भोजन करने की सलाह देता है, तो गर्मी में ठंडक देने वाले फल-पेय खाने के लिए कहता है. तो वहीं, बारिश में सुपाच्य आहार और सर्दियों में पौष्टिक तथा ऊर्जा देने वाला भोजन लेने की सलाह दी जाती है. कुल मिलाकर साल 12 महीने हेल्दी डाइट लेना चाहिए. इसके अलावा सबसे जरूरी बात यह है कि, खाने को चबा-चबाकर खाना चाहिए. यह बात मेडिकल साइंस भी मान चुका है. 19 मार्च 2026 से हिन्दू नववर्ष शुरू होने वाला है. ऐसे में आयुर्वेद से जान लें सेहतमंद रहने के लिए साल के किस महीने क्या खाना चाहिए? आइए जानते हैं इस बारे में- किस महीने में क्या खाना फायदेमंद? चैत्र (मार्च-अप्रैल): हिन्दी महीना चैत्र यानी मार्च और अप्रैल में चने का सेवन करना चाहिए. दरअसल, चना आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है. चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4-5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है. नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है. वैशाख (अप्रैल-मई): वैशाख महीने में गर्मी बढ़ जाती है. आयुर्वेद के मुताबिक, अप्रैल-मई के महीने में बेल का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा. वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है. ज्येष्ठ (मई-जून): ज्येष्ठ का माह आने तक भारत में गर्मी अपने सितम पर होती है. इस महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्यवर्द्धक होता है, ठंडी छाछ, लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें. बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजों के सेवन से बचें. इनके सेवन से बीमारियां का खतरा हो सकता है. अषाढ़ (जून-जुलाई): आषाढ़ माह यानी जून-जुलाई में आम, पुराने गेहूं, सत्तू, जौ, भात, खीर, ठंडे पदार्थ, ककड़ी, पलवल और करेला आदि का सेवन फायदेमंद है. आयुर्वेद कहता है कि, आषाढ़ के महीने में गर्म चीजों का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. श्रावण (जुलाई-अगस्त): आयुर्वेद के अनुसार, श्रावण माह यानी जुलाई-अगस्त में हरड का इस्तेमाल करना चाहिए. बता दें कि, श्रावण में हरी सब्जियों का त्याग करें एव दूध का इस्तेमाल भी कम करें. भोजन की मात्रा भी कम लें, क्योंकि पुराने चावल, पुराने गेहूं, खिचड़ी, दही एवं हलके सुपाच्य भोजन अपनाएं. भाद्रपद (अगस्त-सितंबर): अगस्त-सितंबर यानी भाद्रपद महीने में हलके सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल कर वर्षा का मौसम होने के कारण आपकी जठराग्नि भी मंद होती है इसलिए भोजन सुपाच्य ग्रहण करें. आश्विन (सितंबर-अक्टूबर): इस महीने में दूध , घी, गुड़ , नारियल, मुन्नका, गोभी आदि का सेवन कर सकते है. ये गरिष्ठ भोजन है लेकिन फिर भी इस महीने में पच जाते है क्योकि इस महीने में हमारी जठराग्नि तेज होती है. कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर): कार्तिक यानी अक्तूबर-नवंबर महीने में गरम दूध, गुड, घी, शक्कर, मूली आदि का उपयोग करें. वहीं, ठंडे पेय पदार्थों का प्रयोग छोड़ दें. यानी छाछ, लस्सी, ठंडा दही, ठंडा फ्रूट ज्यूस आदि के सेवन से बचें. बता दें कि, इन चीजों के सेवन से आपका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है. अगहन (नवंबर-दिसंबर): आयुर्वेद के मुताबिक, अगहन माह यानी नवंबर-दिसंबर में सर्दियों शुरू हो जाती हैं. ऐसे में सेहतमंद रहने के लिए जरूरी है कि ठंडी और अधिक गरम वस्तुएं खाने से बचें. ऐसा करने से आपको सेहत से जुड़ी परेशानियां होने का खतरा बढ़ सकता है. पौष (दिसंबर-जनवरी): पौष यानी दिसंबर-जनवरी में दूध, खोया एवं खोए से बनी चीजें, गोंद के लाड्डू, गुड़, तिल, घी, आलू, आंवला आदि खाना फायदेमंद है. इसके अलावा, ठंडे पदार्थ, पुराना अन्न, मोठ, कटु और रुक्ष भोजन करने से बचें. माघ (जनवरी-फ़रवरी): माघ यानी जनवरी-फरवरी में सर्दी अपने पूरे सितम पर होती है. ऐसे में इस महीने में गरम और गरिष्ठ भोजन का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए आप घी, नया अन्न, गोंद के लड्डू आदि खा सकते हैं. फाल्गुन (फरवरी-मार्च): फाल्गुन यानी फरवरी-मार्च में गुड़ का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद है. इसके अलावा, सुबह के समय योग एवं स्नान का नियम बना लें. ध्यान रहे कि, इस महीने चने का उपयोग करने से बचें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.)