Weight Loss Medicine and Fatty Liver: लिवर की कोशिकाओं के अंदर अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है, जिसके कारण ‘फैटी लिवर रोग‘ हो जाता है. लिवर में वसा कोशिकाओं के जमाव या संचय को ‘हेपेटिक स्टीटोसिस’ भी कहा जाता है. इस स्थिति के कारण अक्सर लिवर में सूजन आ जाती है और इसके आस-पास के ऊतकों को नुकसान पहुंचता है. हालाँकि, लिवर में कुछ मात्रा में वसा का होना सामान्य बात है, लेकिन जब यह लिवर के कुल वज़न के 10% से अधिक हो जाती है, तो डॉक्टर इसे ‘फैटी लिवर’ की श्रेणी में रखते हैं.
फैटी लिवर के लक्षण और प्रकार
फैटी लिवर के कोई विशिष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते है. लेकिन फिर भी, शोधकर्ताओं ने फैटी लिवर रोग के बढ़ने के तीन चरण पहचाने हैं. सूजन, फाइब्रोसिस और गंभीर लिवर सिरोसिस, जिसमें स्वस्थ ऊतकों की जगह स्कार ऊतक ले लेते हैं. फैटी लिवर रोग दो श्रेणियों में आता है. अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग.
फैटी लिवर में वजन घटाने का महत्व
लिवर के स्वास्थ्य के लिए, वजन कम करना इस स्थिति के प्रबंधन और उपचार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. चूंकि मोटापा और फैटी लिवर की बीमारी अक्सर साथ-साथ होती हैं, इसलिए अध्ययनों से पता चला है कि शरीर के वजन में थोड़ी सी भी कमी लिवर में जमा फैट की मात्रा को कम कर सकती है. इससे लिवर के कामकाज और स्वास्थ्य में सुधार होता है, साथ ही लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस जैसी स्थायी जटिलताओं की संभावना भी कम हो जाती है. फैटी लिवर के लिए वजन कम करने के फायदों में लिवर के अंदर फैट के जमाव में कमी और लिवर के समग्र कामकाज में सुधार शामिल है.
फैटी लिवर और डायबिटीज आपस में जुड़े
डॉक्टरों के अनुसार, फैटी लिवर और डायबिटीज आपस में जुड़े हुए हैं. जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या होती है, उनमें टाइप 2 डायबिटीज़ होने का खतरा ज़्यादा होता है; वहीं, डायबिटीज के मरीजों में फैटी लिवर होने का खतरा बढ़ जाता है. कई मरीज़ इस समय डायबिटीज और फैटी लिवर, दोनों समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे मामलों में, वजन कम करने वाली दवाएं इन दोनों समस्याओं से राहत दिलाने में बेहद असरदार साबित हो सकती हैं.
फैटी लिवर और डायबिटीज का गहरा संबंध
गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. पारस अग्रवाल ने न्यूज 18 को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि जिन दवाओं को हम आम तौर पर वजन घटाने वाली दवाएं कहते हैं, उन्हें असल में शुरू में टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए बनाया गया था. ये दवाएं वजन घटाने में मदद करती हैं और डायबिटीज को कंट्रोल करने में भी सहायक होती हैं. कई स्टडीज़ से पता चला है कि डायबिटीज के अलावा, ये दवाएं फैटी लिवर की बीमारी से राहत दिलाने में भी असरदार साबित हो रही हैं. सच तो यह है कि फैटी लिवर और डायबिटीज के बीच गहरा संबंध है. लिवर शरीर के अंदर ग्लूकोज़ जमा करता है. जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज हो जाती है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण लिवर में फैट जमा होने लगता है—इस स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है. एक स्थिति दूसरी स्थिति को और बिगाड़ देती है; इसलिए, दोनों को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है.
वजन घटाने वाली दवाओं से फैटी लिवर में राहत
आगे उन्होंने बताया कि जो लोग सिर्फ फैटी लिवर की बीमारी से पीड़ित हैं, वे भी वजन घटाने वाली दवाएं ले सकते हैं. इससे न सिर्फ उन्हें फैटी लिवर से राहत मिलती है, बल्कि टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा भी कम हो जाता है. वजन घटाने वाली दवाएं खास तौर पर GLP-1 क्लास की दवाएं—शरीर में इंसुलिन के स्राव को नियंत्रित करती हैं और भूख को कम करती हैं. जब इन दवाओं के असर से शरीर का वजन कम होने लगता है, तो इसका सबसे ज्यादा सकारात्मक असर लिवर पर पड़ता है. वजन घटाने की प्रक्रिया के दौरान, शरीर मुख्य रूप से लिवर में जमा अतिरिक्त चर्बी का इस्तेमाल ईंधन के तौर पर करता है. इससे लिवर की सूजन कम होती है और उसकी कार्यक्षमता बेहतर होती है. यह एक ऐसा फायदा है जो फैटी लिवर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी तरह का सलाह चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर या एक्सपर्ट से सलाह लें