Stress Relief Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान के पास न समय पर खाने का वक्त है न सोने का. तनाव अलग से घेर रहा है. मोटे तौर पर कह सकते हैं कि, तनाव इंसान का जीवनसाथी बन चुका है. एक तरफ काम का दबाव है, तो दूसरी तरफ पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता. इसी का नतीजा है कि, आज बड़ी संख्या में युवा भी स्ट्रेस शिकार हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो स्ट्रेस से निपटने का एक ही फॉर्मला है ‘अच्छी लाइफस्टाइल, हेल्दी डाइट, योग, मेडिटेशन’. इसके बाद भी कुछ लोगों को लगता है कि स्ट्रेस से निपटने में दवा काम आ सकती है. लेकिन सच्चाई इसके उलट है. ऐसे में सवाल है कि. क्या सच में दवा से स्ट्रेस कम किया जा सकता है? इस बारे में सच्चाई जानने के लिए India News ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के साइकेट्रिस्ट डॉ. विवेक कुमार से बात की-
स्ट्रेस दूर करने का फॉर्मूला
डॉक्टर कहते हैं कि, स्ट्रेस की समस्या झेल रहे लोगों की फेहरिस्त लंबी है. आमतौर पर स्ट्रेस से निजात पाने के लिए स्क्रीन से ब्रेक लेना, काम से छुट्टी लेना, पसंदीदा एक्टिविटी करना, फैमिली के साथ टाइम स्पेंड करना और बाहर घूमने की सलाह दी जाती है. कई ऐसे लोग हैं जो डेली एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन के जरिए स्ट्रेस को कंट्रोल कर लेते हैं. कई मामलों में स्ट्रेस ज्यादा बढ़ने से एंजायटी व डिप्रेशन की कंडीशन होती है. अगर ऐसा होता है, तब लोगों को दवा लेने की सलाह दी जाती है.
तनाव में कोई मैजिक पिल नहीं
डॉ. विवेक कहते हैं कि, स्ट्रेस में दवा का तुरंत असर एक बड़ा भ्रम है. क्योंकि, तनाव के लिए कोई मैजिक पिल नहीं होती है. बता दें कि, तनाव की प्रकृति, उसका टाइम और व्यक्ति की मेंटल कंडीशन के आधार पर ही ट्रीटमेंट तय किया जाता है. हालांकि, कुछ दवाएं जरूर हैं, जो तेजी से असर दिखाती हैं, लेकिन उनका उपयोग विशेष परिस्थिति और डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाता है.
बिना एक्सपर्ट के हर दवा नुकसानदायक
डॉक्टर कहते हैं कि, कुछ मामलों में डॉक्टर एंटी-एंजायटी दवाएं देते हैं, जो घबराहट और चिंता को जल्दी कम कर सकती हैं. हालांकि इन दवाओं के साथ सबसे बड़ा रिस्क एडिक्शन का होता है. लंबे समय तक या बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है. जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है और डिप्रेशन का रूप लेने लगता है, तब डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट दवाएं सुझाते हैं.
क्या तुरंत असर करती हैं स्ट्रेस की दवाएं
स्ट्रेस की कोई भी दवाएं तुरंत असर नहीं करतीं, बल्कि 2 से 4 हफ्तों में धीरे-धीरे सुधार लाती हैं. इसलिए इन्हें इंस्टेंट रिलीफ के बजाय लॉन्ग टर्म ट्रीटमेंट के रूप में देखा जाता है. डॉक्टर का साफ कहना है कि हल्के और मीडियम लेवल के तनाव के लिए दवा की जरूरत नहीं होती है. नियमित व्यायाम, योग और ध्यान, पर्याप्त नींद और अपनों से खुलकर बात करने से स्ट्रेस कम हो सकता है. अगर कोई परेशानी हो तो डॉक्टर की सलाह जरूरी है.